कितना गर्म रहा 2025, जो दे गया खतरनाक चेतावनी
हमारा ग्रह मानो बुखार से तप रहा है. हर गुजरता साल गर्म, ज्यादा गर्म होता जा रहा है.

सबसे गर्म वर्षों की कड़ी में रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं
हम इंसानों के ही तौर-तरीके, जिंदगी जीने का हमारा ढर्रा पृथ्वी को तपती आबोहवा की ओर दौड़ाए जा रहा है. तभी तो, सबसे गर्म सालों की शृंखला में 2025 भी कीर्तिमान बनाकर गया है. जिस साल को हम पीछे छोड़ आए हैं, वो भी सबसे गर्म वर्षों की कड़ी में लगातार तीसरा रिकॉर्ड रहा.
प्री-इंडस्ट्रियल लेवल के मुकाबले क्या हाल रहा?
ब्रिटेन के मौसम विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लेया (यूईए) और नेशनल सेंटर एटमॉस्फैरिक साइंस ने 2025 का जो डेटा जारी किया है, उससे इस बात की पुष्टि हो गई है. लगातार तीसरे साल तापमान, औद्योगिकरण (सन् 1850-1900 का औसत) से पहले की तुलना में 1.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा.
हर साल वही हाल, कब उठाएंगे ठोस कदम
जिस नियमित अंदाज में ये हो रहा है, उसमें तो अब मानो ये एक नियमित प्रेस रिलीज सरीखी जानकारी रह गई है. खुश होने को बस इतना है कि 2025 में (14.97 डिग्री सेल्सियस) दुनिया का औसत तापमान, 2024 (15.1 डिग्री सेल्सियस) से कम था. यह यूरोपियन यूनियन के अर्थ ऑर्ब्जवेशन प्रोग्राम 'कॉपरनिकस' का डेटा है.
तो 2023, 2024, 2025 के बीच विजेता कौन है?
यूं तो बीते एक दशक से ही दुनिया में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की जा रही है, लेकिन इनमें भी क्रमवार तीन साल सबसे गर्म रहे. इनका रिकॉर्ड क्रमश: यूं रहा- 2023 में +1.48 डिग्री सेल्सियस, 2024 में +1.6 डिग्री सेल्सियस और 2025 में +1.6 डिग्री सेल्सियस. यानी, अब तक 2024 टॉप पर है. यह पहला साल था, जब औसत तापमान प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से डेढ़ डिग्री सेल्सियस के भी पार चला गया.
रिकॉर्ड गर्मी की वजह क्या रही?
प्रोफेसर टिम ओस्बोर्न, यूईए की क्लाइमेट रिसर्च यूनिट के निदेशक हैं. समाचार एजेंसी डीपीए से बातचीत में उन्होंने बताया कि 2023-24 ज्यादा गर्म रहने की मुख्य वजह क्या रही. प्रशांत महासागर में जलवायु के कुदरती उतार-चढ़ाव, अल नीनो पैटर्न ने बड़ी भूमिका निभाई. इन्होंने वैश्विक तापमान में करीब 0.1 डिग्री जोड़ दिया.
वक्त गंवाए बिना करने होंगे ठोस उपाय
साल 2025 में यह थोड़ा कमजोर तो हुआ, लेकिन चिंता की बात यह है कि अल नीनो जैसे चक्र के बिना भी अतिशय गर्मी का सिलसिला कायम रहा. एक्सपर्ट रेखांकित करते हैं कि यह स्थिति चीख-चीखकर बता रही है कि हमें हर हाल में, बिना वक्त गंवाए अपनी पृथ्वी को तपाने के काम रोक देने चाहिए. या कम-से-कम, उनमें काफी कमी तो लानी ही चाहिए.
इंसानों की क्या भूमिका है?
इसमें शक की गुंजाइश नहीं कि इंसानी गतिविधियां, ग्लोबल वॉर्मिंग का मुख्य कारक बनी हैं. सबसे ज्यादा असर हुआ है, जीवाश्म ईंधनों का. कॉपरनिकस के डायरेक्टर, कार्लो ब्यॉनटेम्पो ने डीपीए से बातचीत में कहा, "पिछले 11 साल अब तक के रिकॉर्ड में सबसे गर्म रहे, यह तथ्य ज्यादा गर्म जलवायु के अचूक रुझान का और भी अधिक सबूत देता है."
ऐसे में भयावह दिखता है भविष्य
एक्सपर्ट आगाह करते हैं कि हमारी दुनिया पेरिस क्लाइमेट डील में तय की गई डेढ़ डिग्री की सीमा की तरफ बढ़ रही है. जैसा कि ब्यॉनटेम्पो कहते हैं, "हम निश्चित ही इसे पार करेंगे." इसके नतीजे भयावह होंगे. प्राकृतिक आपदाएं और ज्यादा नियमित हो जाएंगी. चरम मौसमी घटनाओं का चक्र ज्यादा आम होता जाएगा. अप्रत्याशित मौसम खेती जैसे कामों को तहस-नहस कर देंगे.