ऑटिज्म: वो मशहूर नाम, जिन्होंने ऑटिज्म को अपनी ताकत बना लिया
कैसे इलॉन मस्क, ग्रेटा थुनबर्ग, एंथनी हॉपकिंस जैसे लोगों ने ऑटिज्म को अपनी 'सुपरपावर' बनाया.

हर 127 में से एक इंसान को ऑटिज्म
ऑटिज्म या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (एएसडी) दिमाग के विकास से जुड़ी अलग‑अलग तरह की समस्याओं का समूह है. इसके लक्षण बचपन में दिखाई दे सकते हैं, लेकिन कई बार इसकी पहचान बाद में होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, साल 2021 में लगभग हर 127 में से एक व्यक्ति को ऑटिज्म था. आइए जानते हैं कुछ प्रसिद्ध हस्तियों के बारे में, जो इस कंडीशन से प्रभावित रहे.
इलॉन मस्क
इलॉन मस्क ने 2021 में 'सैटरडे नाइट लाइव' नाम के एक कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए बताया कि वह ऑटिज्म से प्रभावित रहे हैं. उन्होंने कहा, "मैं आज रात इतिहास बना रहा हूं, क्योंकि मैं एसएनएल होस्ट करने वाला पहला ऐसा व्यक्ति हूं जिसे ऐस्पर्गर सिंड्रोम है, या कम-से-कम पहला ऐसा व्यक्ति हूं जो इसे स्वीकार कर रहा है." ऐस्पर्गर सिंड्रोम, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम का ही हिस्सा माना जाता है.
ग्रेटा थुनबर्ग
ग्रेटा एक स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता हैं. अपने इंस्टाग्राम पेज पर उन्होंने लिखा, "12 साल की उम्र में मुझे पता चला की मुझे ऐस्पर्गर सिंड्रोम है. समाज में इस विषय पर जागरूकता कम है. इस से कई बार बीमारी का पता नहीं चलता और जरूरतमंदों को सहायता नहीं मिलती. हमें जागरूकता फैलानी चाहिए, इससे काफी जिंदगियां बच सकती हैं." थुनबर्ग, एएसडी के लिए आवाज उठाती रही हैं और ऐस्पर्गर को अपनी 'सुपरपावर' मानती हैं.
एंथनी हॉपकिंस
एंथनी हॉपकिंस मशहूर फिल्म अभिनेता हैं. 70 साल की उम्र में उन्होंने ऐस्पर्गर सिंड्रोम के डायग्नोसिस का खुलासा किया. उन्होंने ऑटिज्म को अपने लिए 'बड़ा तोहफा' बताते हुए कहा कि उनकी सफलता, बारीकियों पर ध्यान देने की उनकी आदत से आती है. हालांकि, 2025 में "द संडे टाइम्स" से बातचीत में हॉपकिंस ने कहा, "ये (ऑटिज्म और ऐस्पर्गर सिंड्रोम) सब लेबल हैं. मतलब किसे फर्क पड़ता है. यह सब अब फैशन बन गया है."
अल्बर्ट आइंस्टाइन
'जर्नल ऑफ ऑटिज्म एंड डेवेलपमेंटल डिसॉर्डर्स' के मुताबिक, इस बात पर आज भी बहस होती है कि क्या आइंस्टाइन को भी ऑटिज्म था. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बोलने के विकास में देरी, किसी एक विषय पर बहुत गहराई से और लगातार ध्यान देना, परिवार से भावनात्मक दूरी और व्यक्तिगत रिश्तों में मुश्किल जैसे लक्षण बताते हैं कि आइंस्टाइन को ऑटिज्म रहा होगा. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हो सकी.
आइजक न्यूटन
कई इतिहासकारों और मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूटन में ऑटिज्म के लक्षण रहे होंगे. उनकी बेहद तेज एकाग्रता, समाज से अलग रहना और भावनाओं में उतार‑चढ़ाव इस संभावना को मजबूत करते हैं. चूंकि साल 1940 से पहले ऑटिज्म का औपचारिक डायग्नोसिस नहीं था, इसलिए उस दौर के व्यक्तियों के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता. सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है.
टैंपल ग्रैंडिन
टैंपल ग्रैंडिन मशहूर व्यवहार वैज्ञानिक और पशु विज्ञान विशेषज्ञ हैं. उन्होंने अपनी किताब 'थिंकिंग इन पिक्चर्स" और "द ऑटिस्टिक ब्रेन" में ऑटिज्म से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में विस्तार से बताया है. साल 2010 के अपने टेड टॉक में उन्होंने कहा, "हमें ऑटिज्म का इस्तेमाल किसी को अपमानित करने के लिए नहीं करना चाहिए. यह किसी व्यक्ति की पहचान का हिस्सा है और सही सहयोग मिले, तो उनकी ताकत भी बन सकता है."
डैन एक्रोइड
प्रसिद्ध हास्य कलाकार डैन एक्रोइड ने 'द हफिंगटन पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में कहा, "ऐस्पर्गर सिंड्रोम वाले कई लोग कुछ क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा लेकर आते हैं. मैं भी मानता हूं कि सोच ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही, जिसने मुझे रचनात्मक रूप से आगे बढ़ने में मदद की." एक टॉक शो में उन्होंने यह भी कहा, "ऑटिज्म कोई मजाक नहीं है. यह ऐसी चीज नहीं है, जिसे आप मजे में किसी को कह दें. यह एक वास्तविक स्थिति है."
डेरल हेना
डेरल हेना का परिचय केवल हॉलीवुड तक सीमित नहीं है. वह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की आवाज रही हैं. 'पीपल' मैगजीन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बचपन में ही डायग्नोस हो गया था कि उन्हें ऑटिज्म है. वह बताती हैं, "मैंने डर, झिझक और असुरक्षा में बहुत समय बर्बाद कर दिया. कुछ बातें अब जाकर समझ आई हैं. अगर ये सब मुझे 20 साल पहले पता होता, तो जिंदगी काफी आसान हो जाती."