जानवर खुद को शिकार होने से कैसे बचाते हैं?
अगर आप जंगल के सबसे बड़े-डरावने जानवर नहीं हैं, तो शिकार से बचाव के दो ही तरीके हैं. माहौल में ऐसे घुलमिल जाओ कि दुश्मन की नजर ही न पड़े. या फिर, जहरीले होने का नाटक करो. देखिए ऐसे कुछ जानवर, जो चकमा देने में पारंगत हैं.

शिकार होने से कैसे बचें
कीड़े-मकोड़े जैसे जीवों के पास बचने के दो ही तरीके होते हैं. एक है, कैमोफ्लाज. यानी, माहौल के साथ यूं एकसार हो जाना कि शिकारी जीव उन्हें देख ही ना सकें. दूसरा तरीका है, शिकारियों को चेतावनी देना कि उन्हें खाना जानलेवा हो सकता है. दूसरा तरीका अपनाने वाले जीव अपने गाढ़े रंग से यह चेतावनी देते हैं. लेकिन सभी इस कला में दक्ष नहीं होते. जैसे यह लाल कीड़ा, जो इस रंग-बिरंगी चिड़िया का नाश्ता बन गया.
कब लें कैमोफ्लाज का सहारा और कब बदले रंग
एक स्टडी से पता चला कि शिकार बनने वाले जानवर माहौल के हिसाब से बचाव का तरीका चुनते हैं. जहां कई सारे शिकारी पक्षियों के बीच मुकाबला होता है, वहां छिपे हुए कीड़ों का बचना ज्यादा आसान होता है. उनका अदृश्य रहना कवच बनता है. लेकिन जहां कम पक्षी होते हैं, वहां चमकीले रंगों वाले कीड़े ज्यादा सुरक्षित होते हैं. क्योंकि पक्षी सीख चुके होते हैं कि गहरे और चमकीले रंग वाले कीड़ों को खाना घातक हो सकता है.
वॉर्निंग मास्टर: मोनार्क तितली
मोनार्क तितली के कैटरपिलर मिल्कवीड पौधे का जहर खाते हैं. वयस्क होने के बाद भी यह जहर तितली के शरीर में ही रह जाता है. शिकारी पक्षी इस जहर को पचा नहीं पाते हैं और मोनार्क तितली खाने के तुरंत बाद उल्टी कर देते हैं. इस तितली के पंखों का चमकीला नारंगी और काला रंग पक्षियों को यह याद दिलाता है कि उनसे दूर रहने में ही भलाई है.
खतरनाक जगह में अदृश्य रहने के उस्ताद: बार्क बीटल्स
बार्क बीटल्स, पेड़ों की छाल पर रहते हैं. उनके शिकारी भी वहीं रहते हैं. ऐसे में उनके बचने का एकमात्र तरीका है, अदृश्य हो जाना. वह पेड़ की छाल में एकदम घुलमिल जाते हैं. कुछ जीव तो सूखे पत्ते और छाल के टुकड़े अपने ऊपर चिपका लेते हैं, जिससे वे पक्षियों की नजर में ही नहीं आते.
जहरीला खानपान: ब्लू पॉइजन डार्ट मेंढक
जब कोई जानवर गाढ़े रंग की अपनी त्वचा या पंखों से चेतावनी देकर शिकारियों को दूर रखता है, तो इसे "अपोसेमाटिजम" कहते हैं. जैसे यह ब्लू पॉइजन डार्ट मेंढक, जो इस कला में माहिर होते हैं. अपनी त्वचा में मौजूद न्यूरोटॉक्सिन्स ये खुद नहीं बनाते, बल्कि "फायर ऐंट" जैसे जहरीले कीड़ों को खाकर जमा करते हैं.
भेष बदलने में उस्ताद: गिरगिट
गिरगिट को रंग बदलने में उस्ताद माना जाता है. माना जाता है कि उसका रंग हमेशा ही उसके बैकग्राउंड से मेल खाता है. लेकिन असलियत थोड़ी अलग है. गिरगिट बेशक कैमोफ्लाज में बेहतरीन होते हैं, लेकिन उनका मूल रंग अक्सर उनके आसपास के माहौल से मेल खाता है. वो इन रंगों को गाढ़ा या हल्का बना सकते हैं, लेकिन पूरी तरह से अलग रंग में नहीं बदल सकते.
स्नोई आउल: बर्फीली दुनिया का मास्टर
स्नोई आउल या आर्कटिक उल्लू, यूरेशिया और उत्तरी अमेरिका के ध्रुवीय क्षेत्रों में रहते हैं. जब वह छोटे होते हैं, तो उनके पंख गहरे ग्रे और धब्बेदार होते हैं. इसकी वजह से वे घोंसले में नजर नहीं आते और सुरक्षित रहते हैं. बड़े होने पर उनके पंख सफेद हो जाते हैं, जिससे वो अपनी बर्फीली दुनिया में भेड़िया और लोमड़ी जैसे शिकारियों से बचे रहते हैं.
नकल करने में उस्ताद: एरिजोना माउंटेन किंगस्नेक
गाढ़े और चमकीले रंगों वाली त्वचा वाले सभी जानवर जहरीले नहीं होते. कुछ ऐसे भी होते हैं जो असल में विषैले नहीं होते, बस अन्य प्रजातियों के चेतावनी वाले रंगों की नकल करके शिकारी जीवों को दूर रखते हैं. एरिजोना माउंटेन किंगस्नेक भी ऐसी नकल में माहिर है. इसकी लंबाई लगभग 3.3 फीट होती है. ये बिल्कुल भी जहरीला नहीं होता, बस विषैले एरिजोना कोरल स्नेक जैसा दिखता है.
अगर आप जंगल के सबसे बड़े-डरावने जानवर नहीं हैं, तो शिकार से बचाव के दो ही तरीके हैं. माहौल में ऐसे घुलमिल जाओ कि दुश्मन की नजर ही न पड़े. या फिर, जहरीले होने का नाटक करो. देखिए ऐसे कुछ जानवर, जो चकमा देने में पारंगत हैं.