2025 में आप्रवासन के दौरान 7,900 लोग मारे गए या लापता हुए
प्रकाशित २१ अप्रैल २०२६आखिरी अपडेट २१ अप्रैल २०२६
आपके लिए अहम जानकारी
जर्मनी के गुरुद्वारे में हिंसा, 11 लोग हुए घायल
कीमतें बढ़ाने जा रही दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम बनाने वाली कंपनी
दशकों पुराने हथियार निर्यात नियमों में ढील देगा जापान, आसान होगा सैन्य निर्यात
रूस का दावा, इस साल यूक्रेन में करीब 1,700 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया
गाजा में ‘पुनर्निर्माण’ को लेकर बातचीत कर रहा ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस'
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो बार एसोसिएशन को करेंगे निलंबित
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देशभर की बार एसोसिएशनों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपनी गवर्निंग बॉडीज में महिलाओं के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें और ऐसा न होने पर निलंबन के लिए तैयार रहें. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 13 मार्च के आदेश का पालन न करने वाली बार एसोसिएशनों को न्यायिक आदेश के जरिए निलंबित किया जाएगा और दोबारा से चुनाव करवाने के निर्देश दिए जाएंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने 13 मार्च के अपने आदेश में कहा था कि सभी बार एसोसिएशनों में कम से कम 30 फीसदी पदाधिकारी या कार्यकारी सदस्य महिलाएं होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्टों में बार एसोसिएशनों ने इसका पालन किया है लेकिन जिला और तालुका स्तर पर भी इसका पालन किया जाना जरूरी है. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्टों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी बार एसोसिएशनों में इस नियम का पालन सुनिश्चित करें.
बेटे पर थार चढ़ाने का आरोप, विधायक पिता ने पुलिस को दी धमकी
मध्यप्रदेश की पिछोर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी पर पुलिस को धमकी देने का आरोप लगा है. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने कुछ दिन पहले कथित तौर पर अपनी थार एसयूवी पांच लोगों पर चढ़ा दी थी. इसके बाद पुलिस ने उनका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिससे विधायक प्रीतम लोधी नाराज हो गए.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रीतम लोधी एक वीडियो में करैरा के एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ को धमकाते हुए दिख रहे हैं. वे कहते हैं, 'तेरे डैडी का है क्या करैरा…वो आएगा भी, चुनाव भी लड़ेगा…अगर डैडी में दम हो तो रोक लेना.' उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी ने उनके बेटे से कहा था कि वे कभी करैरा न आएं.
प्रीतम लोधी की इस धमकी पर मध्य प्रदेश की आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ा एतराज जताया है. एसोसिएशन ने अपने पत्र में लिखा है कि पिछोर विधायक ने जिस प्रकार की अभद्र, अमर्यादित एवं धमकी भरी भाषा का प्रयोग किया है, वह अत्यंत निंदनीय एवं सार्वजनिक जीवन की गरिमा के विपरीत है.
मेक्सिको में गोलीबारी, कनाडाई पर्यटक की मौत से दहशत
मेक्सिको के तेओतिहुआकान में सोमवार को हुई गोलीबारी ने दुनिया के मशहूर पर्यटन स्थल पर अफरा-तफरी मचा दी. अधिकारियों के मुताबिक, एक हमलावर ने फायरिंग में एक कनाडाई पर्यटक की हत्या कर दी और छह अन्य लोगों को घायल कर दिया. हमलावर का नाम यूलिया सीजर यासो रामिरेज बताया जा रहा है. उसने बाद में खुद को गोली मार ली. यह हमला पिरामिड ऑफ द मून पर हुआ, जो करीब 45 मीटर ऊंचा है और जहां पर्यटक सीढ़ियों के जरिए ऊपर तक जाते हैं. घायल लोगों में कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और अमेरिका के नागरिक शामिल हैं, जबकि भगदड़ में सात और लोग हल्के घायल हुए.
घटना के बाद पूरे इलाके को खाली कराया गया और सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार, चाकू और गोलियां बरामद कीं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हमलावर को पिरामिड के बीच में खड़े होकर फायरिंग करते देखा गया, जिससे लोग सीढ़ियों के पीछे छिपते और भागते नजर आए. एक वीडियो में आवाज सुनाई देती है, “कोई हम पर गोली चला रहा है, संभल जाओ दोस्तों, सुरक्षा भेजो.”
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाउम ने कहा, “आज तेओतिहुआकान में जो हुआ, उससे हमें गहरा दुख हुआ है” और मामले की पूरी जांच के आदेश दिए हैं. कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने इस हमले को “भयानक गोलीबारी की घटना” बताया. दो हजार साल से ज्यादा पुराने इस स्थल पर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं और दशकों में इस तरह की हिंसा का यह पहला मामला बताया जा रहा है.
2025 में आप्रवासन के दौरान 7,900 लोग मारे गए या लापता हुए: रिपोर्ट
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर के माइग्रेशन रूट्स पर करीब 7,900 लोगों की मौत हुई है या वे लापता हो गए. 2014 से अब तक यह आंकड़ा 80,000 के पार पहुंच चुका है. एजेंसी का कहना है कि सुरक्षित रास्ते नहीं मिलने की वजह से लोग मजबूरी में खतरनाक और अनियमित यात्राएं कर रहे हैं. आईओएम ने चेतावनी दी कि ये आंकड़े असल संख्या से कम हैं, लेकिन यह साफ दिखाते हैं कि तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. संस्था ने कहा कि “इन आंकड़ों के पीछे असल लोग हैं, जो खतरनाक सफर पर निकलते हैं और उनके परिवार हैं, जो शायद उनके जीवित होने की खबर का इंतजार करते रह जाते हैं.”
हालांकि 2025 का आंकड़ा 2024 के रिकॉर्ड 9,200 से कम है, फिर भी इसे एक बड़ी चिंता बताया गया है. एजेंसी के अनुसार, यह “ऐसी मौतों को रोकने में वैश्विक नाकामी का लगातार बढ़ता हुआ संकेत” है. अमेरिका में नीतियों में बदलाव और दक्षिणी सीमा बंद होने से मध्य अमेरिका के रास्ते उत्तर की ओर जाने वालों की संख्या घटी है, जिससे वहां मौतों में कमी आई. लेकिन यूरोप के समुद्री रास्तों पर अब भी खतरा बना हुआ है, जहां हजारों लोग जान गंवा रहे हैं. खासकर बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर का रास्ता, जहां रोहिंग्या शरणार्थी यात्रा करते हैं, 2025 में सबसे घातक साबित हुआ.
आईओएम की प्रमुख एमी पोप ने कहा, “रास्ते बदल रहे हैं, लेकिन खतरे अब भी बहुत असली हैं.” उन्होंने जोर दिया कि बेहतर डेटा और मजबूत नीतियों के जरिए ही इन जोखिमों को कम किया जा सकता है. एजेंसी के मुताबिक, 2014 से अब तक करीब 3.4 लाख परिवार सीधे तौर पर इस संकट से प्रभावित हुए हैं, जो अपने लापता परिजनों के बारे में अनिश्चितता और दुख के साथ जी रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले दोपहिया वाहनों पर सख्त प्रतिबंध
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण के मतदान से पहले चुनाव आयोग ने दोपहिया वाहनों के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, चुनाव आयोग ने बाइक रैलियों पर रोक लगा दी है. आपातकालीन मामलों को छोड़कर रात में बाइक-स्कूटर आदि चलाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. ये प्रतिबंध मंगलवार, 21 अप्रैल से पहले चरण के 152 विधानसभा क्षेत्रों पर लागू होंगे.
पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान गुरुवार, 23 अप्रैल को होना है. चुनाव आयोग ने कहा है कि इस दिन बाइक और स्कूटर पर सिर्फ परिवार के किसी सदस्य के साथ ही सफर किया जा सकेगा. यानी वोटिंग के दिन बाइक या स्कूटर पर दोस्त या सहयोगी के साथ सफर करने की अनुमति नहीं होगी.
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, चुनाव आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के भेजे गए पत्र में यह निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि कई बार राजनीतिक पार्टियां पैसे या शराब लाने-ले जाने के लिए मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करती हैं. आदेश में यह भी कहा गया है कि मोटरसाइकिलों के समूह का इस्तेमाल डराने-धमकाने के लिए भी किया जाता है.
रूस का दावा, इस साल यूक्रेन में करीब 1,700 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया
रूस ने कहा है कि उसकी सेना ने इस साल यूक्रेनमें करीब 1,700 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया है और अब वे लोग डोनबास के अहम “फोर्ट्रेस बेल्ट” की तरफ बढ़ रहे हैं. रूसी सेना के प्रमुख वलेरी गेरासिमोव ने कहा, “इस साल की शुरुआत से अब तक 80 बस्तियां और 1,700 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाका हमारे नियंत्रण में आ चुका है.” उनके मुताबिक, रूसी फौज स्लोवियान्स्क, क्रामातोर्स्क और कोस्त्यांतिनिवका जैसे शहरों के करीब पहुंच रही है और कुछ इलाकों में लड़ाई जारी है. उन्होंने यह भी कहा कि सुमी और खारकीव की दिशा में भी आगे बढ़कर “सुरक्षा जोन” बनाने की कोशिश हो रही है.
दूसरी ओर यूक्रेन का कहना है कि वह भी लगातार जवाब दे रहा है और कुछ जगहों पर बढ़त हासिल की है. यूक्रेनी कमांडर ओलेक्सांद्र सिर्स्की के मुताबिक, मार्च में करीब 50 वर्ग किलोमीटर इलाका फिर से उनके कब्जे में आ गया. यूक्रेन की सेना ने बताया कि स्लोवियान्स्क के आसपास रूसी हमलों को रोका गया और कोस्त्यांतिनिवका के पास कई हमलों का सामना किया. हालांकि, जंग के मैदान से आने वाले इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
2022 में शुरू हुए इस युद्ध में रूस पहले से ही डोनबास के बड़े हिस्से और अन्य इलाकों पर नियंत्रण का दावा करता रहा है, लेकिन इस साल उसकी बढ़त धीमी बताई जा रही है. फिर भी जमीन पर लड़ाई जारी है और दोनों तरफ से लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई हो रही है.
कीमतें बढ़ाने जा रही दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम बनाने वाली कंपनी
दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी कैरैक्स अपने उत्पादों की कीमतों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है. कंपनी के सीईओ एमके गोह ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान युद्ध के चलते आपूर्ति श्रंखला में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है तो ये कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं. उन्होंने कहा, स्थिति निश्चित रूप से बेहद नाजुक है, चीजें महंगी हैं…हमारे पास लागत का बोझ ग्राहकों के ऊपर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
कैरैक्स हर साल पांच अरब से ज्यादा कंडोम बनाती है. यह ड्यूरेक्स और ट्रोजन जैसे ब्रांडों को कंडोम सप्लाई करती है. इसके अलावा, ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा एनएचएस और वैश्विक सहायता समूहों को भी यह कंपनी कंडोम बनाकर देती है. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हमले के बाद से कंडोम बनाने में काम आने वाली अधिकतर चीजों के दाम बढ़ गए हैं. इनमें सिंथेटिक रबड़, नाइट्राइल, पैकेजिंग मैटेरियल और सिलिकॉन ऑयल जैसे लुब्रिकेंट शामिल हैं.
गोह का कहना है कि कैरैक्स के पास अगले कुछ महीनों के लिए पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है और वे बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस साल कंडोम की मांग करीब 30 फीसदी बढ़ी है, वहीं समुद्री परिवहन में आई बाधाओं ने कंडोम की कमी को और बढ़ाया है. गोह ने कहा कि बहुत सारे कंडोम उन जहाजों पर भी फंसे हुए हैं, जो अभी भी रास्ते में अटके हुए हैं और अभी तक अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सके हैं.
जर्मनी दौरे पर राजनाथ सिंह, रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर
राजनाथ सिंह का बर्लिन पहुंचने पर होटल में स्वागत किया गया. रक्षा मंत्री 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस दौरे का मकसद भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना है. यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. इस दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई अहम समझौते भी होने की उम्मीद है. दोनों रक्षा मंत्रियों की मौजूदगी में डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों की ट्रेनिंग में सहयोग से जुड़ा एक समझौता साइन किया जा सकता है.
इस यात्रा के जरिए दोनों देश रक्षा उत्पादन, ट्रेनिंग और ऑपरेशनल तालमेल जैसे क्षेत्रों में अपने रिश्तों को और गहरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
सौर और पवन ऊर्जा कर रही बिजली की बढ़ती मांग की भरपाई
साल 2025 में वैश्विक बिजली मांग में 849 टेरावॉट-घंटे की बढ़ोतरी हुई. वहीं, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में करीब 887 टेरावॉट-घंटे की बढ़ोतरी हुई. यानी पिछले साल बिजली की मांग जितनी बढ़ी, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन उससे ज्यादा बढ़ा. चीन और भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन में हुई रिकॉर्ड वृद्धि ने इसमें अहम भूमिका निभाई. एनर्जी थिंक टैंक एम्बर ने 21 अप्रैल को जारी की गई अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, बीते साल दुनियाभर के इलेक्ट्रिसिटी मिक्स में सौर और पवन जैसी स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर एक तिहाई से ज्यादा हो गई. ऐसा आधुनिक इतिहास में पहली बार हुआ. 2025 में स्वच्छ ऊर्जा के स्रोतों से 10,730 टेरावॉट-घंटे बिजली पैदा हुई. टेरावॉट-घंटे ऊर्जा की एक इकाई है, जो 1,000 अरब वॉट-घंटे के बराबर है.
बीते साल वैश्विक बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी पहली बार एक तिहाई से नीचे आ गई. जलवायु परिवर्तन से जूझ रही दुनिया के लिए यह एक अच्छी खबर है क्योंकि कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से ज्यादा जलवायु परिवर्तन होता है. बीते साल कोयले से बिजली उत्पादन में 0.6 फीसदी की कमी आई.
दशकों पुराने हथियार निर्यात नियमों में ढील देगा जापान, आसान होगा सैन्य निर्यात
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, जापान ने दशकों पुराने हथियार निर्यात नियमों में ढील देने का फैसला किया है. सरकार के शीर्ष प्रवक्ता मिनोरु किहारा ने कहा कि इस बदलाव से अब बड़े हथियारों की विदेश में बिक्री का रास्ता खुल जाएगा. अब तक निर्यात सिर्फ पांच गैर-घातक श्रेणियों तक सीमित था, लेकिन प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा, “इस संशोधन के साथ अब रक्षा उपकरणों के ट्रांसफर आम तौर पर संभव हो जाएंगे.”
उनका यह भी कहना है, “हमारे देश के आसपास सुरक्षा हालात तेजी से बदल रहे हैं और यह फैसला जापान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ क्षेत्र और दुनिया में शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए है.” उन्होंने आगे जोड़ा, “आज कोई भी देश अकेले अपनी शांति और सुरक्षा की रक्षा नहीं कर सकता.”
सरकार का मानना है कि इससे जापान को अंतरराष्ट्रीय रक्षा सप्लाई चेन में जगह बनाने में मदद मिलेगी और सहयोगी देशों के साथ रिश्ते मजबूत होंगे. चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया व रूस से जुड़े सुरक्षा खतरों के बीच इस कदम को अहम माना जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञ हेइगो सातो ने कहा, “हमें शांति के इस दौर में ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे सहयोगी देशों के साथ हथियार और गोला-बारूद का आदान-प्रदान आसानी से हो सके.” उनका कहना है कि इससे रक्षा कंपनियों को लगातार काम मिलेगा और साझेदारी भी मजबूत होगी.
हालांकि इस फैसले को लेकर देश के भीतर असहजता भी दिख रही है. एनएचके के एक सर्वे में 53 फीसदी लोगों ने इसका विरोध किया, जबकि 32 फीसदी समर्थन में रहे. शांति कार्यकर्ताओं ने कई जगह प्रदर्शन किए और चेतावनी दी कि यह कदम जापान की शांतिप्रिय छवि को कमजोर कर सकता है. वरिष्ठ कार्यकर्ता कोजी सुगिहारा ने कहा, “लोग नहीं चाहते कि जापान में बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल विदेश में लोगों को मारने के लिए हो.” उन्होंने इसे “एक ऐतिहासिक मोड़” बताया.
जापान ने 1976 में हथियार निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाई थी, जिसे धीरे-धीरे ढीला किया गया. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज, एनईसी, कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक और फुजित्सु जैसी कंपनियां दुनिया की शीर्ष 100 हथियार कंपनियों में शामिल हैं.
जर्मनी के गुरुद्वारे में हिंसा, 11 लोग हुए घायल
जर्मनी के मोएर्स शहर में स्थित गुरुद्वारासिंह सभा में रविवार को हिंसक झड़प हो गई, जिसमें 40 से ज्यादा लोग शामिल थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, झड़प के दौरान पेपर स्प्रे, चाकू, कृपाण और एक कथित हथियार का इस्तेमाल हुआ. इस घटना में कम से कम 11 लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर के सिर पर चोटें आईं. हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को बड़ा ऑपरेशन चलाना पड़ा और स्पेशल टैक्टिकल यूनिट्स तक तैनात करनी पड़ीं. हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि यह विवाद गुरुद्वारे के पैसे और प्रबंधन को लेकर था, हालांकि, पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रार्थना शुरू होने से ठीक पहले हमलावरों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया, फिर किसी ने पिस्टल चलाई. किसी ने चाकू भी देखा. कथित रूप से लंबे समय से चल रहे इस अंदरूनी टकराव में कमेटी के पुराने और मौजूदा सदस्यों के बीच वर्चस्व और पैसों को लेकर खींचतान बताई जा रही है.
पुलिस ने करीब 100 जवानों के साथ इलाके को घेर लिया, हेलीकॉप्टर से निगरानी की गई और संदिग्ध की तलाश में इमारत की तलाशी ली गई. अभी तक कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है, लेकिन जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि “जांच हर दिशा में आगे बढ़ रही है.”
ईरान ने कहा, "धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं"
पाकिस्तान इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत के लिए तैयारियां आगे बढ़ा रहा है, लेकिन तेहरान की तरफ से अब तक साफ संकेत नहीं मिला है कि वह इसमें शामिल होगा या नहीं. ईरानी सरकारी टीवी ने भी साफ कहा, “अब तक ईरान का कोई प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है.”
दूसरी तरफ डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि “अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ तो बहुत सारे बम गिरने शुरू हो जाएंगे.” जवाब में ईरान के वार्ताकार मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने कहा कि तेहरान के पास “जंग के मैदान के लिए नए पत्ते हैं” और “हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते.”
8 अप्रैल से शुरू हुआ अस्थायी संघर्षविराम अभी नाजुक स्थिति में है और बातचीत होने पर इसे बढ़ाया जा सकता है. अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही गई है, लेकिन ईरान की तरफ से कोई नाम सामने नहीं आया. अंदरूनी स्तर पर भी बहस जारी है, खासकर अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी जहाज जब्त किए जाने के बाद. इस पूरे विवाद का बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है. अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान के नियंत्रण ने तेल की कीमतों को काफी बढ़ा दिया है.
इसके बावजूद पाकिस्तान को उम्मीद है कि बातचीत आगे बढ़ेगी. विदेश मंत्री इशाक डार ने मिस्र और चीन के नेताओं से बात कर माहौल बनाने की कोशिश की है. चीन की तरफ से भी कहा गया, “ऐसे समय में सभी पक्षों को पूरी ईमानदारी दिखानी चाहिए, राजनीतिक समाधान पर टिके रहना चाहिए और संघर्षविराम व बातचीत की रफ्तार बनाए रखनी चाहिए.”
इस बीच इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. समाचार एजेंसी एपी से विश्लेषक सैयद मोहम्मद अली ने कहा, “पाकिस्तान इस संभावना के लिए तैयारी कर रहा है कि अगर बातचीत आगे बढ़ी तो अमेरिका और ईरान के बड़े नेता भी यहां आ सकते हैं.”
होर्मुज में फंसे जहाजों से क्रिप्टो में फीस मांगने का स्कैम
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे कुछ जहाजों की शिपिंग कंपनियों को धोखाधड़ी वाले मैसेज भेजे गए हैं. ग्रीस की समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी मारिस्क्स ने चेतावनी दी है कि इन मैसेजों में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में पैसे मांगे जा रहे हैं. मैसेज भेजने वाले खुद को ईरानी अधिकारियों का प्रतिनिधि बता रहे हैं, लेकिन कंपनी का साफ कहना है कि “ये खास मैसेज एक स्कैम हैं” और इनका ईरान से कोई लेना-देना नहीं है. इस मामले पर तेहरान की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
ईरान में जंग शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता था. अभी हालात ऐसे हैं कि अमेरिकी पाबंदियों के चलते ईरानी बंदरगाहों पर रोक बनी हुई है, जबकि ईरान ने भी इस अहम रास्ते पर पहले ढील देने के बाद, फिर से सख्ती बढ़ा दी. इसी बीच सीजफायर की बातचीत चल रही है और ईरान ने जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए टोल लेने का सुझाव भी रखा है. खाड़ी में इस वक्त सैकड़ों जहाज और करीब 20,000 नाविक फंसे हुए हैं.
18 अप्रैल को जब थोड़े समय के लिए रास्ता खोला गया, तो कुछ जहाजों ने निकलने की कोशिश की, लेकिन कम से कम दो जहाजों पर फायरिंग की खबर आई, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा. मारिस्क्स का मानना है कि ऐसे ही एक जहाज को निशाना बनाकर यह धोखाधड़ी की कोशिश भी की गई. मैसेज में कहा गया था, “दस्तावेज देने और ईरानी सुरक्षा सेवाओं द्वारा जांच के बाद हम क्रिप्टोकरेंसी (बीटीसी या यूएसडीटी) में फीस तय करेंगे. इसके बाद ही आपका जहाज तय समय पर बिना रुकावट गुजर सकेगा.” हालांकि इस पूरी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
20 अप्रैल को केवल तीन जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को किया पार
व्यापारिक जहाजों ने सोमवार, 20 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से परहेज किया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने शिप ट्रैकिंग डेटा के आधार पर बताया है कि सोमवार को केवल तीन जहाजों ने ही होर्मुज को पार किया. अमेरिका, इस्राएल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से पहले आमतौर पर यह संख्या 130 के आसपास हुआ करती थी.
लेबनान और इस्राएल के बीच अस्थायी संघर्षविराम की घोषणा के बाद ईरान ने 17 अप्रैल को कुछ समय के लिए होर्मुज को खोल दिया था. इस दौरान दर्जन भर से अधिक टैंकरों ने होर्मुज को पार किया. हालांकि, बाद में होर्मुज को बंद कर दिया गया औरदो जहाजों पर चेतावनी वाली फायरिंग की गई. इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी जहाज को जब्त कर लिया. इस घटनाक्रम के बाद जहाज होर्मुज का रुख करने से बच रहे हैं.
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले जहाजों पर पूर्ण समुद्री नाकेबंदी लागू कर रखी है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी पाबंदियां नहीं हटाता है, तब तक वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को सीमित रखेगा.
दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी याचिका खारिज होने पर क्या बोले अरविंद केजरीवाल
दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनसे मांग की गई थी कि वे दिल्ली आबकारी नीति वाले मामले की सुनवाई से हट जाएं. केजरीवाल ने अदालत में स्वंय अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि जस्टिस स्वर्णकांता द्वारा मामला सुने जाने की स्थिति में उन्हें पूर्वाग्रह की आशंका है.
20 अप्रैल को याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. चुनाव प्रचार के लिए चेन्नई गए केजरीवाल ने मंगलवार को रिपोर्टरों से कहा कि उन्होंने अभी आदेश नहीं पढ़ा है और उन्होंने अपनी बात कोर्ट में रख दी थी इसलिए वे उसके अलावा और कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक राजनेता को न्यायिक योग्यता का आकलन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने यह भी कहा कि उनके बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि वे केजरीवाल के खिलाफ कोई पूर्वाग्रह रखती हैं.