ईरान युद्ध के बावजूद पलायन में बढ़ोतरी नहीं: जर्मनी
१८ अप्रैल २०२६
मध्य पूर्व में जारी जंग के कारण लाखों लेबनानी और ईरानी लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं, लेकिन जर्मनी के गृह मंत्री आलेक्जांडर डोब्रिंट का कहना है कि इससे अब तक यूरोप की ओर कोई बड़ा पलायन शुरू नहीं हुआ है.
डोब्रिंट ने कहा कि अमेरिका-इस्राएल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अब तक यूरोप में शरण लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है, हालांकि यूरोपीय अधिकारी एहतियाती कदम उठा रहे हैं.
बदलते हालातों पर कड़ी नजर
शनिवार को प्रकाशित राइनिशे पोस्ट अखबार को दिए एक इंटरव्यू में डोब्रिंट ने कहा, "फिलहाल हमें प्रवासन का कोई बढ़ा हुआ दबाव नहीं दिख रहा है.” उन्होंने बताया कि अधिकारी ईरान और लेबनान जैसे देशों में लोगों की आवाजाही पर नजर रखे हुए हैं.
डोब्रिंट के मुताबिक, "इस समय दोनों देशों में बड़ी संख्या में लोग अपने ही देश के भीतर स्थान बदल रहे हैं, लेकिन तुर्की सीमा पर अभी किसी दबाव के संकेत नहीं दिखते. तुर्की सीमा पर दबाव बढ़ना यूरोप की ओर नए प्रवासन की पहली बड़ी निशानी होगी.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से लेकर अप्रैल की शुरुआत तक इन दोनों देशों में 42.5 लाख से ज्यादा लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं.
डोब्रिंट ने कहा कि आने वाले सप्ताह यह बताएंगे कि मध्य पूर्व में हालात किस दिशा में जाते हैं और उनके कारण किस तरह की प्रवासन गतिविधियां होती हैं. उन्होंने यह संभावना भी खुली रखी कि जर्मनी में सीमा नियंत्रण को सितंबर के बाद भी बढ़ाया जा सकता है.
प्रवासन को लेकर सख्त नीति
पिछले साल मई में पद संभालने के तुरंत बाद डोब्रिंट ने जर्मनी की सभी नौ बाहरी सीमाओं पर सख्त जांच और प्रवेश से इनकार के आदेश दिए थे. यूरोपीय संघ के शेंगेन नियमों के तहत ऐसे कदम केवल अस्थायी रूप से ही उठाए जा सकते हैं. इन जांचों को अब तक दो बार बढ़ाया जा चुका है, क्योंकि जर्मनी प्रवासन को लेकर लगातार सख्त नीति अपना रहा है.
ईरान‑इस्राइल संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर विस्थापन के बावजूद जर्मनी में प्रवासन का दबाव नहीं बढ़ा है. जर्मन सरकार ने एहतियातन सीमाओं पर सख्त जांच जारी रखते हुए हालात पर कड़ी नजर रखने की बात कही है.