जर्मनी: आप्रवासन पर सख्त नीतियों के समर्थन में बड़ी आबादी
२० दिसम्बर २०२५
जर्मनी की करीब तीन-चौथाई आबादी आप्रवासन कम करने की सरकार की योजनाओं का समर्थन करती है. जर्मन न्यूज एजेंसी ‘डीपीए' के ‘यू गोव' के साथ मिलकर कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है. एजेंसी ने शनिवार, 20 दिसंबर को बताया कि जर्मनों की बड़ी आबादी गृह मंत्री आलेक्जांडर डोबरिंट के आप्रवासन कम करने के लक्ष्यों का समर्थन करती है.
75 प्रतिशत से ज्यादा लोग समर्थन में
जब लोगों से पूछा गया कि क्या वे शरणार्थी आप्रवासन घटाने के डोबरिंट के लक्ष्यों का समर्थन करते हैं, तो 53% ने कहा कि वे "पूरी तरह" समर्थन करते हैं. और 23% ने "कुछ हद तक" समर्थन करने की बात कही. जबकि 15% जर्मनों ने डोबरिंट की योजना को "पूरी तरह” या "कुछ हद तक खारिज” किया. जवाब ना देने वाले करीब 9% रहे. कंजरवेटिव पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन (सीडीयू) के नेता फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व में इसी साल मई में सत्ता संभालने के बाद नई सरकार ने देश की सीमाओं पर सख्ती बढ़ाई है. गृह मंत्री डोबरिंट ने अपनी पूर्ववर्ती नैंसी फेजर के कार्यकाल के दौरान सीमाओं पर शुरू हुईं सुरक्षा जांचों को और तेज करने का आदेश दिया है. उन्होंने शरणार्थियों को सीमाओं से ही लौटा देने के आदेश जारी किए हैं, सिवाय गर्भवती महिलाओं, बीमारों और संकटग्रस्त परिस्थितियों से आ रहे लोगों के.
ईयू के स्तर पर भी बदलाव की कोशिश
डोबरिंट, यूरोपीय संघ के स्तर पर भी ऐसे कड़े नियमों की वकालत कर रहे हैं जो शरण की प्रक्रिया को यूरोपीय संघ से बाहर के देशों को सौंपने और तथाकथित रिटर्न सेंटर्स चलाने की अनुमति देंगे. यह सेंटर वे जगहें हो सकती हैं जहां देश छोड़ने को बाध्य शरणार्थियों को, उनके मूल देश में डिपोर्ट ना कर पाने की सूरत में रखा जा सके. हालांकि, पहले ऐसे देश तलाशने होंगे जो अपनी जमीन पर ऐसी व्यवस्थाओं की इजाजत दें.
सरकारी नीति के असर पर राय बंटी
सरकार की आप्रवासन नीति में घोषित बदलावों का वाकई कितना असर हुआ है, इस सवाल पर जर्मनों की राय बंटी नजर आई. सर्वे में शामिल सिर्फ 8% लोगों को "बड़ा बदलाव" नजर आया. 38% नागरिकों को "हल्का बदलाव" दिखा, जबकि 42% जर्मनों को सरकार की आप्रवासन नीति में कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ. वहीं 12% लोग या तो मूल्यांकन नहीं कर पाए, या फिर उन्होंने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. इसी महीने 12 से 15 दिसंबर के बीच हुए इस सर्वे में 2,100 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया.