लगातार गिर रही है इंटरनेट फ्रीडम
थिंकटैंक फ्रीडम हाउस द्वारा जारी ‘फ्रीडम ऑफ द नेट रिपोर्ट’ में बताया गया है कि सरकारें विरोध दबाने, जानकारी नियंत्रित करने और नागरिकों की निगरानी बढ़ाने के लिए डिजिटल स्पेस का इस्तेमाल कर रही हैं.

27 देशों में हालात बिगड़े
फ्रीडम ऑफ द नेट रिपोर्ट के तहत विशेषज्ञों ने कुल 72 देशों के हालात का अध्ययन किया है. रिपोर्ट कहती है कि 27 देशों में हालात पहले से ज्यादा खराब हुए. सिर्फ 17 देशों में स्थिति में पहले से कुछ सुधार दिखा है.
केन्या में सबसे बड़ी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या में इंटरनेट फ्रीडम में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है. जून 2025 के टैक्स विरोध के दौरान सरकार ने पूरे देश का इंटरनेट लगभग 7 घंटे बंद किया था. सैकड़ों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी ने इंटरनेट आजादी को बुरी तरह चोट पहुंचाई.
बांग्लादेश में सबसे ज्यादा सुधार
रिपोर्ट में जिन देशों में स्थिति बेहतर होती बताई गई है, उनमें बांग्लादेश सबसे ऊपर है. 2025 के छात्र आंदोलन में इंटरनेट की बड़ी भूमिका का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबीक नई अंतरिम सरकार ने इंटरनेट आजादी को मजबूत करने के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए.
चीन और म्यांमार सबसे खराब
इस रिपोर्ट के हिसाब से चीन और म्यांमार उन देशों में सबसे निचले पायदान पर हैं, जहां इंटरनेट की आजादी सबसे कम है. दोनों देशों में सख्त सेंसरशिप, निगरानी और दमनकारी नीतियां लागू हैं. इसके उलट आइसलैंड लगातार सबसे स्वतंत्र डिजिटल माहौल देता है.
'फ्री' माने जाने वाले देशों में भी बिगड़े हालात
18 पूरी तरह स्वतंत्र देशों में से आधे की स्कोर में गिरावट आई. जॉर्जिया में सबसे बड़ी कमी देखी गई. उसके बाद जर्मनी और अमेरिका में भी चिंताजनक रुझान दिखे, जहां नेताओं की आलोचना करने वाले लोगों पर केस दर्ज हुए.
अमेरिका में खतरे बढ़े
फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की आजादी की जगह बहुत कम हुई है. इस साल कुछ विदेशी नागरिकों को शांतिपूर्ण ऑनलाइन पोस्ट के लिए हिरासत में लिया गया. ऐसे में, सिविक स्पेस में बढ़ती पाबंदियों से ऑनलाइन बोलने की आजादी प्रभावित हुई.
नियंत्रण का तरीका
मिस्र, पाकिस्तान, रूस, तुर्की और वेनेजुएला आदि देशों का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी ने ऑनलाइन निगरानी, सेंसरशिप और सजाएं बढ़ाई हैं. प्रदर्शन और चुनावों के दौरान यह दमन और ज्यादा तेज हो जाता है.
पोस्ट पर गिरफ्तारी
रिपोर्ट बताती है कि 81 फीसदी लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां इंटरनेट पर पोस्ट करने पर गिरफ्तारी होती है. यानी राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक मुद्दों पर सिर्फ लिख देने से भी जेल हो सकती है. 70 फीसदी लोग ऐसे देशों में हैं जहां ऑनलाइन एक्टिविटी पर हमला या हत्या तक हुई है.
इंटरनेट पर पाबंदी
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 70 फीसदी लोग उन देशों में रहते हैं जहां सरकारें ऑनलाइन बहस को प्रभावित करती हैं. 69 फीसदी लोग ऐसे देशों में हैं जहां राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक कंटेंट ब्लॉक किया गया. जबकि 52 फीसदी लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क राजनीतिक कारणों से बंद किए जाते हैं.