इबोला के बारे में अब तक क्या पता चला है
इबोला के एक दुर्लभ स्ट्रेन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अंतरराष्ट्रीय चिंता का आपातकाल घोषित करने पर मजबूर कर दिया. अब तक ज्यादातर मामले अफ्रीकी देश कॉन्गो में सामने आए हैं.

बुंदीबुग्यो इबोला
डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (डीआरसी) और युगांडा में जिस वायरस का तेजी से संक्रमण हो रहा है वह इबोला का बुंदीबुग्यो स्ट्रेन है. इसका नाम युगांडा के बुंदीबुग्यो प्रांत पर रखा गया है. पहली बार 2007-2008 में इसी प्रांत में इसकी पहचान हुई थी. दूसरी बार बुंदीबुग्यो का प्रकोप 2012 में डीआरसी में हुआ.
कितना घातक है बुंदीबुग्यो
बुंदीबुग्यो इबोला से संक्रमित होने वालों में से 30-40 फीसदी लोगों की जान चली जाती है. इस हिसाब से यह जाइर स्ट्रेन की तुलना में कम घातक है 2024 में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक जाइर स्ट्रेन से संक्रमित होने वालों में 90 फीसदी लोगों की जान जाती है.
जानलेवा बुखार
इबोला वायर से सिर्फ चार स्ट्रेन ऐसे हैं जिनसे संक्रमित होने पर इंसानों को जानलेवा बुखार होता है. बुंदीबुग्यो उनमें से एक है. सभी इबोला वायरसों का फैलाव संक्रमित इंसान या पशुओं से शरीर के तरल या फिर उस तरल से संक्रमित किसी चीज के संपर्क में आने से होता है. शरीर के तरल का संपर्क में आना अस्पतालकर्मियों के लिए खासतौर से खतरनाक है.
इबोला से संक्रमण के लक्षण
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इबोला वायरस के संक्रमण में पहले फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं जिसमें बुखार, थकावट, बेचैनी, सिरदर्द और गले में सूजन जैसी समस्या होती है जो अचानक शुरू हो जाती है. उल्टी और डायरिया के साथ ही बाहरी और अंदरूनी रक्तस्राव और कई अंगों बेकार हो जाना अगला चरण है.
इबोला का इलाज
फिलहाल बुंदीबुग्यो इबोला वायरस के लिए कोई मानक वैक्सीन या दवा नहीं है. किसी भी प्रायोगिक या मौजूदा इलाज के लिए आपातकालीन मंजूरी की जरूरत होगी जो दूसरे वायरस स्ट्रेन पर कारगर साबित हुए हैं.
किन दवाओं पर उम्मीद
बुंदीबुग्यो को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इंसानों से अलग कुछ जीवों पर कुछ दवाओं का असर दिखा है. इनमें मैर्क की एर्वेबो, मैप बायोफार्मास्यूटिकल्स का एमबीपी 134 और ऑरो वैक्सीन का वेसिकुलोवैक्स प्रमुख हैं.
वैक्सीन बन पाएगा?
वैनोवाइरिसिडेस का कहना है कि उसकी प्रायोगिक दवा एनवी-387 बुंदीबुग्यो के खिलाफ असरदार हो सकती है. फिलहाल एमपॉक्स के लिए इस दवा का परीक्षण चल रहा है. एक एमआरएनए वैक्सीन चीन में विकसित हो रही है जिसने चूहों में बुंदीबुग्यो के संक्रमण को रोकने में सफलता पाई है, हालांकि इंसानों पर इसे परखा नहीं गया है.
बुंदीबुग्यो का टेस्ट
बुंदीबुग्यो के संक्रमण का पता लगाने वाले टेस्ट मौजूद हैं लेकिन इसे ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया गया है. इसबार की महामारी के दौर में मानक टेस्ट के जरिए इनका पता नहीं लगाया जा सका. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टेस्ट इबोला के दूसरे स्ट्रेन की खोज कर रहे थे. जब तक चेतावनी दी जाती वायरस पहले ही सीमा के पार जा चुका था.
कैसे बचा जा रहा है इबोला से
कैसे बचा जा रहा है इबोला सेअब तक बचाव की कोशिशें मोटे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर निर्भर हैं. इनमें जल्दी से मामले का पता लगाना, क्वारंटीन, संपर्क की खोज, संक्रमण रोकना और नियंत्रण, सुरक्षित अंतिम संस्कार और समुदाय की सहभागिता शामिल है.
बुंदीबुग्यो बाकियों से कैसे अलग है
बुंदीबुग्यो का जीन दूसरे इबोला वायरसों से अलग है जो इसके विषैलेपन, संक्रामकता और पहचान को अगल बनाता है. इसके साथ ही इसके इलाज के तरीकों को भी. जाइर में प्रजनन तेजी से होता है जबकि बुंदीबुग्यो में इसकी गति काफी धीमी है. इम्यून कोशिकाओं के इसमें घुस कर इसे बेकार या खत्म करने की रफ्तार भी धीमी है, यह शरीर की प्रतिरक्षा को भी बेकार कर देता है.