मुकेश अंबानी ने बताया, कैसे ऊर्जा सुपरपावर बन सकता है भारत | भारत | DW | 24.02.2022

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भारत

मुकेश अंबानी ने बताया, कैसे ऊर्जा सुपरपावर बन सकता है भारत

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक और सबसे धनी भारतीय मुकेश अंबानी ने बताया है कि आने वाले दो दशक में भारत कैसे 500 अरब डॉलर कमा सकता है. एशिया इकनॉमिक डायलॉग में उन्होंने ये बातें कहीं.

मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी

भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी का मानना है कि देश ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में एक सुपरपावर बन सकता है और आने वाले दो दशकों में 500 अरब डॉलर कमा सकता है. तेल से लेकर टेलीकॉम तक दर्जनों क्षेत्रों में सक्रिय रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में इस बारे में बात की.

स्वच्छ ऊर्जा कही जाने वाली अक्षय ऊर्जा को लेकर भारत में कई गतिविधियां जारी हैं. रिलायंस समेत अनेक ऊर्जा कंपनियों ने देश की अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. इनमें बैटरी स्टोरेज बढ़ाने से लेकर 100 रुपये किलो से भी कम के भाव पर ग्रीन हाइड्रोजन उपलब्ध कराने जैसे कदम शामिल हैं.

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एशिया इकनॉमिक डायलॉग में मुकेश अंबानी ने कहा, "पिछले 20 साल में हम अगर भारत के आईटी सुपरपावर बनने के रूप में जाने गए तो अगले साल 20 साल, मेरा मानना है कि, तकनीक की मदद से, हमारे ऊर्जा और जीव विज्ञान के क्षेत्र में सुपरपावर के रूप में हमारे उदय के लिए जाने जाएंगे."

छोड़ना होगा तेल और कोयला

भारत दुनिया में तेल का तीसरा सबसे आयातक है और उपभोक्ता है. उसका ऊर्जा क्षेत्र मुख्यतया तेल पर ही निर्भर है. अंबानी ने कहा कि भारत को आने वाले दो से तीन दशक में जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता खत्म करने की रणनीति बनानी चाहिए.

दुनिया के दस सबसे अमीर लोगों में शामिल खरबपति मुकेश अंबानी ने कहा कि लघु और मध्यम अवधि में भारत को कम-कार्बन और जीरो-कार्बन नीति पर चलना होगा. उन्होंने कहा, "अगले दो से तीन दशक तक भारत की कोयले और आयातित तेल पर निर्भरता जारी रहेगी. लेकिन हमारे पास अगले दो से तीन दशक में इनसे छुटकारा पाने की योजना होनी चाहिए."

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भारत सरकार ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन में नेट-जीरो की स्थित हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यानी तब भारत उतनी ही कार्बन उत्सर्जित कर रहा होगा, जितनी उसके प्राकृतिक और कृत्रिम संसाधन सोख सकें. इस लक्ष्य से पर्यावरणविद खुश नहीं हैं और भारत की आलोचना करते हुए कहते हैं कि 2070 तक बहुत देर हो चुकी होगी, इसलिए भारत को जल्दी कदम उठाने चाहिए.

भारत की योजना

पिछले साल ग्लासगो में हुए जलवायु सम्मेलन में भारत ने ऐलान किया था कि वह 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को नेट-जीरो करने का लक्ष्य हासिल कर लेगा. कॉप26 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐलान किया, जो वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई 2050 की समयसीमा से दो दशक अधिक है. यह चीन से भी दस वर्ष ज्यादा है. चीन ने 2060 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है.

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नरेंद्र मोदी ने भारत की तरफ से देरी का बचाव करते हुए कहा कि देश में दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी रहती है जबकि वे दुनिया के कुल 5 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए ही जिम्मेदार हैं. ग्लासगो में जमा दुनियाभर के नेताओं को उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाएगा और 2030 तक उसकी आधी ऊर्जा जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी होंगी. फिलहाल भारत की कुल ऊर्जा जरूरत का 38 फीसदी हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से आता है.

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भारत की योजना है कि 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा पैदा करने की क्षमता हासिल कर ली जाए. फिलहाल देश में 150 गीगावाट ऊर्जा पैदा होती है. हाल ही में भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन की ओर भी ध्यान देना शुरू किया है और 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन पैदा करने की क्षमता हासिल कर लेने का लक्ष्य तय किया है.

मुकेश अंबानी ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत को एक डॉलर प्रति किलो पर ले आएं, और यह सुनिश्चित करें कि हम इसे एक डॉलर प्रति किलो से भी कम भाव पर ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूट करें. मुझे लगता है कि हम 20 प्रतिशत के ऊपर-नीचे होने की संभावना के साथ यह सब हासिल करने में कामयाब हो जाएंगे."

रिपोर्टः विवेक कुमार (रॉयटर्स)

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