dw.com बीटा पेज पर जाएं. कार्य प्रगति पर है. आपकी राय हमारी मदद कर सकती है.
हम आपके लिए अपने कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए कूकीज का इस्तेमाल करते हैं. अधिक जानकारी डाटा सुरक्षा पेज पर उपलब्ध है.
यूक्रेन पर रूस के हमले के आज 20वां दिन है. रूस की तरफ से जारी हमले का निशाना आम लोगों के घर बन रहे हैं. युद्ध के बीच समर्थन जताने तीन यूरोपीय देशों के नेता मंगलवार को कीव पहुंचे हैं. आर्टिकल पर जाएं
जर्मन सरकार ने दक्षिणपंथी चरमपंथियों से निपटने के लिए कई कदमों का एलान किया है.
हिजाब से प्रतिबंध हटाने की मांग करने वाली याचिकाकर्ता कहती हैं, "मैं एक भारतीय हूं और एक मुसलमान भी."
दुनिया के सबसे बड़े मालवाहक विमान एंटोनोव-225 को 'मिरिया' नाम दिया गया था, जिसका मतलब है सपना. यह वाकई एक सपना था, जिसे रूस ने यूक्रेन में हमला करके तहस नहस कर दिया.
अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री मार्क वांडे हइ तकरीबन एक साल से अंतरिक्ष में हैं. उनके काम का शायद सबसे मुश्किल वक्त अब आया है.
जर्मनी में कोविड के 1,98,888 नए मामले दर्ज किए गए हैं जो एक सप्ताह पहले के आंकड़ों के मुकाबले बड़ी उछाल है.
सोचिए एक ऐसा रोग, जिसके बारे में लंबे वक्त तक पता ही न चले कि वह आपके शरीर में पनप रहा है.
पंजाब विधान सभा के नए विधायकों में 74 प्रतिशत करोड़पति हैं और 50 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक के खिलाफ मुस्लिम छात्राओं की याचिका खारिज कर दी है.
विकास के नाम पर ईको सिस्टम तबाह कर दिए गए. अब पूर्वोत्तर जर्मनी में बचे लैंडस्केप में नई जान डालने की कोशिश हो रही है.
नाटो का सदस्य देश और रूस के साथ अच्छे संबंध होने की वजह से तुर्की की महत्ता यूक्रेन युद्ध में और बढ़ गई है.
यूक्रेन के मारियोपोल शहर के एक मैटर्निटी वार्ड पर हुए हमले में एक गर्भवती महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई है.
यूक्रेन युद्ध के बाद से पुतिन के करीबियों पर अमेरिका और यूरोपीय संघ पाबंदियां लगा रहे हैं. एक नजर ऐसे रूसी अरबपतियों पर.
थाईलैंड में हाथी हमेशा से बहुत लोकप्रिय रहे हैं. इस साल राष्ट्रीय हाथी दिवस के मौके पर भव्य आयोजन हुआ.
35 की उम्र के बाद मां बनना बहुत मुश्किल हो जाता है. ये आइडिया आया आज से कुछ तीन सौ साल पहले फ्रांस में हुई एक स्टडी से. लेकिन तीन सौ साल पहले का जमाना भी तो अलग था तब ना बिजली थी, ना दवाएं और ना आज जैसा खाना. तो क्या तब हुई रिसर्च आज भी लागू होती है?