ईरान के खिलाफ हथियारों के व्यापार पर प्रतिबंध का अंत | दुनिया | DW | 19.10.2020
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दुनिया

ईरान के खिलाफ हथियारों के व्यापार पर प्रतिबंध का अंत

ईरान ने कहा है कि उसके खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे हथियारों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध का अंत हो गया है और अब उसका हथियार खरीदने से ज्यादा बेचने का इरादा है.

ईरान की घोषणा के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में 10 साल से भी ज्यादा पहले लगे प्रतिबंध का स्वतः ही रविवार को अंत हो गया, जैसा की 2015 में हस्ताक्षर की गई एक संधि की शर्त थी. ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित यह समझौता ईरान ने दुनिया के छह बड़े देशों के साथ किया था और अमेरिका 2018 में इस से पीछे हट गया था. ईरान ने यह भी कहा कि अब उसका हथियार खरीदने से ज्यादा बेचने का इरादा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खातिबजादे ने पत्रकारों से कहा, "हथियारों के बाजार में खरीदार बनने से पहले, ईरान में हथियारों को बेचने की क्षमता है." उन्होंने यह भी कहा, "बेशक, ईरान अमेरिका के जैसा नहीं है जिसके राष्ट्रपति यमन के लोगों के संहार के लिए घातक हथियार बेचने के लिए तत्पर रहते हैं."

उनका इशारा उन हथियारों की तरफ था जो सऊदी अरब ने अमेरिका से खरीदे हैं. सऊदी अरब यमन में ईरान के समर्थन वाले हूथी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाले एक सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है.

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अमेरिका ने कहा है की ईरान को हथियार बेचना अभी भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा और उसने ऐसे किसी भी लेन-देन में शामिल होने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है.

हथियार भी बेचेगा ईरान

इस प्रतिबंध के अंत के बाद ईरान अब टैंक, बख्तरबंद वाहन, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और भारी सैन्य उपकरण खरीद और बेच सकता है. खातिबजादे के अनुसार, ईरान "जिम्मेदारी से पेश" आएगा और दूसरे देशों को हथियार "अपने ही हिसाब से" बेचेगा.

संधी की शर्तों के अनुसार, प्रतिबंध के अंत की 18 अक्टूबर से शुरुआत होनी थी उसे धीरे धीरे पूरी तरह से हटना था. हालांकि अमेरिका ने कहा है की ईरान को हथियार बेचना अभी भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा और उसने ऐसे किसी भी लेन-देन में शामिल होने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है.

चीन ने अमेरिका की इस धमकी का विरोध किया है और कहा है कि अमेरिका खुद "हथियार बेचता" है और दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप करता है. ईरान के रक्षा मंत्री आमिर हतामि ने उनके राष्ट्रीय टीवी चैनल को बताया कि उनका देश मुख्य रूप से अपनी ही सैन्य क्षमताओं पर निर्भर है. उन्होंने बताया की "कई देशों" ने ईरान से हथियारों के संभावित व्यापार के लिए संपर्क किया है, लेकिन उन्होंने जोर दे कर कहा कि "हमारी खरीद के मुकाबले बिक्री कहीं ज्यादा होगी." 

सीके/एए (एएफपी)

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