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ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई कौन हैं?

योहाना नाज्दी अनुवाद: सोनम मिश्रा
९ मार्च २०२६

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खमेनेई के बेटे मोजतबा खमेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है. ये दिखाता है कि अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध में घिरा ईरान आगे भी उन्हें टक्कर देने का ही इरादा रखता है.

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मोजतबा खमेनेई का इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर से गहरा संबंध रहा है, जिसे कई लोग देश की ताकत का असल केंद्र मानते हैं
मोजतबा खमेनेई का इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर से गहरा संबंध रहा है, जिसे कई लोग देश की ताकत का असल केंद्र मानते हैंतस्वीर: Majid Asgaripour/WANA (West Asia News Agency)/REUTERS

8 सितंबर 1969 को मशहद में जन्मे मोजतबा खमेनेई, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता, अली खमेनेई के दूसरे बेटे हैं. बीते 28 फरवरी को एक इस्राएली हमले में अली खमेनेई की मौत हो गई. 8 मार्च को 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खमेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान, अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध से गुजर रहा है.

मोजतबा को अक्सर उनके रहस्यमयी व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है. साथ ही, उन्हें ईरान की सत्ता के गलियारों में सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक माना जाता है. उनके बारे में कहा जाता है कि उनका इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से गहरा संबंध रहा है, जिसे कई लोग देश की ताकत का असल केंद्र मानते हैं. ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने जनता से अपील की है कि वह नए चुने गए नेता का समर्थन करें और "एकता बनाए रखें.”

हालांकि, मोजतबा की नियुक्ति को कई लोग उनके पिता की नीतियों और कड़े शासन की निरंतरता ही मानते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति, डॉनल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि खमेनेई के बेटे को सर्वोच्च नेता बनाना "अस्वीकार्य" है. साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर यह नियुक्ति वॉशिंगटन की सहमति के बिना होती है, तो ईरान का नया नेता "ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा.”

मोजतबा खमेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुने जाने के समर्थन में 9 मार्च को तेहरान में इकट्ठे हुए लोग
मोजतबा खमेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुने जाने के समर्थन में 9 मार्च को तेहरान में इकट्ठे हुए लोग तस्वीर: Majid Asgaripour/WANA (West Asia News Agency)/REUTERS

अमेरिकी मीडिया, एक्सिऑस के अनुसार ट्रंप ने कहा, "वह अपना समय बर्बाद कर रहे हैं. खमेनेई का बेटा कोई खास ताकतवर व्यक्ति नहीं है.” इसके अलावा, पिछले हफ्ते इस्राएल के रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि अली खमेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में जिसे भी चुना जाएगा, वह "हमारे निशाने पर रहेगा.”

एक कठोर और विवादित व्यक्तित्व

56 वर्षीय शिया धर्मगुरु मोजतबा खमेनेई काफी लंबे समय से सार्वजनिक रूप से कम ही दिखाई दिए हैं और उन्होंने कभी कोई सरकारी पद भी नहीं संभाला है. इसके बावजूद, वह ईरान की जटिल सत्ता संरचना, खासकर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के भीतर काफी प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते रहे हैं.

1990 के दशक के मध्य से ही सरकारी अधिकारियों ने मोजतबा खमेनेई के राजनीति में बढ़ते प्रभाव को महसूस करना शुरू कर दिया था. उस समय उन्हें अक्सर ईरान–इराक युद्ध (1980–1988) से लौटे इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के लड़ाकों और कमांडरों की तरह देखा जाता था. लेकिन असल मायने में वह 2005 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए. विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी रणनीति ने ही इन चुनावों की दिशा तय की थी. कथित तौर पर मोजतबा ने ही इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड से जुड़े एक कम जाने‑पहचाने नाम महमूद अहमदीनेजाद को चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाई थी.

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2005 के चुनाव के बाद ईरान के पूर्व राष्ट्रपति, अकबर हाशेमी रफसंजानी को राजनीतिक रूप से काफी नुकसान पहुंचा था. हालांकि, उन्होंने इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा था लेकिन चुनाव में राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार, मेहदी कर्रूबी ने एक खुला पत्र लिखकर मोजतबा खमेनेई पर चुनाव में दखल देने और महमूद अहमदीनेजाद को सत्ता तक पहुंचने में मदद करने का आरोप लगाया था.

इस घटना के चार साल बाद मोजतबा पर फिर से इसी तरह के आरोप लगे थे. इस बार, अहमदीनेजाद के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसमें कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन के दौरान "मोजतबा मुर्दाबाद” के नारे लगाए थे, जो उनके पिता के बाद मोजतबा के सर्वोच्च नेता बनने के विचार के खिलाफ थे. इस तरह के उथल-पुथल भरे वक्त के दौरान कई ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि मोजतबा तथाकथित "ग्रीन मूवमेंट” को दबाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोप

मोजतबा पर तथाकथित वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी कई रिपोर्टें भी सामने आती रही हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था का कम से कम 60 फीसदी हिस्सा उन होल्डिंग कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से संचालित होता है, जो अली खमेनेई के नियंत्रण में हैं. इन संस्थाओं में मुस्ताजफन फाउंडेशन, इमाम खोमेनी रिलीफ कमेटी, खातम अल-अनबिया कंस्ट्रक्शन हेडक्वार्टर्स और अस्तान कुद्स रजवी जैसी बड़ी संस्थाएं शामिल हैं. कथित तौर पर, इन संस्थाओं की वित्तीय व्यवस्था की निगरानी मोजतबा खमेनेई ही करता था.

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ब्लूमबर्ग की हालिया 2026 जांच रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा खमेनेई की संपत्ति में लंदन और दुबई जैसे शहरों में महंगे रियल एस्टेट शामिल हैं. इसके अलावा वह यूरोप में शिपिंग, बैंकिंग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़ी संपत्तियों से भी जोड़े जाते रहे हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें से ज्यादातर संपत्तियां सीधे उनके नाम पर नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग मध्यस्थ लोगों और कई देशों में बनी कंपनियों के जटिल ढांचे पर आधारित है.

कैसे और कहां बीता बचपन

ईरानी सरकारी मीडिया, मोजतबा को एक सीधा‑सादा जीवन जीने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाती रही है. उन्होंने अलावी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कॉम सेमिनरी में दाखिला लिया और यहां कई जाने‑माने और प्रभावशाली शिया धर्मगुरुओं से शिक्षा ली थी.

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उनके बचपन में ही उनके पिता, अली खमेनेई, शाह मोहम्मद रजा पहलवी की राजशाही के खिलाफ चल रहे संघर्ष का एक बड़ा चेहरा बन चुके थे. मोजतबा ने अपने शुरुआती सात साल ईरान के उत्तर‑पश्चिमी शहरों - सरदश्त और महाबाद में बिताए और वहीं से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई भी की थी. साल 1987 में वह अपना हाई स्कूल पूरा करने के बाद इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर में शामिल हो गए थे.

साल 1999 में मोजतबा खमेनेई ने कॉम शहर में अपनी इस्लामी पढ़ाई शुरू की ताकि वह एक धर्मगुरु बन सके. इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड और ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के करीबी सूत्रों ने कई रिपोर्टें और यादें साझा की, जिसमें मोजतबा के 1980 के दशक में ईरान‑इराक युद्ध में हिस्सा लेने की बात की गई थी.

इस जानकारी के अनुसार, जब वह युद्ध के मोर्चे पर गए, तब उनकी उम्र लगभग 17 साल थी. इस समय में वह एक बटालियन से जुड़े, जिसके कई सदस्य बाद में ईरान की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल हुए और अक्सर मोजतबा के आसपास देखे जाते थे. उनके पिता, अली खमेनेई समेत ईरान के बहुत कम लोगों को ही उम्मीद थी कि मोजतबा किसी दिन देश के सर्वोच्च नेता नियुक्त किए जा सकते हैं.