आईएस सदस्यों की वतन वापसी से चिंता में पड़े कई देश
१८ फ़रवरी २०२६
वेर्नर प्लाइल को कुछ पता नहीं है कि उनका बेटा कहां है. उन्हें आखिरी बार यही जानकारी मिली थी कि उनका बेटा डिर्क, पूर्वोत्तर सीरिया में कैद है.
डिर्क 2015 में "इस्लामिक स्टेट" में शामिल हुआ. 2017 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और तब से वह सीरिया में बंद है, बिना किसी कानूनी सुनवाई के.
डिर्क के पिता, पेशे से फोटोग्राफर थे. अब वह रिटायर हो चुके हैं. पिता वेर्नर के मुताबिक, डिर्क को टीबी की बीमारी है. स्वास्थ्य और कानूनी कार्रवाई के लिए वह डिर्क को जर्मनी लाना चाहते हैं. डिर्क की पत्नी और नौ साल का बेटा अब भी तुर्की में हैं. उम्रदराज वेर्नर प्लाइल उन्हें भी वापस जर्मनी लाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं.
इस्लामिक स्टेट के आतंकी को जर्मनी में उम्रकैद
बीते कुछ हफ्तों में सारी योजनाएं लटकती दिख रही हैं. सीरिया की अंतरिम सरकार की फौज और सीरियाई कुर्द उग्रवादियों के बीच, पूर्वोत्तर सीरिया में संघर्ष छिड़ा है. जिन कैंपों में आईएस के सदस्य बंद हैं, वहां अफरा तफरी है.
इसी अनियंत्रित माहौल के बीच आईएस के कई सदस्य, अपने परिजनों के साथ हिरासत केंद्रों से भाग गए. वहीं 21 जनवरी से 12 फरवरी के बीच अमेरिकी सेना ने 5,700 कैदियों को सीरिया से बाहर ट्रांसफर भी किया.
सीरिया से निकाले आईएस बंदियों में जर्मन भी
वेर्नर प्लाइल ने डीडब्ल्यू से कहा, "मैं विदेश विभाग के संपर्क में हूं और उन्होंने मुझसे कहा है कि इस ट्रांसफर में जर्मनी शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह सीरियाई, कुर्दों और अमेरिकियों के बीच का मामला है."
जर्मन सरकार ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "संघीय विदेश विभाग को पूर्वोत्तर सीरिया के हिरासत कैंपों से इराक हुए इस ट्रांसफर की जानकारी है. लेकिन वह इस ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल नहीं थी."
विदेश विभाग को इस ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल लोगों की राष्ट्रीयता की भी पूरी जानकारी नहीं है. जर्मन अधिकारी, अमेरिकी और इराकी अधिकारियों के संपर्क में हैं.
इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि सीरिया में कैद, 27 जर्मन नागरिक अब इराक में हैं. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, ट्रांसफर किए गए हजारों लोगों में जर्मन नागरिक भी हैं. एक इराकी जज ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि उन्होंने बगदाद की अल-करख जेल में जर्मन हिरासती देखे हैं. यह जज, ट्रांसफर किए गए कैदियों से पूछताछ करने वाली समिति में शामिल हैं.
अभी यह साफ नहीं है कि इराक और सीरिया जाकर इस्लामिक स्टेट ज्वाइन करने वाले कुल जर्मनों की संख्या कितनी है. फिलहाल जर्मन सरकार को लगता है कि यह संख्या दहाई के अंकों में है.
अधिकांश महिलाओं और बच्चों को अल-होल या रोज जैसे हिरासत केंद्रों में रखा गया है. यूएनएचआरसी की रिपोर्टों के मुताबिक, अल-होल हिरासत केंद्र में कभी 26,500 बंदियों को रखा गया था, लेकिन आज यह तकरीबन खाली है. एक और इलाका जहां कभी 6,000 विदेशियों को रखा जाता था, वह भी अब खाली बताया जा रहा है.
अल-होल में कैद किए गए कुछ लोगों को अलेप्पो प्रांत के एक कैंप में रखे जाने की जानकारी है. कुछ मामलों में रिश्तेदारों या तस्करों की मदद से भी लोगों को निकाला गया है. इनमें भी कुछ के जर्मन नागरिक होने की खबरें हैं.
सीरिया को कोई मलाल नहीं
जर्मन सरकार के एक सूत्र ने दो दिन पहले डीडब्ल्यू से कहा कि, अल-होल कैंप पर किसी का नियंत्रण नहीं है. उस कैंप के आस पास निगरानी करना बहुत मुश्किल हो चुका है और सीरिया की नई सरकार के पास इतने सैनिक नहीं हैं कि वह वहां नियंत्रण स्थापित कर सके.
पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर सूत्र ने कहा, "अगर कुछ विदेशी उस कैंप से बाहर निकलने में सफल होते हैं और फिर तुर्की, लेबनान होते हुए, आखिर में अपने वतन लौटने कोशिश करते हैं तो, साफ कहूं कि- सीरिया सरकार शायद उन्हें रोकने की पुख्ता कोशिश नहीं करेगी."
ऐसा होने भी लगा है. ब्रिटिश अखबार, द गार्डियन के मुताबिक, आईएस की सदस्य बनने की दोषी एक बेल्जियम की महिला, तुर्की होते हुए यूरोप लौटी है. इसी हफ्ते 34 ऑस्ट्रेलियाई भी रोज कैंप से निकलकर घर लौटने की कोशिश कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इन लोगों को देश की सीमा में वापस दाखिल नहीं होने देगी.
चिंता में यूरोप
आईएस में शामिल हो चुके यूरोपीय लो गों की वापसी एक बड़ा सिरदर्द है. यूरोपीय संघ के आतंकवाद विशेषज्ञों के मुताबिक आईएस के सदस्य और फॉलोवर्स सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर संकट पैदा करते हैं. यह बात कई वर्षों से पता है.
बर्लिन में काउंटर टैरेरिज्म प्रोजेक्ट (सीईपी) की सीनियर रिसर्चर सोफिया कोलर कहती हैं, "राजनीतिक नजरिये से यह बहुत ही विवादास्पद है लेकिन कई दूसरे मायनों में ऐसा बिल्कुल नहीं है." एक तरफ नागरिकों के पास अपने वतन लौटने का अधिकार है तो दूसरी तरफ सरकारों की सुरक्षा व कानून संबंधी चिंताएं.
इराक ने अपने यहां बंद विदेशी नागरिकों को वापस उनके देश भेजने का एलान किया है. अमेरिका भी ऐसा ही कह चुका है.
ऐसी खबरों के बीच वेर्नर प्लाइल को अपने बेटे की चिंता है. वह कहते हैं, "जर्मनी में मौत की सजा खत्म की जा चुकी है लेकिन इराक इसकी बिल्कुल परवाह नहीं करता. हमारी सरकार इस बात का इंतजार कर रही है कि कोई समाधान खुद उसके सामने आ जाएगा या आखिकार कोई उनके लिए यह गंदा काम करेगा."