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राजनीतिसंयुक्त राज्य अमेरिका

पाकिस्तान पीएम: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने के करीब

१३ जून २०२६

शहबाज शरीफ के मुताबिक अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने के समझौते पर सहमत हो गए हैं. पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है. इस जंग से दुनियाभर में तेल सप्लाई रुकी हुई थी, लेकिन अब समझौता बेहद करीब माना जा रहा है.

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अमेरिका और ईरान का झंडा
अरागची ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को शुरुआती समझौते पर दस्तखत होने के बाद 60 दिनों के भीतर आखिरी रूप दिया जाएगा.तस्वीर: Rainer Unkel/IMAGO

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा है कि अमेरिका और ईरान मध्य पूर्व में अपनी जंग को खत्म करने के लिए एक समझौते पर सहमत हो गए हैं. अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने यह सूचना दी. इस समय पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ मिलकर इस डील को आखिरी रूप देने के लिए मध्यस्थता कर रहा है. शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देश एक "आखिरी और आपसी सहमति वाले दस्तावेज" तक पहुंच चुके हैं और पाकिस्तान इस बातचीत में आगे रहकर अगले कदमों पर काम कर रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "शांति इससे पहले कभी इतनी करीब नहीं थी, जितनी अब है."

इसी हफ्ते अमेरिका और इस्राएल ने ईरान पर तीन बार एक दूसरे पर हमले किए, जिससे दोबारा पूरी तरह से जंग छिड़ने का खतरा पैदा हो गया था. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी 'एक्स' पर लिखा कि समझौता बेहद करीब है. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी अरागची के इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया. अमेरिका और इस्राएल द्वारा 28 फरवरी को शुरू की गई इस जंग ने सभी खाड़ी देशों को हिलाकर रख दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई लगभग बंद हो गई है. हालांकि, 7 अप्रैल से दोनों पक्षों की बीच संघर्षविराम लागू है.

परमाणु कार्यक्रम और लेबनान पर बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को ईरान के सरकारी टीवी पर कहा कि दोनों पक्ष एक शुरुआती समझौते पर दस्तखत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो "लेबनान समेत सभी मोर्चों पर" जंग खत्म होने का ऐलान करेगा. इस्राएल मार्च की शुरुआत से ही लेबनान में ईरान के समर्थक मिलिशिया हिजबुल्लाह के खिलाफ लड़ रहा है. इस्राएल इस बातचीत का हिस्सा नहीं है और वहां के नेताओं ने कहा है कि वे लेबनान से पीछे हटने की योजना नहीं बना रहे हैं.

अरागची ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को शुरुआती समझौते पर दस्तखत होने के बाद 60 दिनों के भीतर आखिरी रूप दिया जाएगा. असल में अमेरिका और इस्राएल को डर है कि अगर ईरान का परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं कराया गया तो वे परमाणु बम बना लेंगे. उन्होंने जंग शुरू करने की मुख्य वजह भी इसी को बताया था, जबकि ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए है.

होर्मुज में नाकाबंदी से पूरी दुनिया पर असर

नाम न छापने की शर्त पर अमेरिका के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इस नए समझौते के तहत तेहरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने या हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. दस्तखत करने के बाद के 60 दिनों का इस्तेमाल इसके तकनीकी तौर-तरीकों को तय करने के लिए किया जाएगा. अधिकारी ने यह साफ नहीं किया कि यूरेनियम हटाने का जिम्मा किसे मिलेगा. यह वही यूरेनियम कार्यक्रम है जो पिछले साल अमेरिकी हमलों में भारी बमबारी का शिकार हुए तीन परमाणु ठिकानों के नीचे दबा माना जाता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य और टैक्स का विवाद

इस जंग का एक बड़ा असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना भी है, जो तेल और प्राकृतिक गैस का बेहद जरूरी समुद्री रास्ता है. इस रुकावट से दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई कम हो गई है और ईंधन समेत खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, नए समझौते में इस रास्ते को दोबारा खोलने के नियम शामिल हैं.

अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान एक ऐसी डील चाहता है जिसके तहत तेहरान को वहां से गुजरने वाले जहाजों से "दी गई सेवाओं के लिए" पैसे लेने की इजाजत मिले. ईरान ने जंग के दौरान एक टैक्स सिस्टम लागू किया है, जिसे अमेरिका और दूसरे देश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हैं. अरागची ने कहा, "इसमें कुछ लागत आएगी और वह चुकाई जानी चाहिए." इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनने वाले कई ईरानी हमलावर ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया.

अगले कुछ दिनों में हो सकते हैं दस्तखत

एपी ने सूत्रों के मुताबिक बताया कि इस समझौते में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और उसकी रोकी गई संपत्तियों को मुक्त करना भी शामिल है. न्यूज रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन और तेहरान में मंजूरी मिलने के बाद अगले कुछ दिनों में इस समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं. डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस बातचीत में बड़ी कामियाबी का दावा किया था, जबकि इसके कुछ ही घंटे पहले उन्होंने हमलों को तेज करने और ईरान के तेल उद्योग पर कब्जा करने की धमकी दी थी.

इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि इस्राएल इस बातचीत का हिस्सा नहीं है. उन्होंने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि वह और डॉनल्ड ट्रंप इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. इस्राएल के रक्षा मंत्री इस्राएल काट्ज ने कहा कि इस्राएल उम्मीद करता है कि ट्रंप उनके जरूरी हितों की रक्षा करेंगे, जिसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके समर्थक नेटवर्क को कमजोर करना शामिल है.

काट्ज ने चेतावनी दी कि इस्राएल अब भी ईरान के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है और वह लेबनान, सीरिया, गाजा और वेस्ट बैंक के उत्तरी शरणार्थी कैम्पों के उन इलाकों से पीछे नहीं हटेगा जहां उसका कब्जा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते में मुख्य रूप से पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता की जा रही है, जिसका नेतृत्व वहां के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कर रहे हैं और इसमें उन्हें सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और कतर का भी समर्थन हासिल है.

साहिबा खान
साहिबा खान साहिबा 2023 से DW हिन्दी के लिए आप्रवासन, मानव-पशु संघर्ष, मानवाधिकार और भू-राजनीति पर लिखती हैं.https://x.com/jhansiserani
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