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राजनीतिविश्व

होरमुज के मसले पर ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को "कायर" कहा

निखिल रंजन एपी, एएफपी | आदर्श शर्मा एएनआई, रॉयटर्स
प्रकाशित २० मार्च २०२६आखिरी अपडेट २० मार्च २०२६

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एक कार्यक्रम में बोलते हुए डॉनल्ड ट्रंप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर डाले एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा है कि नाटो सहयोगी "कायर हैं और हम यह याद रखेंगे"तस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/picture alliance
आपके लिए अहम जानकारी को स्किप करें
पश्चिम बंगाल चुनाव: तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया घोषणापत्र को स्किप करें
२० मार्च २०२६

पश्चिम बंगाल चुनाव: तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया घोषणापत्र

एक कार्यक्रम में आपस में बात करते ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपना 10 सूत्री घोषणापत्र जारी कर दिया है. पार्टी इन 10 वादों को “दीदी की 10 प्रतिज्ञा” बता रही हैतस्वीर: Prabhakar/DW

पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपना 10 सूत्री घोषणापत्र जारी कर दिया है. पार्टी इन 10 वादों को “दीदी की 10 प्रतिज्ञा” बता रही है. घोषणापत्र में सबसे पहला वादा महिलाओं के लिए ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना से जुड़ा है. पार्टी ने सत्ता में वापसी होने पर सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और आरक्षित वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया है. 

बांग्लार युवा साथी योजना के तहत, माध्यमिक परीक्षा पास कर चुके 21 से 40 वर्ष तक के युवाओं को नौकरी मिलने तक 1,500 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया गया है. पार्टी ने हर परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराने का भी वादा किया है. साथ ही 30,000 करोड़ रुपये के कृषि बजट का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें किसानों और भूमिहीन कृषि परिवारों के लिए विशेष पैकेज शामिल होगा. 

घोषणापत्र में राज्य के भौगोलिक पुनर्गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसके तहत सात नए जिलों के गठन और शहरी निकायों के विस्तार की बात कही गई है, ताकि नागरिक सुविधाओं में सुधार हो सके. इसके अलावा, राज्य को पूर्वी भारत का व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए बंदरगाह, सड़क और आधुनिक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे के विकास का भी वादा किया गया है.

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खाड़ी देशों में हुई घटनाओं में छह भारतीयों की मौत, एक लापता को स्किप करें
२० मार्च २०२६

खाड़ी देशों में हुई घटनाओं में छह भारतीयों की मौत, एक लापता

दिल्ली एयरपोर्ट पर लगी जानकारी देने वाली बड़ी स्क्रीन को देखते यात्री
28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक करीब तीन लाख भारतीय खाड़ी देशों से भारत वापस आ चुके हैंतस्वीर: Vipin Kumar/Hindustan Times/Sipa USA/picture alliance

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान, खाड़ी क्षेत्र में हुईं अलग-अलग घटनाओं में अब तक छह भारतीय नागरिकों की मौत हुई है और एक अभी भी लापता है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी और बताया कि भारतीय मिशन इन क्षेत्रों में फंसे लोगों की मदद कर रहे हैं और उनकी वापसी के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं.

विदेश मंत्रालय में खाड़ी क्षेत्र के संयुक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में यात्रा की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है और बड़ी संख्या में नागरिक भारत लौट चुके हैं. उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक करीब तीन लाख भारतीय वहां से भारत वापस आ चुके हैं. उन्होंने बताया कि यूएई, सऊदी अरब और ओमान से भारत के लिए उड़ानें आ रही हैं. 

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ड्रग डीलर गैंग को टिप देने वाले जर्मन अभियोजक को 8 साल की कैद को स्किप करें
२० मार्च २०२६

ड्रग डीलर गैंग को टिप देने वाले जर्मन अभियोजक को 8 साल की कैद

न्याय की प्रतीकात्मक तस्वीर
जर्मनी में एक अभियोजक को भ्रष्टाचार के आरोप में 8 साल कैद की सजा सुनाई गई हैतस्वीर: Ute Grabowsky/photothek/picture alliance

जर्मनी की एक अदालत ने एक अभियोजक को भ्रष्टाचार के आरोप में आठ साल छह महीने कैद की सजा सुनाई है. लंबी सुनवाई के बाद अभियोजक को भ्रष्टाचार और पेशेवर गोपनीयता को भंग करने का दोषी करार दिया गया है. हनोवर की अदालत में यह साबित हुआ है कि 40 साल की उम्र वाले अभियोजक ने पुलिस की जांच से जुड़ी जानकारियां अंतरराष्ट्रीय ड्रग डीलर के गैंग तक पहुंचाईं और उन्हें छापों के ब्यौरे दिए. 

जर्मन कानून के तहत इसका नाम सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. इस आदमी ने इस साल जनवरी में अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को स्वीकार कर लिया. ओस्नाब्रुक के अभियोजकों ने उस पर 14 आरोप लगाए थे. कोर्ट के साथ हुई सहमति के तहत उसने 9 आरोप स्वीकार कर लिए और बाकी के पांच आरोप उस पर से हटा लिए गए. 

उसने इस बात के सबूत दिए कि गैंग को दी हर जानकारी के बदले उसे 2,500 यूरो की रकम मिली. हालांकि, अभियोजकों का आरोप है कि यह रकम इसकी दोगुनी थी. उसे हर महीने करीब 5,000 यूरो का वेतन मिलता था. इस मामले की जांच 2022 में शुरू हुई थी. इस आदमी के घर और दफ्तर की तलाशी भी ली गई. अक्टूबर 2023 में सबूतों के अभाव में यह मामला बंद कर दिया गया. हालांकि जून 2024 में इसकी दोबारा जांच शुरू हुई. अदालत में पिछले साल अप्रैल में इसकी सुनवाई शुरू हुई. 
 

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होरमुज के मसले पर ट्रंप ने नाटो को "कायर" कहा को स्किप करें
२० मार्च २०२६

होरमुज के मसले पर ट्रंप ने नाटो को "कायर" कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की फाइल तस्वीर
होरमुज में सहयोग नहीं मिलने पर डॉनल्ड ट्रंप ने "नाटो" को कायर कहा हैतस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/picture alliance

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने नाटो के सहयोगियों को "कायर" कहा है. ईरान युद्ध में होरमुज जलडमरूमध्य को सैन्य तरीकों से खुलवाने में सहयोग नहीं देने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह प्रतिक्रिया दी है. ट्रूथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाले एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा है कि नाटो सहयोगी "कायर हैं और हम यह याद रखेंगे."

ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सहयोगी, "होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने में सहयोग नहीं देना चाहते, यह एक सरल सैन्य कदम है जो तेल की कीमतें बढ़ने का अकेला कारण है. यह उनके लिए बहुत आसान है जिसमें बहुत थोड़ा सा जोखिम है."

इसी हफ्ते डॉनल्ड ट्रंप ने नाटो और कई दूसरे देशों से होरमुज का रास्ता जहाजों के लिए खुलवाने में मदद मांगी थी. सभी देशों का कहना है कि जब तक वहां युद्ध जारी है वे अपनी सेना को खाड़ी में नहीं भेजेंगे. सहयोगियों की इस बात से ट्रंप काफी निराश हुए और यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका इस काम में सहयोग नहीं देगा और वहां से निकल जाएगा. 

जापान और कुछ यूरोपीय देशों ने होरमुज के मसले पर सहयोग की बात कही है और उस पर चर्चा करने को तैयार हैं लेकिन युद्ध रुकने के बाद ही वे उस इलाके में जाने का इरादा रखते हैं. 
 

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खाड़ी में फंसे जहाजों के क्रू मेंबरों को हो रही खाने पीने की दिक्कत को स्किप करें
२० मार्च २०२६

खाड़ी में फंसे जहाजों के क्रू मेंबरों को हो रही खाने पीने की दिक्कत

संयुक्त अरब अमीरात के फुजायरा में फंसे टैंकर
होरमुज जलडमरुमध्य का रास्ता बंद होन से कई जहाज फंसे हुए हैं तस्वीर: Amr Alfiky/REUTERS

खाड़ी में फंसे जहाजों के क्रू मेंबरों को खाने और पानी का कोटा तय करना पड़ रहा है. ईरान की नाकाबंदी की वजह से कई जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं. तीन हफ्ते का समय बीतने के बाद भी उनके पास सप्लाई नहीं पहुंच रही है. ऐसे में जरूरी चीजों को कोटा तय करके इस्तेमाल करना पड़ रहा है. खासतौर से भोजन और पानी की दिक्कत है. 

इराक के पास एक छोटे से रिफ्यूलिंग बोट पर सवार भारतीय नाविक ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "हमारे पास जहाज पर फिलहाल पर्याप्त पानी नहीं है. कुछ दिन पहले हमें खाना मिला था." उसने यह भी कहा, "कल तक हमारे पास पीने का पानी और नहाने धोने के लिए ताजा पानी था. हालांकि अब पीने का पानी लगभग खत्म हो चुका है. हमने मालिक से पीने के पानी के लिए संपर्क किया है. हो सकता है कि कल तक पानी आ जाए. तब तक हम पानी उबाल कर पी रहे हैं."

एक जहाज के कैप्टन ने कहा कि उनका जहाज कतर में रास लाफान लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्लांट के पास फंसा हुआ है. गुरुवार को इस प्लांट पर ईरान ने हमला किया था. कैप्टन का कहना है, "अगर पोर्ट पूरी तरह से बंद हो गया तो फिर क्रू के बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं है. तो यह एक चिंता है. दूसरी चिंता है खाना और पानी की सप्लाई साथ ही उन चीजों की, जिनकी क्रू को जरूरत पड़ती है. 

समाचार एजेंसी एएफपी ने इस कैप्टन से किनारों पर बात की, इस बीच कोई और कप्तान जहाज की जिम्मेदारी संभाल रहा है. हालांकि, वह अपने क्रू के साथ नियमित रूप से संपर्क में है. उसने बताया कि क्रू के 25 सदस्य जहाज से उतर गए हैं जबकि 95 लोग जहाज पर ही हैं. उनके लिए हर 10-15 दिन पर सामान भेजना पड़ता है. 
 

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भारतीय एयरलाइनों ने की किराए पर लगी सीमा हटाने की मांग को स्किप करें
२० मार्च २०२६

भारतीय एयरलाइनों ने की किराए पर लगी सीमा हटाने की मांग

उड़ान भरता हुआ इंडिगो का एक जहाज
पिछले साल दिसंबर में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने के बाद सरकार ने किराए की सीमा तय की थीतस्वीर: Pius Koller/imageBROKER/picture alliance

इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ने भारत सरकार से किराए पर लगाई गई सीमा को हटाने की मांग की है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने कहा है कि ईरान युद्ध की वजह से एविएशन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते उड़ानों के संचालन पर अधिक खर्च हो रहा है और भारतीय एयरलाइनों को राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, इसलिए उन्हें किराया बढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए. 

हवाई किराए पर यह सीमा पिछले साल दिसंबर में लगाई गई थी, जब इंडिगो की हजारों उड़ाने रद्द होने के बाद अन्य एयरलाइनों ने अपने किराए में काफी ज्यादा बढ़ोतरी कर दी थी. तब भारत सरकार ने यह अनिवार्य किया था कि 500 किलोमीटर तक की यात्रा का किराया 7,500 रुपये और 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक की यात्रा का किराया 15,000 रुपये से अधिक नहीं होगा. 

फेडरेशन ने कहा कि इंडिगो संकट अब खत्म हो चुका है लेकिन किराए पर लगाई गई सीमा अभी भी बनी हुई है. उन्होंने अपने पत्र में पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के चलते होने वाले नुकसान का भी हवाला दिया है. फेडरेशन ने लिखा है कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो एयरलाइनों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. 

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फ्रांस की नौसेना ने भूमध्यसागर में संदिग्ध रूसी बेड़े का जहाज पकड़ा को स्किप करें
२० मार्च २०२६

फ्रांस की नौसेना ने भूमध्यसागर में संदिग्ध रूसी बेड़े का जहाज पकड़ा

फ्रांस की नौसेना के हाथों जनवरी में पकड़े गए रूसी तेल टैंकर की फाइल तस्वीर
फ्रांस की सेना ने एक टैंकर को पकड़ा है जिस पर प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए पहचान छिपाने के आरोप हैंतस्वीर: Gilles Bader/MAXPPP/picture alliance

फ्रांस की नौसेना ने भूमध्यसागर में एक टैंकर को रोक लिया है और उस पर सैनिक सवार हो गए हैं. राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों का कहना है कि यह रूस की प्रतिबंधित शैडो फ्लीट का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की अवहेलना कर तेल की ढुलाई कर रहा है. यूक्रेन पर हमला करने के चलते रूस से तेल के कारोबार पर कई देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है. 

फ्रांस के समुद्री विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, टैंकर डेना पर गलत झंडा लगा कर अपनी पहचान छिपाने का आरोप है. इसे पश्चिमी भूमध्यसागर में रोका गया है जिसमें सहयोगियों ने मदद की है. मदद करने वालों में ब्रिटेन भी शामिल है जिसने जहाज पर नजर रखी. 

अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा है, "ऑपरेशन का मकसद जहाज की राष्ट्रीयता का पता लगाना है." उस पर मोजाम्बिक का झंडा लगा हुआ है और यह रूसी बंदरगाह मुर्मांस्क से आ रहा था. अधिकारियों का यह भी कहना है, "जहाज पर मिले दस्तावेजों से झंडे की वैधता को लेकर उठे संदेह की पुष्टि हुई है."

टैंकर का रास्ता बदल कर इसे फ्रांस की नौसेना की सुरक्षा में कहीं और ले जाया गया है, जहां इसकी विस्तृत छानबीन की जाएगी.  बयान के मुताबिक इस मामले को मार्सेय बंदरगाह के अभियोजन कार्यालय को सौंप दिया गया है. 

माना जाता है कि रूस प्रतिबंधों से बचने के लिए सैकड़ों जहाजों का छद्म रूप से इस्तेमाल कर रहा है. फ्रांस और दूसरे देश इसे रोकना चाहते हैं. फ्रांस ने जनवरी में भी एक इसी तरह का जहाज पकड़ा था जिसे करोड़ों यूरो का जुर्माना वसूलने के बाद पिछले महीने छोड़ा गया. 
 

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लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट को स्किप करें
२० मार्च २०२६

लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट

एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एक फैसले के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है और यह स्वस्थ आलोचना हैतस्वीर: Ayush Sharma/ANI

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की एक पुरानी किताब में कोर्ट के फैसलों के खिलाफ टिप्पणी की गई है. कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव एंड लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक फैसले के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है और यह स्वस्थ आलोचना है. 

याचिकाकर्ता ने साल 2015-16 के लिए प्रकाशित की गई कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की किताब पर आपत्ति जताई थी. इसमें एक जगह लिखा था, “हालिया फैसलों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को शहर के अतिक्रमणकारी के रूप में देखा गया है.” इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है. 

उन्होंने कहा, “यह फैसले के बारे में एक नजरिया है. यह स्वस्थ आलोचना है. न्यायपालिका को इस बारे में अतिसंवेदनशील क्यों होना चाहिए. किताब का यह हिस्सा बताता है कि न्यायपालिका की संरचना क्या है, वह कैसे काम करती है, उन्होंने क्या किया है और कुछ अच्छी बातों को भी रेखांकित किया गया है.”

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़े चैप्टर को दोबारा से लिखने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. दरअसल, हाल ही में एनसीईआरटी ने कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब प्रकाशित की थी. इसके एक चैप्टर में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होने की बात कही गई थी. 

सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए इस पर नाराजगी जताई थी. सीजेआई सूर्यकांत ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ साजिश करार दिया था. इसके बाद कोर्ट ने उस किताब को बाजार और अन्य जगहों से हटाने का भी आदेश दिया था. अब न्यायपालिका से जुड़े उस चैप्टर को विशेषज्ञ समिति द्वारा दोबारा से लिखा जाएगा. 

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नासा के रोवर ने मंगल ग्रह पर पानी का सबसे पुराना सबूत ढूंढा को स्किप करें
२० मार्च २०२६

नासा के रोवर ने मंगल ग्रह पर पानी का सबसे पुराना सबूत ढूंढा

जजेरो क्रेटर में नासा का रोवर परसिवरेंस
नासा के रोवर ने मंगल ग्रह पर पानी के एक बहुत पुराने सबूत को ढूंढा हैतस्वीर: NASA/JPL-Caltech/MSSS/REUTERS

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के रोवर परसिवरेंस ने मंगल ग्रह पर एक प्राचीन नदी के  के हिस्सों का पता लगाया है. प्राचीन नदी का डेल्टा यात हिस्सा जमीन के भीतर है. परसिवरेंस में लगे रडार जमीन के भीतर जाकर देखने की काबिलियत रखते हैं. यह मंगल ग्रह पर मौजूद सबसे पुराने सबूते हैं, जो अब मिले हैं. इनकी मदद से यह समझा जा सकता है कि मंगल ग्रह पर पहले पानी कैसे बहता था. 

रिसर्चरों का कहना है कि छह पहियों वाले रोवर ने जमीन के अंदर करीब 115 फीट की गहराई में मौजूद भौगोलिक गुणों को दिखाने में सफलता हासिल की है. यह रोवर मंगल ग्रह पर जजेरो क्रेटर के इलाके में करीब 6.1 किलोमीटर के दायरे में खोजबीन कर रहा है. यह क्रेटर मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में है. माना जाता है कि यह इलाका कभी पानी में डूबा हुआ था और यहां एक लेक बेसिन मौजूद था. मंगल ग्रह पर पानी की खोज लंबे समय से हो रही है. 
 

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जर्मन पुलिस ने बाल शोषण से जुड़े एक बड़ी जालसाजी का नेटवर्क ध्वस्त किया को स्किप करें
२० मार्च २०२६

जर्मन पुलिस ने बाल शोषण से जुड़े एक बड़ी जालसाजी का नेटवर्क ध्वस्त किया

प्रतीकात्मक तस्वीर
जर्मन पुलिस ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है तस्वीर: BLKA

जर्मनी में डार्कनेट पर चल रहे एक बड़े स्तर के फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है. इस नेटवर्क पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्रियों के विज्ञापन मौजूद थे. बवेरियाई अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. इस नेटवर्क के कथित प्रमुख की तलाश में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां जुटी हुई हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह 35 साल का एक चीनी युवक है जो चीन में रहता है. बवेरिया राज्य के अपराध पुलिस कार्यालय, बामबर्ग के अभियोजन कार्यालय और बवेरिया के न्याय मंत्रालय ने संयुक्त बयान जारी कर यह बात कही है. 

जांच अधिकारियों ने 3.73 लाख पेजों को ऑफलाइन किया है और 600 में से 440 संदिग्धों की पहचान की है. चार साल से ज्यादा समय से बवेरिया राज्य के अधिकारी एक डार्कनेट प्लेटफॉर्म की जांच कर रहे थे. यहां पर बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के विज्ञापनों की तस्वीरें मौजूद थीं. इन विज्ञापनों का मकसद मुख्य रूप से जालसाजी है. इसके जरिए लोगों को फोटो और वीडियो खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा था. 
इसमें पैसे देने वालों को कोई तस्वीर नहीं भेजी जाती थी. 

इस अभियान के तहत दुनिया के कई और देशों में भी जांच की गई है. करीब 600 लोगों ने बाल शोषण के विज्ञापन दिखाने वाले इन प्लेटफॉर्मों पर जनवरी 2020 से जुलाई 2025 के बीच पैसे दिए. जांच में 23 देशों के अधिकारी शामिल हुए और यूरोपोल इसे कॉर्डिनेट कर रहा है. जर्मनी में 14 संदिग्धों के खिलाफ 9 राज्यों में छापे मारे गए हैं. 
 

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युद्ध के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में यूएई में 109 लोग गिरफ्तार को स्किप करें
२० मार्च २०२६

युद्ध के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में यूएई में 109 लोग गिरफ्तार

आबू धाबी में हमले के बाद निकलता धुआं और रास्ते से गुजरती एक फूड डिलीवरी बाइक
आबू धाबी और दुबई के कई ठिकाने ईरानी हमले का निशाना बने हैंतस्वीर: Ryan Lim/AFP

संयुक्त अरब अमीरात की पुलिस का कहना है कि ईरान युद्ध के दौरान गलत जानकारी फैलाने के आरोप में 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. खाड़ी के देश उन वीडियो और तस्वीरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं जो ईरान के हमलों से जोड़ कर दिखाई जा रही हैं. 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा गया है, "आबू धाबी पुलिस ने 109 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की है, जो अलग अलग देशों की नागरिकता वाले हैं. इन लोगों ने कुछ जगहों और घटनाओं की शूटिंग कर गलत जानकारियों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर फैलाई हैं." बयान में यह भी कहा गया है कि कुछ लोगों ने "भ्रामक जानकारियां" फैलाईं हैं. 

सोशल मीडिया पर इस युद्ध से जुड़ी भ्रामक जानकारियां फैलाने की खबरें कई देशों से आई हैं. इन देशों की सरकारें इन पर लगाम कसने की कोशिश कर रही हैं. 

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जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप की स्टील यूनिट की बिक्री की बातचीत रुकी को स्किप करें
२० मार्च २०२६

जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप की स्टील यूनिट की बिक्री की बातचीत रुकी

थिसेनक्रुप की फैक्ट्री में काम कर रहा एक कर्मचारी
थिसेनक्रुप को हाल के सालों में अपने पारंपरिक स्टील व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ हैतस्वीर: Roland Weihrauch/dpa/picture alliance

जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप की स्टील यूनिट को भारत की जिंदल स्टील इंटरनेशनल को बेचने के लिए हो रही बातचीत आगे नहीं बढ़ रही है. थिसेनक्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस बहु-प्रतीक्षित सौदे को महीनों तक नहीं टाला जाना चाहिए. 

थिसेनक्रुप के डिप्टी सुपरवाइजरी बोर्ड चेयरमैन युएर्गन कैर्नर ने कहा कि दोनों कंपनियों की बातचीत में उम्मीद से ज्यादा वक्त लग रहा है. उन्होंने आगे कहा, "चीजें आगे नहीं बढ़ रही हैं और यह एक बुरी बात है" क्योंकि कर्मचारी "महीनों तक अनिश्चितता की स्थिति में नहीं रह सकते."

जिंदल स्टील ने पिछले साल सितंबर में थिसेनक्रुप की स्टील यूनिट को खरीदने के लिए गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव दिया था. थिसेनक्रुप के लिए यह एक अच्छा मौका था क्योंकि वह अपने स्टील व्यवसाय को सालों से बेचना चाह रही थी. हालांकि, अभी तक यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. 

एक समय में जर्मनी के निर्माण उद्योग की पहचान रही थिसेनक्रुप हाल के सालों में संकट में चली गई है. इसे अपने पारंपरिक स्टील व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कंपनी उत्पादन की बढ़ती कीमतों और एशियाई कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है. 

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ईरान युद्ध के चलते स्पेन ईंधन पर वैट घटाएगा को स्किप करें
२० मार्च २०२६

ईरान युद्ध के चलते स्पेन ईंधन पर वैट घटाएगा

स्पेन में माल ढुलाई वाले ट्रकों की कतार
स्पेन ने ईंधन की महंगाई से राहत देने के लिए वैट घटाने का फैसला किया हैतस्वीर: Jesus Monroy/EPA-EFE

स्पेन ने शुक्रवार को ईंधन पर वैट यानी वैल्यू ऐडेड टैक्स की दर 21 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी करने का फैसला किया है. एसईआर रेडियो ने इस योजना से वाकिफ सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई ईंधन आपूर्ति की दिक्कतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. 

स्पेन ने इसके साथ ही हाइड्रोकार्बन पर एक्साइड ड्यूटी को भी फिलहाल निलंबित करने का फैसला किया है. इस फैसले से डीजल और पेट्रोल की कीमत 0.30 से 0.40 सेंट तक तुरंत कम हो जाएंगी. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार बिजली के उपभोग पर पांच फीसदी के टैक्स को भी हटा रही है. 

यूरोपीय देश ऊर्जा के आयात पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. ऐसे में आपूर्ति की दिक्कतों के कारण बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए उपाय किए जा रहे हैं. इटली ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 25 सेंट की कटौती की है. 

जर्मनी भी एक सहायता पैकेज देने की तैयारी में है, जिसमें विंडफॉल टैक्स भी शामिल है. विंडफॉल टैक्स एक खास तरह का टैक्स है, जो जर्मनी में अनापेक्षित रूप से अत्यधिक फायदा होने की स्थिति में लगाया जाता है. जर्मन सरकार तेल कंपनियों पर यह टैक्स लगाना चाहती है. 
 

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अमेरिकी लड़ाकू जहाजों को श्रीलंका में उतरने की नहीं मिली अनुमति को स्किप करें
२० मार्च २०२६

अमेरिकी लड़ाकू जहाजों को श्रीलंका में उतरने की नहीं मिली अनुमति

अमेरिका के एक सैन्य अड्डे पर खड़े एफ-35 विमान
अमेरिका ने अपने दो लड़ाकू विमानों को श्रीलंका के एक नागरिक हवाई अड्डे पर उतारने की अनुमति मांगी थीतस्वीर: Eva Marie Uzcategui/REUTERS

ईरान जंग के दौरान अमेरिका अपने दो लड़ाकू विमानों को श्रीलंका के एक नागरिक हवाई अड्डे पर उतारना चाहता था, लेकिन श्रीलंका ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि श्रीलंका की तटस्थता वाली स्थिति को बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया. 

उन्होंने संसद में कहा कि श्रीलंका नहीं चाहता कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी सैन्य उद्देश्य के लिए किया जाए, जिससे किसी भी पक्ष की मदद हो या नुकसान हो. उन्होंने बताया कि अमेरिका जिन विमानों को मटाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतारना चाहता था, उनमें आठ एंटी-शिप मिसाइलें लगी हुई थीं. 

ईरान के आइरिस डेना युद्धपोत की तस्वीर
ईरान ने भी अपने तीन युद्धपोतों को श्रीलंका के बंदरगाह पर लाने की अनुमति मांगी थीतस्वीर: AP Photo/picture alliance

दिसानायके ने बताया कि अमेरिका ने 26 फरवरी को यह अनुरोध किया था और इसी दिन ईरान ने भी अपने तीन युद्धपोतों को श्रीलंका के बंदरगाह पर लाने की अनुमति मांगी थी. ये तीनों युद्धपोत भारत में एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस लौट रहे थे. दिसानायके ने कहा कि ईरान से हां करने की स्थिति में अमेरिका को भी हां कहना पड़ता. 

हालांकि, बाद में इन तीन में से एक युद्धपोत पर श्रीलंका के पास ही अमेरिकी टॉरपीडो ने हमला किया. इस हमले में 80 से अधिक ईरानी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 32 को श्रीलंका की नौसेना ने बचा लिया. इसके बाद श्रीलंका ने ईरान के एक अन्य युद्धपोत को अपने जलक्षेत्र में आने की अनुमति दे दी, ताकि उसमें सवार 200 से अधिक सैनिक सुरक्षित रहें. वहीं, तीसरे ईरानी युद्धपोत को भारत ने अपने यहां आने की अनुमति दी थी. 

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फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने के प्रस्ताव को कंपनियों ने नकारा को स्किप करें
२० मार्च २०२६

फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने के प्रस्ताव को कंपनियों ने नकारा

आधार पंजीकरण के लिए उंगलियों के निशान देता एक व्यक्ति
एप्पल और सैमसंग ने सुरक्षा संबंधी सवालों के चलते भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई तस्वीर: Harish Tyagi/dpa/picture alliance

भारत सरकार ने इस साल जनवरी में एप्पल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों को निजी तौर पर प्रस्ताव दिया था कि वे अपने स्मार्टफोनों में सरकारी आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करके देने पर विचार करें. स्मार्टफोन कंपनियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भारत की इलेक्ट्रॉनिक और आईटी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘एमएआईटी’ के पत्रों को देखने के बाद यह जानकारी दी है. 

एमएआईटी की ओर से 13 जनवरी को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल के मुताबिक, कंपनियों ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए चिंता जताई थी कि इससे उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी. उद्योग के दो सूत्रों के मुताबिक, एप्पल और सैमसंग ने सुरक्षा संबंधी सवालों के चलते भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई थी. कंपनियों ने कहा था कि इसका पालन करने पर उन्हें भारत और विदेशी बाजारों के लिए अलग-अलग असैंबली लाइन चलानी पड़ेगीं. 

रॉयटर्स के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार अभी भी इस योजना पर काम कर रही है या इसे रद्द कर दिया गया है. भारत के आईटी मंत्रालय और विभिन्न कंपनियों ने रॉयटर्स के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है. वहीं, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक अपार गुप्ता ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से परेशानी भरा बताया है. 

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निखिल रंजन
निखिल रंजन निखिल रंजन एक दशक से डॉयचे वेले के लिए काम कर रहे हैं और मुख्य रूप से राजनैतिक विषयों पर लिखते हैं.
आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.