यूएन में भारत ने कहा वैश्विक कार्रवाई से आतंकवाद को हराया जा सकता है | दुनिया | DW | 02.12.2020
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दुनिया

यूएन में भारत ने कहा वैश्विक कार्रवाई से आतंकवाद को हराया जा सकता है

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव ने कहा है कि आतंकवाद दुनिया के सामने एक बड़ा संकट है. उन्होंने दुनिया को साथ मिलकर इससे लड़ने और हराने का आग्रह किया है.

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित दुनिया सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रों को अपने आप को फिर से संगठित करने की जरूरत है. द्वितीय विश्व युद्ध की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति के मौके पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव आशीष शर्मा ने कहा कि आतंकवाद समकालीन दुनिया में युद्ध छेड़ने के माध्यम के रूप में सामने आया है और इससे पृथ्वी पर उसी तरह का नरसंहार होने का खतरा है जो दोनों विश्व युद्धों के दौरान देखा गया था. शर्मा ने कहा, "आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इसे सिर्फ वैश्विक कार्रवाई से हराया जा सकता है."

भारत ने यूएन में देशों से अपील की कि वे युद्ध छेड़ने के समकालीन प्रारूपों से लड़ने और दुनिया में अधिक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खुद को समर्पित करें. हालांकि भारत ने इस मौके पर किसी देश का नाम नहीं लिया है, लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि भारत पाकिस्तान पर देश में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाता आया है. इससे पहले भी भारत यूएन के मंच का इस्तेमाल  आतंकवाद के मुद्दे को जोर शोर से उठाने के लिए कर चुका है.

शर्मा ने विशेष बैठक में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत के योगदान का जिक्र किया और बताया कि कैसे औपनिवेशिक शासन के अधीन होने के बाजवूद भारत के 25 लाख जवान द्वितीय विश्व युद्ध में लड़े. उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध में सेवा देते हुए भारत के 87,000 जवान मारे गए या फिर लापता हो गए और लाखों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए.

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