किशोरों ने ′खोजी′ सॉफ्ट ड्रिंक से पॉजीटिव कोविड रिजल्ट की तरकीब | विज्ञान | DW | 08.07.2021
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विज्ञान

किशोरों ने 'खोजी' सॉफ्ट ड्रिंक से पॉजीटिव कोविड रिजल्ट की तरकीब

वैज्ञानिकों के मुताबिक कुछ किशोरों ने सॉफ्ट ड़्रिंक का इस्तेमाल करके कोविड-19 टेस्ट के फर्जी पॉजिटिव रिजल्ट पाने की एक तरकीब खोज ली है जो स्कूलों में तेजी से फैल रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले महीने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कुछ वीडियो के साथ #fakecovidtest हैश टैग देखकर वैज्ञानिक चौंक गए. इन वीडियो में कुछ किशोरों को सॉफ्ट ड्रिंक के जरिए रैपिड एंटिजेन टेस्ट के नमूनों पर लगाते देखा गया. ये वीडियो लाखों बार देखे गए.

मार्च के महीने से ब्रिटेन के स्कूलों में उन छात्रों को हफ्ते में दो बार कोविड टेस्ट कराने को कहा गया था, जिनके अंदर कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं थे. यदि एक भी मामला पॉजिटिव पाया जाता तो पूरी क्लास को घरों में एकांतवास में रहन पड़ता. इसी के बाद छात्रों को सॉफ्ट ड्रिंक्स का इस्तेमाल कर फर्जी पॉजीटिव टेस्ट करते पाया गया.

कैसे हुआ शोध?

जब इस बारे में ब्रिटेन की एक वेबसाइट ने खबर छापी तो लिवरपूल यूनिवर्सिटी का ध्यान इस ओर गया और उन्होंने शोध करना शुरू किया. शोधकर्ता देखना चाह रहे थे कि सॉफ्ट ड्रिंग या आर्टिफिशल स्वीटनर्स का कोविड टेस्ट के लिए गए नमूनों पर कोई असर होता है या नहीं.

वैज्ञानिकों ने 14 सॉफ्ट ड्रिंक्स और चार आर्टिफिशल स्वीटनर प्रयोग किए, जिन पर फर्जी एसएआरएस-सीओवी-2 एंटीजन पैदा करने का संदेह था. शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया कि सभी चार स्वीटनर का कोविड टेस्ट नेगेटिव आया.

देखिए, कुत्ते-बिल्लियों को भी हो सकता है कोविड

पानी का टेस्ट भी नेगेटिव आया. लेकिन प्रयोग की गईं 14 में से 10 सॉफ्ट ड्रिंक्स के रिजल्ट पॉजीटिव आए. हालांकि इनकी प्रबलता कम या ज्यादा पाई गई. medRxiv में छपे इस शोध के नतीजों में वैज्ञानिकों ने कहा है कि इन कोविड के असली नतीजों में और इन सॉफ्ट ड्रिंक्स में कोई सीधा संबंध नहीं था. इन परीक्षणों के लिए किसी इन्सान पर प्रयोग नहीं किए गए थे.

क्या रहे नतीजे?

वैज्ञानिकों ने पाया है कि कई सॉफ्ट ड्रिंक्स को एसएआरएस-सीओवी-2 का फर्जी पॉजीटिव टेस्ट पाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अपने शोध के नतीजों के आधार पर वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि कोविड टेस्ट को सुबह के वक्त करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "सुबह के वक्त बिना कुछ खाए पिये यह टेस्ट किया जाना चाहिए और जहां तक हो सके टेस्ट के दौरान निगरानी की जानी चाहिए.”

इस शोध के नतीजों की अभी अन्य वैज्ञानिकों द्वारा समीक्षा नहीं की गई है और शोधकर्ताओं ने कहा है कि इन नतीजों का किसी भी चिकीत्सीय तरीके से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.

वीके/सीके (रॉयटर्स)

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