भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर: मोदी
प्रकाशित २९ अगस्त २०२५आखिरी अपडेट २९ अगस्त २०२५
पोर्न वेबसाइट पर तस्वीरें डाले जाने पर जॉर्जिया मेलोनी ने क्या कहा
इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार, 29 अगस्त को महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सहमति के बिना ऑनलाइन शेयर की गई प्राइवेट फोटो की तुरंत रिपोर्ट करें. यह घटना तब सामने आई जब पता चला कि खुद प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया गया था. मेलोनी ने कोरिरे डेला सेरा अखबरा से कहा, "जो कुछ हुआ है, उससे मैं निराश हूं." उन्होंने कहा कि उनके और विपक्षी नेता एली श्लेइन सहित कई हाई-प्रोफाइल महिलाओं की तस्वीरों को एक पोर्नोग्राफिक वेबसाइट पर बदल कर डाला गया था.
राजनीतिक रैलियों और सोशल मीडिया अकाउंट्स से चुराई गई इन तस्वीरों को बदलकर अपलोड किया गया था. फिका नामक जिस प्लेटफॉर्म पर ये तस्वीरें अपलोड की गई थीं, बंद होने से पहले इसके 7 लाख से ज्यादा यूजर्स थे. मेलोनी ने उन सभी महिलाओं के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया, जिन्हें निशाना बनाया गया है.
एएफपी के अनुसार, उन्होंने कहा, "यह देखना निराशाजनक है कि 2025 में भी, ऐसे लोग हैं जो गुमनामी या कीबोर्ड के पीछे छिपकर एक महिला की गरिमा को रौंदना और उसे सेक्सिस्ट और अश्लील अपमान का शिकार बनाना सामान्य और वैध मानते हैं." उन्होंने ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पूरी सख्ती के साथ जल्द से जल्द दंडित करने की बात कही.
भारत की जीडीपी में 7.8% की वृद्धि, बना सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
भारत के लिए एक अच्छी आर्थिक खबर आयी है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.8 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि (6.3 प्रतिशत) से 1.5 फीसदी ज्यादा है. यह अनुमानित 6.5 फीसदी की वृद्धि दर से भी काफी बेहतर है.
पिछले वित्तीय वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी 6.5 प्रतिशत बढ़ी थी. 2025-2026 की समान तीन महीने की अवधि में यह वृद्धि पिछले पांच तिमाहियों में सबसे तेज है. इससे पहले, जनवरी-मार्च 2024 की तिमाही में सबसे ज्यादा 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. इस तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि 5.2 प्रतिशत रही, जिससे भारत एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन के कारण हुई है. सेवा क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले साल यह 6.8 प्रतिशत थी. इसी तरह, कृषि क्षेत्र में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल 1.5 प्रतिशत थी. हालांकि, निर्माण क्षेत्र की वृद्धि पिछले साल के 10.1 प्रतिशत की तुलना में इस साल धीमी होकर 7.6 प्रतिशत रही.
भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर: मोदी
शुक्रवार को जापान दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ बातचीत की. मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा, "मेट्रो से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्ट-अप तक, हर क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी आपसी विश्वास का प्रतीक बन गई है."
मोदी ने जापान के मैन्युफैक्चरर्स को भारत में आकर काम करने का न्योता दिया. उन्होंने कहा, "मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि आइए, हम ‘भारत में बनाएं, विश्व के लिए बनाएं."
दो दिवसीय यात्रा पर टोक्यो पहुंचे मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ शिखर वार्ता भी की. मोदी और इशिबा ने 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए मुलाकात की.
आर्थिक संकट में जर्मनी के ज्यादातर अस्पताल: सर्वे
म्यूनिख स्थित कंसल्टेंसी फर्म रोलांड बेर्गर के एक सर्वे के अनुसार, जर्मनी के चार में से तीन अस्पतालों को पिछले साल आर्थिक नुकसान हुआ. यह स्थिति विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों के लिए चिंताजनक है, जहां लगभग 90 फीसदी अस्पताल घाटे में चल रहे हैं. रोलांड बेर्गर में स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ पीटर ने कहा, "नुकसान में चल रहे अस्पतालों की संख्या बढ़ती जा रही है और लाभ कमाने वाले अस्पतालों की संख्या घट रही है."
फर्म ने अपने वार्षिक अध्ययन के लिए 850 अस्पताल के अधिकारियों और प्रबंधकों का सर्वे किया. कुछ मामलों में घाटा बहुत गंभीर हो गया है. पीटर ने कहा, "घाटे कुछ अस्पतालों में 10 करोड़ (11.6 करोड़ डॉलर) यूरो से भी ज्यादा हैं."
अध्ययन के अनुसार, कई अस्पतालों को उम्मीद है कि निकट भविष्य में स्थिति और खराब होगी, हालांकि लंबी अवधि में कुछ सुधार हो सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे फिर से लाभ कमाना शुरू कर देंगे.
जर्मनी में बेरोजगारी दस साल में पहली बार 30 लाख के पार
जर्मनी में बेरोजगारी का आंकड़ा एक दशक में पहली बार 30 लाख के पार पहुंच गया है. संघीय रोजगार एजेंसी (बीए) ने शुक्रवार, 29 अगस्त को बताया कि अगस्त में बेरोजगारों की संख्या 46,000 बढ़कर 30.25 लाख हो गई, जो फरवरी 2015 के बाद सबसे ज्यादा है. उस समय यह संख्या 30.17 लाख थी. वहीं बेरोजगारी की दर 0.1 अंक बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई है.
बीए की प्रमुख एंड्रिया नाहल्स ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के कारण, बेरोजगारी 30 लाख से ऊपर चली गई है. उन्होंने बताया कि कई कंपनियां छुट्टियों के बाद ही नई भर्तियां करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि श्रम बाजार अभी भी हाल की आर्थिक मंदी से प्रभावित है. उन्होंने कहा, "हम श्रम बाजार में एक निचले बिंदु पर पहुंच गए हैं. हम अभी तक बाहर नहीं निकले हैं."
नाहल्स के अनुसार, सितंबर में मौसमी सुधार से बेरोजगारी कम होने की उम्मीद है, हालांकि सर्दियों में यह आंकड़ा फिर से 30 लाख को पार कर सकता है.
भारत-कनाडा रिश्तों में सुधार की कोशिश, नई दिल्ली-ओटावा में नए उच्चायुक्त नियुक्त
कनाडा और भारत ने गुरुवार, 28 अगस्त को एक-दूसरे के देशों में नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की घोषणा की है. कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस आरोप के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी आ गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ है. इस आरोप को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद कनाडा ने छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया, भारत ने जवाब में छह कनाडाई राजनयिकों को वापस भेज दिया था.
दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य होने की शुरूआत इस साल जून में तब हुई जब जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात हुई. दोनों नेताओं की मुलाकात में राजनयिकों की नियुक्ति पर सहमति बनी.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि वरिष्ठ राजनयिक दिनेश के. पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने घोषणा की कि क्रिस्टोफर कूटर भारत में देश के नए उच्चायुक्त होंगे.
थाईलैंड की अदालत ने प्रधानमंत्री पायेतोंगतर्न शिनावात्रा को पद से हटाया
थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने शुक्रवार, 29 अगस्त को प्रधानमंत्री पायेतोंगतर्न शिनावात्रा को उनके पद से हटा दिया है. अदालत ने कहा कि हालांकि उन्होंने कोई बेईमानी नहीं दिखाई और आवश्यक ईमानदारी का प्रदर्शन किया, फिर भी उन्होंने कंबोडिया के हुन सेन के साथ एक लीक हुए फोन कॉल के दौरान नैतिक नियमों का उल्लंघन किया.
एक फोन कॉल में, पायेतोंगतर्न और हुन सेन ने एक सीमा विवाद पर चर्चा की थी, जो बाद में घातक झड़पों में बदल गया था. 38 वर्षीय पायेतोंगतर्न, जो विवादास्पद अरबपति और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की बेटी हैं, को 36 सीनेटरों की याचिका के बाद जुलाई में पद से निलंबित कर दिया गया था.
उन पर खराब नैतिक मानकों, बेईमानी और राष्ट्र के लिए खड़े होने में विफल रहने का आरोप लगाया गया था. लीक हुई कॉल में पायेतोंगतर्न ने हुन सेन को "अंकल" कहकर संबोधित किया, जबकि एक थाई सैन्य कमांडर को अपना प्रतिद्वंद्वी बताया.
पायेतोंगतर्न पिछले 17 वर्षों में थाईलैंड की संवैधानिक अदालत द्वारा पद से हटाई जाने वाली पांचवीं प्रधानमंत्री बन गई हैं. इस अदालत में जिन छह नेताओं पर मुकदमा चला है, उनमें से केवल पायेतोंगतर्न के पिता थाकसिन ही बच पाए हैं. थाकसिन, जो 15 साल के निर्वासन के बाद 2023 में देश लौटे थे, को व्यापक रूप से पायेतोंगतर्न की सरकार के पीछे की मुख्य ताकत के रूप में देखा जाता था.
अमेरिका ने कम कीमत वाले पार्सल पर खत्म की टैरिफ छूट
अमेरिका ने विदेशों से भेजे जाने वाले कम कीमत वाले सामानों पर दी जाने वाली टैरिफ छूट को समाप्त कर दिया है. इसका मतलब है कि अब शुक्रवार, 12:01 बजे (EDT) से अमेरिका भेजे गए सभी सामानों पर शुल्क लगेगा.
"डी मिनिमिस" छूट, जो 1938 से लागू थी, 800 डॉलर या उससे कम मूल्य के सामान को बिना किसी शुल्क के अमेरिका भेजने की अनुमति देता था. अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, इस छूट के तहत अमेरिका में प्रवेश करने वाले पैकेजों की संख्या 2014 में 14 करोड़ से बढ़कर 2024 तक 1.36 अरब हो गई थी.
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने इस छूट को समाप्त करने के कई कारण बताए हैं. उनका मानना है कि कम कीमत वाले आयात की वजह से अमेरिकी खुदरा विक्रेताओं को नुकसान पहुंचता है, क्योंकि विदेशी कंपनियां टैरिफ से बचकर सस्ते सामान बेचती हैं. इसके अलावा, अधिकारियों का तर्क है कि इस छूट का इस्तेमाल ड्रग्स, जैसे कि फेंटेनाइल, और अन्य अवैध या असुरक्षित वस्तुओं की तस्करी के लिए किया जा रहा था. राष्ट्रपति ट्रंप ने फरवरी में चीन के लिए इस छूट को पहले ही समाप्त कर दिया था, और अब यह सभी देशों के लिए खत्म कर दी गई है.
पाकिस्तान के पंजाब में बाढ़ का कहर, 10 लाख लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया
पाकिस्तानी अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि इस सप्ताह पंजाब प्रांत में दस लाख से ज्यादा लोगों को घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, क्योंकि चार दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ ने सैकड़ों गांवों में तबाही मचाई है और महत्वपूर्ण फसलें जलमग्न हो गई हैं.
पंजाब के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि मूसलाधार मानसूनी बारिश और पड़ोसी देश भारत द्वारा अपने बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण पूर्वी प्रांत में बहने वाली तीन नदियां उफान पर आ गईं, जिससे अधिकारियों को कुछ स्थानों पर नदी के किनारों को तोड़ना पड़ा, जिस कारण 1,400 गांवों में बाढ़ आ गई.
अधिकारियों का कहना है कि पंजाब में बाढ़ की स्थिति और भी बदतर तब हो गई जब भारतीय बांधों से पानी छोड़ा गया. जून के आखिर से अब तक पाकिस्तान में बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 800 लोगों की मौत हो चुकी है.
दिल्ली की हवा कम कर रही है जीवन के 8 साल: रिपोर्ट
शिकागो यूनिवर्सिटी के ऊर्जा नीति संस्थान (EPIC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में रहने वाले लोग शहर की जहरीली हवा के कारण अपने जीवन के 8 साल से ज्यादा खो रहे हैं. एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) नामक इस अध्ययन में पाया गया है कि अगर दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों तक सुधारा जाए, तो एक औसत दिल्लीवासी 8.2 साल ज्यादा जी सकता है.
औसतन, एक भारतीय नागरिक अगर प्रदूषण का स्तर कम हो जाए तो 3.5 साल ज्यादा जी सकता है. उत्तर भारत के गंगा-मैदानी इलाकों में, जो भारत का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है, वहां के निवासी अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों को पूरा करे तो पांच साल अधिक जी सकते हैं.
उत्तरी मैदानी इलाकों के अलावा, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और झारखंड को देश के सबसे प्रदूषित राज्यों के रूप में पहचाना गया है. इन राज्यों में रहने वाले लोग औसतन 3.7 साल अधिक जी सकते हैं, अगर प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जाए. वैश्विक स्तर पर, अगर प्रदूषण को डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुसार स्थायी रूप से कम किया जाए, तो दुनिया भर में एक औसत व्यक्ति 1.9 साल का जीवन लाभ प्राप्त कर सकता है.
मैर्त्स और माक्रों ने फ्रांस-जर्मनी मंत्रिस्तरीय परिषद का नेतृत्व किया
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों शुक्रवार, 29 अगस्त को टूलोन में फ्रांसीसी-जर्मन मंत्रिस्तरीय परिषद की सह-अध्यक्षता करेंगे. इस बैठक में आर्थिक और सुरक्षा नीति पर बातचीत मुख्य केंद्र बिंदु है.
इस साल जर्मनी में सरकार बदलने के बाद यह पहली बैठक है. इसमें दोनों देशों के 10-10 मंत्री हिस्सा लेंगे. मैर्त्स और माक्रों ने गुरुवार शाम को ही माक्रों से मुलाकात की थी. माक्रों ने कहा कि पूर्व चांसलर ओलाफ शॉल्त्स के साथ संबंधों में कभी-कभी मुश्किलें आती थीं, लेकिन नई साझेदारी यूरोप को आगे बढ़ा सकती है. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि आर्थिक, व्यापार और मुद्रा के क्षेत्रों में एक मजबूत यूरोप बनाने के लिए फ्रांसीसी-जर्मन जोड़ी अब पूरी तरह से समन्वित है."
मैर्त्स ने भी दोनों देशों की साझेदारी के महत्व पर जोर दिया और इसे यूरोपीय संघ के भीतर एक धुरी बताया. उन्होंने कहा, "जर्मनी और फ्रांस यूरोपीय संघ में, इस महाद्वीप पर एक केंद्रीय भूमिका निभाते हैं." यह फ्रांसीसी-जर्मन मंत्रिस्तरीय परिषद 2003 में बनाई गई थी. इसका उद्देश्य यूरोपीय संघ, रक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश मामलों पर नीतियों को संरेखित करना है. यह बैठक फ्रांस में चल रहे राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में हो रही है, जहां प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरोउ को 8 सितंबर को विश्वास मत का सामना करना पड़ सकता है.
शरीर में हर दिन जा रहे हैं 68,000 माइक्रोप्लास्टिक कण: रिपोर्ट
एक नए शोध के अनुसार, लोग हर दिन सांस के साथ बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक के कणों को अंदर लेते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं. इस शोध से पता चलता है कि ये कण स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा हैं, जिसके बारे में अब तक बहुत कम जानकारी थी.
द गार्जियन की खबर के अनुसार, प्लोस वन पत्रिका में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक इंसान हर दिन 68,000 तक छोटे प्लास्टिक कणों को सांस के साथ अंदर ले सकता है. पिछले अध्ययनों में हवा में मौजूद बड़े माइक्रोप्लास्टिक कणों की पहचान की गई थी, लेकिन वे स्वास्थ्य के लिए उतने खतरनाक नहीं थे क्योंकि वे हवा में अधिक समय तक नहीं रहते और फेफड़ों में गहराई तक नहीं जाते.
ये छोटे कण 1 से 10 माइक्रोमीटर के होते हैं, जो मानव बाल की मोटाई का लगभग सातवां हिस्सा हैं. ये कण शरीर में आसानी से फैल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा होता है. शोधकर्ताओं ने लिखा, "ये निष्कर्ष बताते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक सांस के जरिए अंदर लेने से होने वाले स्वास्थ्य प्रभाव जितना हम सोचते हैं, उससे कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं."
बिहार में 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार' योजना को मिली मंजूरी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 29 अगस्त को राज्य के प्रत्येक परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता देने वाली एक योजना शुरू करने की घोषणा की. इस योजना के तहत सितंबर 2025 से ही महिलाओं के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने शुरू हो जाएंगे.
नीतीश कुमार ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ये एक "अभूतपूर्व निर्णय" है, जिसके "सकारात्मक दूरगामी परिणाम" होंगे. नीतीश ने लिखा, "हमारी सरकार ने आज कैबिनेट की बैठक में महिलाओं के रोजगार के लिए एक नई योजना ’मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की स्वीकृति दी है. इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देना है."
डायमंड लीग फाइनल में नीरज चोपड़ा दूसरे स्थान पर
भारत के जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को ज्यूरिख में आयोजित डायमंड लीग फाइनल 2025 में लगातार तीसरी बार दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.57 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीता.
वेबर ने शुरुआत ही 91.37 मीटर के शानदार थ्रो से की और उसके बाद 91.57 मीटर का थ्रो करके अपना पहला डायमंड लीग खिताब जीता. दूसरी ओर, नीरज चोपड़ा ने 84.35 मीटर के थ्रो के साथ शुरुआत की. हालांकि, वह ज्यादातर समय तीसरे स्थान पर थे, लेकिन उन्होंने अपने अंतिम प्रयास में 85.01 मीटर का थ्रो करके त्रिनिदाद और टोबैगो के केशोरन वालकॉट (84.95 मीटर) को पीछे छोड़ दिया और दूसरा स्थान हासिल किया.
मथुरा और काशी के आंदोलनों में भाग नहीं लेगा संघ: मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार, 28 अगस्त को कहा कि संघ किसी भी मंदिर आंदोलन में भाग नहीं लेगा, चाहे वह मथुरा का हो या काशी का. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर स्वयंसेवक (आरएसएस के स्वयंसेवक) 'मंदिर निर्माण' में शामिल होना चाहते हैं, तो संगठन उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकेगा.
उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट कर दूं कि संघ ने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और उसे चरमोत्कर्ष तक पहुंचाया, लेकिन अब वह मंदिरों से जुड़े किसी भी अन्य आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेग ...लेकिन मथुरा और काशी के संबंध में हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि समाज के मन में काशी, मथुरा और अयोध्या का गहरा महत्व है—दो जन्मभूमि हैं और एक निवास स्थान."