निकोलस मादुरो: बस ड्राइवर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने का सफर
ट्रंप ने बताया है कि यूएस, निकोलस मादुरो को पकड़कर वेनेजुएला से बाहर ले आया. हूगो चावेज के निधन के बाद 2013 में मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने. माना जा रहा था कि मौजूदा कार्यकाल में वह कम-से-कम 2031 तक पद पर रहेंगे.

छात्र राजनीति में हिस्सेदारी
निकोलस मादुरो की पेशेवर जिंदगी मानो राजनीति के साथ-साथ शुरू हुई. साल 1962 में वह वेनेजुएला की राजधानी काराकस में पैदा हुए. उनके पिता एक यूनियन लीडर थे. स्कूली दौर में मादुरो का भी छात्र राजनीति से ताल्लुक रहा. वह हाई स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष थे.
बस ड्राइवर और यूनियन लीडर
करियर के शुरुआती दिनों में मादुरो ड्राइवर थे. वह काराकस में बस चलाया करते थे. साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला की तत्कालीन पार्टी 'सोशलिस्ट लीग' भी जॉइन की. ब्रिटिश अखबार 'गार्डियन' के आर्काइव्स के मुताबिक, मादुरो जिस 'काराकस मेट्रो कंपनी' में बस चालक थे वहां यूनियन बनाना प्रतिबंधित था. यहां मादुरो ने एक अनौपचारिक यूनियन बनाया, जो कंपनी के शुरुआती लेबर सिंडिकेट्स में से एक था.
हूगो चावेज और उनका एमवीआर-200
रिवॉल्यूशनरी बोलीवेरियन मूवमेंट-200, हूगो चावेज के शुरू किए गए सैन्य अभियान का नागरिक रूप था. हूगो और उनके साथी सैन्य अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से एमवीआर-200 ग्रुप बनाया. फरवरी 1992 में, चावेज के नेतृत्व में ग्रुप ने तख्तापलट की नाकाम कोशिश की. चावेज को जेल हुई, लेकिन वह लोकप्रिय होते गए.
एमवीआर-200 और मादुरो
हूगो चावेज की मुहिम 'बोलीवारियानिजम' भी लोकप्रिय होती गई. यह दक्षिणी अमेरिकी स्वतंत्रता अभियान में मुख्य भूमिका निभाने वाले सिमोन बोलीवर से प्रेरित थी. 1990 के दशक के शुरुआती सालों में मादुरो भी एमवीआर-200 के सदस्य बन गए. ये लोग हूगो को जेल से छुड़वाने के लिए अभियान चलाया करते थे.
मूवमेंट ऑफ दी फिफ्थ रिपब्लिक
जेल से छूटकर, साल 1997 में हूगो चावेज ने 'फिफ्थ रिपब्लिक मूवमेंट' (एमवीआर) नाम की एक पार्टी बनाई. इसमें मादुरो ने भी सहयोग दिया. हूगो ने 1998 के चुनाव में हिस्सा लिया और 56 फीसदी वोट जीतकर राष्ट्रपति बन गए. साल 1999 में मादुरो को संविधान सभा में चुना गया. इस असेंबली पर देश के लिए नया संविधान बनाने का दायित्व था.
हूगो चावेज ने मादुरो को बनाया विदेश मंत्री
साल 2000 में मादुरो नेशनल असेंबली में चुने गए. इसके स्पीकर भी रहे. फिर 2006 में हूगो ने उन्हें विदेश मंत्री बनाया. खबरों के मुताबिक, विदेश मंत्री रहते हुए मादुरो ने एक सम्मेलन के दौरान तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री कोडोंलिजा राइस को 'हिपोक्रैट' बताया था. साल 2012 में हूगो ने उन्हें उपराष्ट्रपति भी चुना. उन दिनों हूगो की सेहत ठीक नहीं थी, उन्हें कैंसर था.
हूगो ने बढ़ाया मादुरो का नाम
कैंसर के अपने ऑपरेशन के बाद, दिसंबर 2012 में हूगो ने अगले राष्ट्रपति के तौर पर मादुरो के नाम की अनुशंसा की. टीवी पर प्रसारित अपने भाषण में हूगो ने जनता से कहा कि वे निकोलस मादुरो को अपना राष्ट्रपति चुनें. फिर 5 मार्च 2013 को मादुरो ही थे, जो हूगो के निधन की सूचना जनता को देने आए. हूगो के देहांत के बाद फौरी तौर पर मादुरो को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया.
अप्रैल 2013 में चुनाव जीतकर बने राष्ट्रपति
अप्रैल 2013 में चुनावी जीत के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने. हालांकि, जीत का अंतर बहुत मामूली था. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हेनरिके केप्रिलेस रादोंस्की ने फिर से वोटों की गिनती कराने की मांग की. मगर, देश की मुख्य न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि मतों की हाथ से दोबारा गिनती मुमकिन नहीं है.