गंजे होने का दर्द क्यों नहीं समझते लोग | समानता | DW | 29.03.2022

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समानता

गंजे होने का दर्द क्यों नहीं समझते लोग

पुरुषों में गंजेपन की समस्या आम है लेकिन महिलाएं कम ही गंजी दिखती हैं. उस पर भी अगर किसी बीमारी के कारण बाल खोने वाली महिलाओं का दर्द ना समझे और कोई मजाक उड़ाए तो कैसा लगेगा.

बालों को गिरना किसी को भी उदास कर जाता है, इन्हें खोना तो कइयों का दिल ही तोड़ दे. ज्यादातर पुरुषों में इसका कारण जेनेटिक होता है लेकिन कई बीमारियों के कारण भी लोगों के सिर के सारे बाल चले जाते हैं. कैंसर का इलाज कराने वालों को अकसर अपना सिर मुंडवाना पड़ता है. यही सब जब किसी महिला के साथ होता है उसका गंजापन समाज में कहीं ज्यादा शर्म और दर्द का कारण बन जाता है क्योंकि समाज के बड़े हिस्से के लिए किसी महिला को बालों के बिना सुंदर छोड़िए सामान्य मानना भी कठिन है.

ऑस्कर ने दिलाया ध्यान

ऐसे अनुभवों से गुजरने वाली हॉलीवुड कलाकार जेडा पिंकेट स्मिथ और कुछ और सेलिब्रिटी इस बारे में अपना दर्द बयान कर चुकी हैं. ऑस्कर समारोह में दुनिया ने इसकी झलक देखी. एक्टर विल स्मिथ अपनी पत्नी जेडा के गंजेपन को लेकर किए गए मजाक पर ऐसा भड़के कि अपना आपा खोकर चुटकुला सुनाने वाले मेजबान क्रिस रॉक पर हाथ उठा दिया. 

जेडा पिंकेट स्मिथ ने सबसे पहले 2018 में अपनी बीमारी के बारे में खुल कर बात की थी. उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उनके बाल गिरते जाने की वजह खोजी तो एलोपेशिया नाम की बीमारी का पता चला. एक्टर और डायरेक्टर जेडा पिंकेट स्मिथ सोशल मीडिया पर 'रेड टेबिल टॉक' नाम से अपना शो चलाती हैं. इस बारे में शो पर बोलते हुए उन्होंने कहा था, "वह मेरे जीवन का एक ऐसा वक्त था जब मैं सचमुच डर से कांप रही थी." अपने अनुभव को याद करते हुए वह कहती हैं कि "मैंने सोचा, 'हे भगवान. क्या मैं गंजी हो रही हूं?"

Oscars - 94. Verleihung der Academy Awards | Will Smith und Jada Pinkett Smith

ऑस्कर समारोह में जेडा पिंकेट स्मिथ, पति विल स्मिथ के साथ.

खुल कर बोलने लगी हैं हस्तियां

जैसे जैसे हॉलीवुड में महिलाओं की सुंदरता के मानदंड स्वस्थ हो रहे हैं, ज्यादा से ज्यादा कलाकार बालों को खोने का दर्द खुल कर बयान करने लगी हैं. कुछ मशहूर हस्तियां अपने गंजेपन का जीवन के दूसरे पहलुओं पर पड़ने वाले असर के बारे में बात करने लगी हैं लेकिन वह काफी नहीं है. ज्यादा तनाव में रहने, मां बनने के बाद हॉर्मोंस के ऊपर नीचे होने और कोविड से संक्रमित होने के मामलों में भी कई महिलाओं में गंजेपन की शिकायत आती है.

अभिनेत्री सलमा ब्लेयर ने बच्चे को जन्म देने के बाद 2011 में एक लोकप्रिय अंग्रेजी पत्रिका पीपल से बातचीत में कहा था, "यह कोई ग्लैमरस नहीं लगता लेकिन सच है: मुझे नहाने में बहुत समय लगता है ताकि मैं सिर से गिरे बालों को इकट्ठा कर के फेंक सकूं, ताकि नाली ना जाम हो जाए. बाकी हिरोइनें इस बारे में कभी बात क्यों नहीं करतीं?" 

वहीं, कोरोना से ठीक होने के बाद एलीसा मिलानो ने बताया कि कैसे इस वायरस के संक्रमण ने उनके बाल गिरा दिए. अपनी नजरों में अपनी छवि बदलने की बात करते हुए वह कहती हैं, "यह बहुत कठिन है, खासतौर पर जब आप एक एक्टर हों और दमकती त्वचा और लंबे, रेशमी बाल आपकी पहचान से जुड़ी बेहद अहम बातें हों."

एक और हॉलीवुड अभिनेत्री रिकी लेक ने 2020 में इंस्टाग्राम पर लिखा कि बाल गिरने की समस्या उन्होंने पूरी जिंदगी झेली है. उन्होंने लिखा, "यह हिला कर रख देता है, शर्मिंदगी का कारण बनता है, दर्दनाक, डराने वाला, उदास करने वाला और अकेला महसूस कराने वाला अनुभव होता है. कभी कभी तो मुझे इसके कारण अपनी जान ले लेने के भी ख्याल आ चुके हैं."

एलोपेशिया के बारे में जानना

अमेरिका में डेमोक्रैटिक पार्टी की सांसद अयाना प्रेसली ने भी 2020 में अपनी हेल्थ कंडीशन का पता चलने पर ट्विटर पर इसे शेयर किया. उन्होंने लिखा, "आइए बात करते हैं #alopecia के बारे में." उन्होंने लिखा, "हमारा परिवार हमें देखता है सबसे कमजोर पलों में सबसे मुश्किल पलों में. मैं उनकी प्रशंसा करना चाहूंगी जो हमें उन सबसे कमजोर पलों में संभालते हैं. वे हमें देखते हैं पूरी तरह से."

ऑस्कर जीतने वाली अभिनेत्री वायोला डेविस ने एक इंटरव्यू में बताया है कि वे खुद भी एलोपेशिया की शिकार हैं और उन्होंने अपने गंजोपन को विग से छिपा कर रखने की कोशिश की. वह कहती हैं, "मैं घर में भी विग पहन कर रहती थी. एक विग थी जो मैं किसी इवेंट्स में पहन कर जाती थी. एक विग थी जो मैं वर्कआउट के समय पहनती थी." वायोला किसी को भी अपने असली बाल नहीं दिखाती थीं. लेकिन पिछले एक दशक में वायोला खुद भी इस परेशानी पर खुल कर बोलने लगी हैं. यहां तक कि एक फिल्म में भी वे अपना विग हटा कर असली बाल और सिर दिखा चुकी हैं. 

बीमार का मजाक नहीं उससे सहानुभूति

नेशनल एलोपेशिया एरियाटा फाउंडेशन (NAAF) ने ऑस्कर समारोह के विवाद के बाद अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस स्थिति के बारे में समझने की कोशिश करनी चाहिए. फाउंडेशन ने साफ किया कि एलोपेशिया एरियाटा ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के कारण होने वाला एक खास किस्म का गंजापन होता है, जिसमें बाल गुच्छे के गुच्छे गिरने लगते हैं. संस्थान ने बताया कि दुनिया भर में करीब 14.7 करोड़ लोग इससे पीड़ित हैं, जिनमें से 70 लाख लोग केवल अमेरिका में हैं.

इस बीमारी को लेकर लोगों से सहानुभूति रखने की एक और वजह ये है कि ना तो इसका कोई इलाज है, ना ही देखभाल से रोकथाम कर पाने का कोई तरीका. इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती क्योंकि पुरुषों के गंजेपन की तरह यह जेनेटिक नहीं होता. हालांकि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक स्तर पर भी इसका बोझ पड़ता है. ये किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है और थोड़े समय में ठीक हो सकता है वरना जीवन भर भी चल सकता है. ऐसे में इससे प्रभावित लोगों, खासकर उन महिलाओं के बारे में ज्यादा संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है जिससे पहले से ही इस कंडीशन का असर झेल रही महिलाएं और भी ज्यादा भेदभाव, कलंक और मजाक की पात्र ना बनाई जाएं.

आरपी/एनआर (एएफपी)