रासायनिक संकेत से पता चलेगा टिड्डी दल का | विज्ञान | DW | 17.08.2020
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विज्ञान

रासायनिक संकेत से पता चलेगा टिड्डी दल का

टिड्डी दल के हमले को रोकने के लिए कीटनाशक से लेकर बर्तन बजाने तक के जुगाड़ अपनाए जाते हैं लेकिन फिर भी किसानों को टिड्डी दल से फसल को बचाने का अचूक इलाज नहीं मिल पाया है. अब एक शोध में एक रसायन का पता चला है.

वैज्ञानिकों ने टिड्डियों द्वारा छोड़े जाने वाले एक ऐसे केमिकल कंपाउंड (रासायनिक यौगिक) की पहचान की है जो उनके झुंड बनने में कारण बनता है. इन कीटों को रोकने के लिए संभव है कि नए तरीकों की खोज के दरवाजे खोले जा सकते हैं जो फसलों को बर्बाद होने से रोक पाएंगे. हजारों-लाखों टिड्डियां मिनटों में फसल खा जाती हैं और इंसानों के सामने खाद्य संकट पैदा होने का खतरा बना रहता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने फीरोमोन नाम के रसायन की पहचान की है. जानवरों द्वारा उत्पादित रसायन अपनी प्रजातियों के दूसरे सदस्यों के व्यवहार को प्रभावित करता है. यह दुनिया की सबसे व्यापक टिड्डियों की प्रजातियों, प्रवासी टिड्डी या फिर मौसम बदलने पर एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली टिड्डियों में पाया जाता है. शोधकर्ताओं ने इस रसायन का नाम 4-वाइनेलेनसोन (4वीए) रखा है, यह मुख्य तौर पर पिछले पैर से निकलता है और अन्य टिड्डियां अपने एंटेना से इसका पता लगा लेती हैं और गंध की पहचान करने वाले रिसेप्टर्स इसको महसूस कर लेते हैं.

Heuschreckenangriff in den Wohngebieten von Jaipur, Rajasthan

एक दल में लाखों टिड्डी शामिल होती हैं.

जर्नल नेचर पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक 4वीए उम्र या लिंग की परवाह किए बिना शक्तिशाली रूप से टिड्डियों को आकर्षित करता है. यह रसायन तब पैदा होता है जब एकांत में रहने वाली चार या पांच टिड्डियां एक साथ आ जाती हैं. रिसर्च टीम के प्रमुख ले कांग के मुताबिक, "मानव इतिहास में टिड्डी का हमला, सूखा और बाढ़ तीन प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं के रूप में मानी जाती है जो कि दुनिया भर में कृषि और आर्थिक नुकसान के लिए गंभीर कारण बनती हैं." कांग आगे कहते हैं, "सबसे व्यापक रूप से फैली और सबसे खतरनाक टिड्डी प्रजातियां दुनिया भर में कृषि के लिए गंभीर खतरा है." टिड्डी के दल में लाखों टिड्डियां शामिल होतीं हैं जो कुछ ही मिनटों में सैकड़ों एकड़ की फसल चट कर जाती हैं. एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में प्रवासी टिड्डी का दल अहम फसल जैसे कि गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा और चारे की फसल पर हमला करती है.

कांग का कहना है कि 4वीए पर और अधिक शोध की जरूरत है यह जानने के लिए कि क्या वह अन्य प्रजातियों में भी मौजूद रहता है जैसे कि रेगिस्तानी टिड्डी. मौजूदा समय में रासायनिक कीटनाशक टिड्डियों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में चिंताओं को और अधिक बढ़ाता है. 4वीए की पहचान नए तरीकों के विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती है. एक रसायन का विकास किया जा सकता है जो कि 4वीए को रोकने के लिए हो सकता है. इसके जरिए टिड्डियों को दल बनाने से रोका जा सकता है.

एए/सीके (रॉयटर्स)

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