उरी से उठते सवालों के जवाब भारत के अंदर ही हैं | दुनिया | DW | 19.09.2016
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दुनिया

उरी से उठते सवालों के जवाब भारत के अंदर ही हैं

कश्मीर में भारतीय सेना की चौकी पर एक और हमला हुआ है. पाकिस्तान पर आरोपों के साथ भारत की हताशा साफ झलकती है. भारत को अपना घर संभालने की भी जरूरत है.

भारत में एक और आतंकी हमला. एक बार फिर सेना निशाने पर है. एक बार फिर सेना खुद अपनी रक्षा करने में नाकाम रही है. यूं तो आतंकी हमले अलग अलग रूपों में दुनिया के कई देशों में हो रहे हैं, लेकिन भारत में हो रहे हमले स्थानीय मुद्दों के साथ भी जुड़े हैं. कम से कम मुंबई हमले के बाद से साफ है कि भारत न सिर्फ पाकिस्तान समर्थित हिंसा का निशाना है बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के प्रमुख निशानों में शामिल है.

यह भी पढ़ें: उरी आतंकी हमले पर क्या बोला पाकिस्तान

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के तार कहीं न कहीं शुरू से ही पाकिस्तान के साथ जुड़े रहे हैं. कम से कम उन्हें बौद्धिक जमीन देने और जमीनी प्रशिक्षण देने के मामले में. अफगानिस्तान पर तालिबान के खिलाफ कार्रवाई के बाद से अल कायदा और आईएस जैसे संगठनों ने अपने नए अड्डे तलाश लिए हैं लेकिन उनका मकसद नहीं बदला है. भारत से शुरुआत कर उन्होंने धीरे धीरे अमेरिका और पश्चिमी देशों को अपने निशाने पर ले लिया है. उनसे निबटने के लिए और गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है.

भारत पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दबाव डालने में पूरी तरह नाकाम रहा है. ये न तो सैनिक दबाव और न ही दोस्ती की पेशकशों से हो पाया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत और अन्य देशों के साथ मिलकर कोई रास्ता निकालने की जरूरत है ताकि मासूम लोगों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल करने वाले लोगों की शिनाख्त की जा सके और उनपर लगाम लगाई जा सके.

भारत को उसके अलावा भी बहुत कुछ करने की जरूरत होगी. कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव से काम चल गया था लेकिन संसद और मुंबई में हुए हमलों ने साफ कर दिया कि आतंकवादी संगठन कुछ हद तक स्वतंत्र भी हो गए हैं और भारत की परेशानी से पाकिस्तान को कोई चिंता नहीं है. उरी में हुआ आतंकी हमला भारत के लिए कई गंभीर सवाल छोड़ता है.

एक सवाल सुरक्षा बंदोबस्त का है. लगातार चल रहे खतरों की रोशनी में सेना को खुद अपनी सुरक्षा का ख्याल भी रखना होगा. इस बात की जांच होनी जरूरी है कि सेना के परिसर क्या पूरी तरह सुरक्षित हैं, क्या सेना की टुकड़ियां कार्रवाइयों के दौरान अपना खुद का ख्याल रखती हैं. यह भी निश्चित है सेना पर हमले की हिम्मत रखने वाले आतंकवादी किसी भी समय किसी दूसरी जगह भी हमला कर सकते हैं.

एक और सवाल घरेलू माहौल का भी है. हिंदूवादी संगठनों ने जिस तरह का माहौल देश के अंदर बना रखा है, उससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बहुत मदद नहीं मिल रही है. बाहरी दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए देश के अंदर सुरक्षा और एकता का माहौल जरूरी है. इसलिए मोदी सरकार को बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ देश के अंदर सौहार्द्र का माहौल बनाने की चुनौती का भी सामना करना होगा. तभी आतंकवादी मौके का फायदा उठाने में नाकाम होंगे और इस तरह के हमलों को रोका जा सकेगा.

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