बांग्लादेश की जलवायु समृद्धि योजना कितनी व्यावहारिक है? | दुनिया | DW | 08.11.2021
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

बांग्लादेश की जलवायु समृद्धि योजना कितनी व्यावहारिक है?

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से लड़ने के लिए अमीर देशों की कथित खोखली घोषणाओं की आलोचना की है. इनकी बजाय, बांग्लादेश खुद भविष्य में जीरो-कार्बन की एक योजना लेकर सामने आया है.

ग्लासगो में COP26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में, बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना ने अमीर देशों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने और कम अमीर देशों को सालाना सौ अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करने संबंधी वादे को पूरा करने का आह्वान किया है.

शेख हसीना का कहना है कि बांग्लादेश के कार्बन उत्सर्जन को ग्लोबल वॉर्मिंग के महज एक मामूली से हिस्से के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. विकसित देशों में प्रति व्यक्ति करीब 20 टन की तुलना में बांग्लादेश मौजूदा समय में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष करीब 0.3 टन कार्बन उत्सर्जित कर रहा है.

वीडियो देखें 05:51

60 साल में आधा बैंकॉक पानी में चला जाएगा

1.2 अरब लोगों की सामूहिक आबादी वाले देशों के समूह क्लाइमेट वल्नरेबल फोरम यानी सीवीएफ के लोग वैश्विक उत्सर्जन की केवल 5 फीसद कार्बन ही उत्सर्जित करते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कुछ सबसे बुरे प्रभावों को इन्हीं देशों को भुगतना पड़ता है. इन देशों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर और भीषण बाढ़, चक्रवात और गर्मी की लहरों से विस्थापन का भी खतरा है.

उदाहरण के लिए, क्लाइमेट चेंज वल्नरेबिलिटी इंडेक्स के मुताबिक, पिछले दो दशकों में चरम मौसम की घटनाओं की बात करें तो बांग्लादेश सातवां सबसे अधिक प्रभावित देश है. डीडब्ल्यू से बातचीत में अर्थशास्त्री फहमीदा खातून कहती हैं, "बांग्लादेश जैसे देशों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत ज्यादा है. यह आपदा की आशंका वाले देशों में पर्यावरण का कहर पैदा करेगा.”

आर्थिक विकास को खतरा

जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल यानी आईपीसीसी की रिपोर्ट बताती है कि यदि धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है तो आने वाले दशकों में तेज गर्मी तो पड़ेगी ही, ग्रीष्म ऋतुएं लंबी और शीत ऋतु छोटी होने लगेगी. रिपोर्ट में पाया गया है कि यदि औसत वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है, तो गर्मी का चरम कृषि और स्वास्थ्य के हानिकारक स्तर तक पहुंच जाएगा.

खातून कहती हैं, "आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट पहले ही दिखा चुकी है कि जितना सोचा गया था उससे कहीं ज्यादा खतरनाक प्रभाव है. यह आर्थिक विकास को भी पलट कर रख देगा. आर्थिक गतिविधियों को व्यापक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ेगा और आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर इसका नकारात्मक प्रभाव सबसे ज्यादा होगा.”

क्या है जलवायु समृद्धि योजना?

सीवीएफ अध्यक्ष के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में, शेख हसीना ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आर्थिक समृद्धि में बदलाव पर बातचीत शुरू की. बांग्लादेश साल 2031 तक अपनी अर्थव्यवस्था को दोगुना करके इसे 409 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहता है और खुद को मध्य आय वर्ग वाला देश बनाना चाहता है.

अक्टूबर में फाइनेंशियल टाइम्स अखबार में छपे एक लेख में उन्होंने "खोखले वादों” की बजाय "जलवायु समृद्धि योजना” की वकालत की थी. हसीना का कहना है, "बांग्लादेश जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए समाधान के मार्ग का नेतृत्व करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसा हम न केवल इसलिए करना चाहते हैं कि हम जलवायु परिवर्तन के सबसे बुरे प्रभाव को टालना चाहते हैं बल्कि यह आर्थिक समझ के अंतर्गत भी आता है. शून्य-कार्बन विकास में निवेश करना अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजित करने और यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हमारा देश अधिक समृद्ध बने.”

तस्वीरों मेंः राइट टु रिपेयर

योजना के तहत, बांग्लादेश का लक्ष्य है कि वो दशक के अंत तक अपनी ऊर्जा का 30 फीसद हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त कर ले. हसीना लिखती हैं, "हम उत्प्रेरक के रूप में जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई का उपयोग करते हुए लचीलापन बढ़ाएंगे, अपनी अर्थव्यवस्था का विकास करेंगे, रोजगार सृजित करेंगे और अपने नागरिकों के लिए अवसरों का विस्तार करेंगे.”

हरित तकनीक का रास्ता

पांच विषयों पर केंद्रित इस योजना में मौजूदा योजनाओं को पूरा करना, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण, कुशल और हरित ऊर्जा केंद्र बनाना, वैश्विक धन तक पहुंच प्रदान करना और देश के युवाओं के हितों में निवेश करना शामिल है. बांग्लादेश के शीर्ष अधिकारियों का मानना ​​​​है कि इस योजना से देश का सकल घरेलू उत्पाद 6.8 फीसद तक बढ़ सकता है और योजना के तहत 41 लाख नए रोजगार पैदा किए जा सकते हैं. साथ ही बांग्लादेश साल 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से अपनी एक तिहाई ऊर्जा की जरूरत पूरी कर सकता है.

शेख हसीना का कहना है कि बांग्लादेश मैंग्रोव जंगलों को पुनर्जीवित करने के लिए अपने तट के साथ पवन खेतों का विकास करेगा जो कि बदलते तटों को स्थिर करने में मदद करते हैं और देश को तूफान और बाढ़ से बचाते हैं. वह लिखती हैं, "हम बैंकों को जीवाश्म ईंधन मुक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अनुकूल शर्तों की पेशकश करने और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में विकसित देशों के साथ सहयोग करने के लिए सशक्त करेंगे.”

बांग्लादेश के पर्यावरणविद कमरुज्जमां मजूमदार ने डीडब्ल्यू को बताया कि देश में हरित वित्तपोषण का उपयोग करके प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर जोर दिया जाएगा. मजूमदार कहते हैं, "जलवायु परिवर्तन ने जो आर्थिक अवसर पैदा किया है, उसे बांग्लादेश लेना चाहता है.”

वीडियो देखें 05:56

मां, मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं

अर्थशास्त्री फहमीदा खातून भी कहती हैं कि बांग्लादेश आगामी दशकों में हरित तकनीकी पर ध्यान केंद्रित करेगा. वह कहती हैं, "कृषि से लेकर उद्योग तक या ऊर्जा उत्पादन से लेकर कार्बन उत्सर्जन कम करने तक, कुशल और हरित प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन विकास की कुंजी होगी. लेकिन इसके लिए बांग्लादेश को भारी-भरकम निवेश करना होगा.”

बांग्लादेश को उम्मीद है कि सीवीएफ के सदस्यों के नेतृत्व में आने वाले वर्षों में दूसरे विकासशील देश भी ऐसी योजनाओं को अपनाएंगे.

विविधता, पारदर्शिता और जवाबदेही

बांग्लादेश वर्तमान में जलवायु परिवर्तन से संबंधित अनुकूलन उपायों पर सालाना करीब 2 अरब डॉलर खर्च करता है और इस खर्च का 75 हिस्सा उसके घरेलू स्रोतों से आता है. देश को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साल 2050 तक अनुकूलन वित्त के रूप में करीब तीन गुना राशि की जरूरत होगी.

खातून कहती हैं, "सबसे पहले, विकसित देशों ने जिस जलवायु कोष का वायदा किया था, वहां तक पहुंच पहले से ही एक कठिन काम है. अन्य विकास निधियों की तरह इसकी कार्रवाई भी धीमी और नौकरशाही के भंवर में फंसी हुई है. वे जितनी राशि लेकर आए हैं, उसमें से 60 फीसद से ज्यादा राहत कार्यों के लिए है, जो कि जलवायु परिवर्तन से लड़ने का उनका तरीका है. लेकिन, बांग्लादेश जैसे देशों के लिए अनुकूलन के लिए अधिक धन की आवश्यकता है.”

वीडियो देखें 05:12

दम तोड़ती मानव सभ्यता की जन्मभूमि

सीवीएफ देशों ने मांग की है कि फंड को अपने संसाधनों का 50 फीसदी राहत के लिए और शेष राशि अनुकूलन उपायों के लिए आवंटित करना चाहिए.

खातून कहती हैं, "धन के स्रोत अलग-अलग होने चाहिए. निजी क्षेत्रों को भी हरित प्रौद्योगिकी में निवेश करना चाहिए. इसके लिए बांग्लादेश को व्यापार के अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है. समृद्धि योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता भी बांग्लादेश के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकती है.”

वह आगे कहती हैं, "बांग्लादेश को निधियों के साथ व्यवहार करते समय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी. उन्हें गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधनों की भी जरूरत होगी जो नई तकनीकों से निपटने में सक्षम हों.”

रिपोर्टः जुबैर अहमद

DW.COM