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राजनीतिऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया की पहली रक्षा नीति में चीन पर निशाना

१८ अप्रैल २०२४

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली राष्ट्रीय रक्षा नीति जारी की है. इस नीति के केंद्र में चीन की दादागीरी को रोकना है. चीन ने इसके खिलाफ आगाह किया है.

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रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी
रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी की पनडुब्बी रैंकिनतस्वीर: POIS Yuri Ramsey/Australian Defence Force/Getty Images

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली राष्ट्रीय रक्षा नीति जारी की है जो चीन की क्षेत्र में ‘दादागीरी चलाने के तौर-तरीकों‘ को नियंत्रित रखने पर केंद्रित है. 80 पन्ने की इस नीति में प्रशांत क्षेत्र के सामरिक हालात को तनावपूर्ण बताया गया है और रक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया के रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की जरूरत पर बात की गई है.

देश के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा, "शीत युद्ध के बाद जिस सकारात्मक माहौल ने रक्षा योजनाओं को निर्देशित किया था, वह अब खत्म हो चुका है.”

रक्षा नीति में चेतावनी दी गई है कि "चीन ने अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए डराने-धमकाने का” तरीका अपनाया है जिसमें ऑस्ट्रेलिया के लिए व्यापारिक प्रतिबंध और समुद्र व रक्षा मार्गों में रुकावट आदि शामिल हैं.

मार्ल्स ने कहा, "हम एक द्वीपीय देश हैं जो व्यापार के लिए समुद्री मार्ग पर निर्भर है. ऑस्ट्रेलिया पर हमले की तो कोई संभावना नहीं बनती क्योंकि दुश्मन बिना हमारी जमीन पर कदम रखे ही हमें बहुत नुकसान पहुंचा सकता है.”

रक्षा बजट में बढ़ोतरी

ऐसी सेना रखने के बजाय जो दुनिया में कहीं भी कोई भी काम कर सके, मार्ल्स ने कहा कि देश की रक्षा नीति अपने आस-पास के क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा के सीधे लक्ष्य पर केंद्रित होगी. इस नीति के तहत परमाणु ऊर्जा से चलने वालीं पनडुब्बियों का विकास, मिसाइल क्षमता का विकास और समुद्री लड़ाकू बेड़े का विकास किया जाएगा.

मार्ल्स ने कहा, "हमारी नीति का मकसद देश के इतिहास की सबसे ताकतवर जल सेना तैयार करना है.” ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि उस पर हमला करने से पहले दुश्मन देश यह सोचे कि यह कितना महंगा पड़ेगा.

नई रक्षा नीति में रक्षा बजट को जीडीपी के 2 फीसदी से बढ़ाकर 2.4 फीसदी किया जाएगा. हालांकि बहुत से विशेषज्ञ इससे हथियारों की प्रतिद्वन्द्विता बढ़ने की आशंका जता रहे हैं. खासतौर पर प्रशांत क्षेत्र में जहां चीन, दक्षिण कोरिया और जापान पहले से ही हथियार जमा करने की होड़ में लगे हुए हैं, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा बजट में बढ़ोतरी का असर इस होड़ को और बढ़ाने पर ही होगा.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (सिप्री) के मुताबिक एशिया और ओशेनिया में रक्षामद में खर्च 2013 से 2023 के बीच 45 फीसदी बढ़ चुका है.

चीन की प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलिया और अन्य पश्चिमी देशताइवान की खाड़ीऔर दक्षिणी व पूर्वी चीन सागर में युद्ध की आशंका जताते रहे हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई रक्षा नीति में भारत-चीन सीमा पर युद्ध की भी आशंका जताई गई है.

मार्ल्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को युद्ध की तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया के पास युद्ध की तैयारी के लिए दस साल के समय की सुविधा अब नहीं है.”

ऑस्ट्रेलिया की इस नई नीति पर चीन ने उसे आगाह किया है, उसने कहा हर बात पर चीन पर आरोप लगाने से बाज आना चाहिए. उसके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "चीन किस देश के लिए खतरा नहीं है. हम उम्मीद करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया चीन के विकास और रणनीतिक मंशाओं को सही नजरिये से देखेगा, शीत युद्ध की मानसिकता से बाहर आएगा और क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता के लिए ज्यादा कोशिशें करेगा.”

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

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