लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद तनाव, तेज हुई राजनीतिक हलचल | भारत | DW | 04.10.2021
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भारत

लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद तनाव, तेज हुई राजनीतिक हलचल

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में कार से कुचलकर किसानों के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है. इलाके में तनाव है और विपक्ष के कई बड़े नेता आंदोलन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

रविवार को लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा में कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है. किसान लखीमपुर खीरी जिले में प्रदर्शन कर रहे थे, जहां केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कार्यक्रम होना था.

खबरों के मुताबिक मंत्री मिश्रा के काफिले में शामिल वाहनों में से दो ने किसानों को कुचल दिया. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल ने समाचार चैनल सीएनएन-न्यूज18 को बताया, "लखीमपुर खीरी की घटना में आठ लोग मारे गए हैं. इनमें से चार किसान थे और चार लोग वाहनों में सवार थे.”

तस्वीरेंः सरकार का साथ देते स्टार

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनमें किसानों को खून से लथपथ सड़क किनारे कराहते देखा जा सकता है. जलती कारों के वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझी की गई हैं.

मंत्री के बेटे की भूमिका

किसान संगठनों ने दावा किया है कि जिस कार ने चार किसानों को कुचला, उसमें मंत्री अजय मिश्रा का बेटा या तो खुद सवार था या फिर चला रहा था. घटना के बाद भड़के किसानों ने कारों में आग लगा दी. हिंसा के दौरान चार उन लोगों की मौत हो गई जो मंत्री के काफिले का हिस्सा थे.

अजय मिश्रा ने अपने बेटे के घटना में शामिल होने के दावे को गलत बताया है. उन्होंने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले पर हमला किया और भारतीय जनता पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं व एक ड्राइवर की हत्या कर दी.

उन्होंने कहा कि कार को उनका ड्राइवर चल रहा था और शरारती तत्वों द्वारा पथराव किए जाने के बाद उसने नियंत्रण खो दिया व लोगों पर चढ़ गई. समाचार एजेंसी एएनआई से मिश्रा ने कहा, "अगर मेरा बेटा वहां होता तो वह जिंदा वापस न आता.”

पुलिस ने अजय मिश्रा के बेटे समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. रविवार को उन्होंने ट्विटर पर कहा, "जनपद लखीमपुर खीरी में घटित हुई घटना अत्यंत दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. यूपी सरकार इस घटना के कारणों की तह में जाएगी तथा घटना में शामिल तत्वों को बेनकाब करेगी व दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेगी.”

इस बीच जिले में इंटरनेट सेवाएं स्थगित कर दी गईं और राज्य की राजधानी लखनऊ की ओर जाने वाली सड़कों पर नाकेबंदी कर दी गई है.

विपक्ष के कई नेताओं ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ट्वीट कर कहा, "जो इस अमानवीय नरसंहार को देखकर भी चुप है, वो पहले ही मर चुका है. लेकिन हम इस बलिदान को बेकार नहीं होने देंगे- किसान सत्याग्रह जिंदाबाद!”

उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया. खबर है कि वह लखीमपुर खीरी जाने के प्रयास में हैं. उन्होंने अपने ट्विटर पर कहा कि किसान सत्याग्रह और मजबूत होगा.

प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, "भाजपा देश के किसानों से कितनी नफरत करती है? उन्हें जीने का हक नहीं है? यदि वे आवाज उठाएंगे तो उन्हें गोली मार दोगे, गाड़ी चढ़ाकर रौंद दोगे? बहुत हो चुका. ये किसानों का देश है, भाजपा की क्रूर विचारधारा की जागीर नहीं है. किसान सत्याग्रह मजबूत होगा और किसान की आवाज और बुलंद होगी."

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने लिखा, "लखीमपुर खीरी में भाजपाइयों द्वारा गाड़ी से रौंदे जाने की घटना में गंभीर रूप से घायल किसान नेता तेजिंदर सिंह विर्क जी से अभी थोड़ी देर पहले बात हो पाई. उनकी अति गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार तुरंत उन्हें सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराए. बस एक मांग मुख्यमंत्री इस्तीफा दें.”

किसान आंदोलन का एक साल

पिछले लगभग एक साल से भारत के कई हिस्सों में किसान केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. पिछले हफ्ते ही किसानों ने इन कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी का एक साल पूरा होने पर प्रदर्शन किया था.

केंद्र ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक पिछले साल अध्यादेश की शक्ल में जून में लागू कर दिए थे. उसके बाद इन्हें संसद में पेश किया गया.

वीडियो देखें 04:52

डटे रहेंगे किसान, ना ठंड का डर ना मौत का

विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के किसान इन तीनों अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य है अनाज, दालों, तिलहन, आलू और प्याज जैसी सब्जियों के दामों को तय करने की प्रक्रिया को बाजार के हवाले करना है. बिल के आलोचकों का मानना है कि इससे सिर्फ बिचौलियों और बड़े उद्योगपतियों का फायदा होगा और छोटे और मझौले किसानों को अपने उत्पाद के सही दाम नहीं मिल पाएंगे.

भारत सरकार का कहना है कि कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधारों की जरूरत है और ये कानून उसी मकसद से लाए गए हैं. लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों को डर है कि ये कानून उन्हें बड़े उद्योगपतियों के रहम ओ करम पर ले आएंगे.

लखीमपुर खीरी की घटना का राजनीतिक महत्व भी है क्योंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं जिनके लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ही नहीं, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दल भी प्रचार मोड में आ चुके हैं.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

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