किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट का सवाल हाईवे को हमेशा के लिए कैसे जाम किया जा सकता है? | भारत | DW | 01.10.2021
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भारत

किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट का सवाल हाईवे को हमेशा के लिए कैसे जाम किया जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है हाईवे को स्थायी रूप से बंद नहीं किया जा सकता है. दिल्ली की सीमाओं पर किसान कई महीनों से तीन नए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं.

फाइल तस्वीर

फाइल तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि सड़कों को हमेशा के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि दिल्ली की सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा सड़क की नाकेबंदी को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी को पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाले राजमार्गों की लगातार नाकेबंदी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सड़कों को हमेशा के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट के केंद्र से सवाल

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार के वकील से कहा, "हमने पहले ही कानून बना दिया है और आपको इसे लागू करना होगा. ऐसे कैसे किसान इतने लंबे समय तक हाईवे बंद रख सकते हैं." बेंच ने पूछा, "यह कब तक चलेगा, सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए."

बेंच ने कहा कि समस्या को न्यायिक मंच या संसदीय बहस के माध्यम से हल किया जा सकता है, लेकिन हाईवे को हमेशा के लिए जाम नहीं किया जा सकता है.

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पूछा कि सरकार मामले में क्या कर रही थी?

जाम से लोगों की मुसीबत

पिछले कई महीनों से किसान दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, इस वजह से कुछ हाईवे जाम हैं. आम लोगों को हाईवे से गुजरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली से सटे नोएडा की रहने वाली मोनिका अग्रवाल की याचिका पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि पहले दिल्ली जाने में उन्हें 20 मिनट लगते थे, अब जाम की वजह से दो घंटे लगते हैं.

तुषार मेहता ने अपनी ओर से कहा कि एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था जहां किसानों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया. मेहता ने कहा कि इस मामले में कुछ किसानों के प्रतिनिधियों को पक्षकार बनाया जाना है, ताकि उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे बताया जा सके. हालांकि बेंच ने कहा कि केंद्र जिसे पक्षकार बनाना चाहती है उसका आवेदन दें.

सुप्रीम कोर्ट ने 23 अगस्त को केंद्र से तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा सड़कों की नाकेबंदी का समाधान खोजने को कहा था. इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों को एक निर्दिष्ट स्थान पर विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक सड़कों को जाम नहीं कर सकते.

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