समुद्री शैवाल खाकर इंसान के लिए ईंधन बनाएगा जीवाणु | विज्ञान | DW | 22.01.2012
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विज्ञान

समुद्री शैवाल खाकर इंसान के लिए ईंधन बनाएगा जीवाणु

समुद्री शैवाल ऊर्जा का बढ़िया स्त्रोत साबित होने जा रहे हैं. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा जीवाणु खोजा है जो समुद्री शैवाल के ग्लूकोज को पचा कर एथेनॉल में तब्दील कर सकता है.

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मशहूर विज्ञान पत्रिका साइंस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नया जीवाणु भूरे शैवाल के ग्लूकोज को पचाने में सक्षम है. जीवाणु ग्लूकोज को पचा कर एथेनॉल में बदल देता है. ज्वलनशील एथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प के रूप में किया जा सकता है.

कैलीफोर्निया के बायो आर्किटेक्चर लैब ने जीनों में बदलाव करते हुए ई कोलाइ बैक्टीरिया तैयार किया. ई कोलाइ समुद्री शैवाल के शुगर पर लगातार हमला करता रहता है. लैब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेनियल ट्रुनफियो कहते हैं, "हमारे वैज्ञानिकों ने एक एंजाइम तैयार कर लिया है जो एल्गिनेट को पचा सकता है. इसके जरिए हम समुद्री शैवाल में मौजूद ज्यादातर शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं."

ट्रुनफियो के मुताबिक प्रयोग काफी सस्ता भी है. लैब अब दक्षिण अमेरिकी देश चिली में चार स्थानों पर एक्वाफार्म बनाने जा रही है. उम्मीद है कि तीन साल के भीतर जीवाणु तकनीक का औद्योगिक स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा.

समुद्री शैवाल से जैविक ईंधन बनाने की उम्मीद में कई और देशों के वैज्ञानिक भी हैं. अब तक जैविक ईंधन बनाने के लिए गन्ने और मक्का का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. इन दोनों फसलों का इस्तेमाल अनाज के तौर पर भी किया जा जाता है. ऐसे में समुद्री शैवाल जैविक ईंधन बनाने के लिए ज्यादा उपयुक्त कच्चा माल साबित हो रहा है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्री तटों के तीन फीसदी पानी का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में शैवालों की खेती की जा सकती है. इस खेती से 60 अरब गैलन ईंधन तैयार किया जा सकता है. अगर समुद्री शैवाल की ढंग से खेती की जाए तो एक हेक्टेयर से 19,000 लीटर ईंधन तैयार किया जा सकेगा. फिलहाल एक हेक्टेयर गन्ने की खेती से करीब 9,500 लीटर और मक्का की खेती से करीब 3,500 लीटर ईंधन तैयार होता है.

इस रिसर्च का खर्च अमेरिका का ऊर्जा विभाग, चिली की एक कंपनी और नॉर्वे की एक तेल कंपनी उठा रहे हैं.

रिपोर्टः एएफपी/ओ सिंह

संपादनः एन रंजन

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