विकी बाउमः ग्रैंड होटल | लाइफस्टाइल | DW | 17.12.2018
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लाइफस्टाइल

विकी बाउमः ग्रैंड होटल

इस किताब ने 1920 के दशक की भावनाओं को प्रतिबिम्बित किया था और रचनाकार को बेस्टसेलिंग लेखक के तौर पर स्थापित कर दिया. बर्लिन का एक लक्जरी होटल किस्मत की तलाश करते और मृत्यु चाहते लोगों का केंद्रीय मंच बन जाता है.

वाइमार गणराज्य की मनोरंजन पत्रिकाओं पर सरसरी निगाह डालें, तो आपकी नजर इस महिला पर जरूर पड़ेगी. विकी बाउम 1920 के दशक की आधुनिक औरत का प्रतिनिधित्व करती थीं, नौकरीशुदा, आजाद, सामयिक. उलश्टाइन प्रकाशन गृह में बतौर संपादक उन्होंने बर्लिन के टेबलॉयड मीडिया को चमत्कृत कर दिया था. बॉब हेयरस्टाइल और भड़कीले परिधान वाली, मध्यवर्गीय परिवार से निकली बाउम का लक्ष्य सिर्फ ध्यान खींचना नहीं था. उन्होंने संगीत का अध्ययन किया था. अपने ब्वॉयफ्रेंड चुने थे, कम उम्र में शादी की थी और जल्दी ही तलाक भी ले लिया था.

भड़कीलेपन का ब्रांड?

उनके लेख और किताबें, मनोरंजन और सामाजिक आलोचना के बीच झूलते रहे लेकिन साहित्य के आलोचकों ने उनकी निंदा की. उनका दावा था कि बाउम की शैली बहुत अधिक नपी तुली है और मुख्यधारा की ओर बहुत ज्यादा झुकी हुई है. उन्होंने उसे भड़कीला और घिसापिटा करार दिया. लोग फिर भी उनकी किताबों को पढ़ते हैं, खासकर युवा महिलाएं.

"मैं दूसरे दर्जे के मामलों की पहले दर्जे की लेखिका हूं," एक बार उन्होंने अपने बारे में कहा था. लेकिन ठीक यही बात है जिसने उन्हें इतना सफल बनाया. वो पहली लेखिका हैं जिन्हें एक सुनियोजित विज्ञापन अभियान के जरिए एक ब्रांड में बदल दिया गया था, जिसके साथ उनकी फोटो श्रृंखलाएं और घर की कहानियां भी शामिल थीं.

"स्टुड.केम. हेलेन विलफ्युअर" नाम की बेस्टसेलर लिखने के बाद, उलश्टाइन पब्लिशर्स ने बाउम पर दबाव बनाया कि वो फौरन नई किताब लिख डालें जिससे वाइमर गणराज्य में सबसे ज्यादा वितरित लेखिका की सफलता को भुनाया जा सके. लेखिका जानती थी कि वो उस चुनौती के लिए तैयार थी, एक ऐसा उपन्यास लिखने के लिए तैयार जो जीवन जैसा सच्चा हो लेकिन उसमें एक हल्का सा छुड़ाव भी बना रहे. उसे प्रामाणिक होना था और उसे ग्लैमर की दुनिया के आनंद में भी विचरण करना था.

Film Greta Garbo in Menschen im Hotel

उपन्यास की तरह फिल्म भी बहुत लोकप्रिय हुई

विभिन्न विचारों का विलय-केंद्र: एक होटल

जिंदगी की हकीकत को छिप कर सुनने के लिए बाउम ने बर्लिन के विलासी होटलों में काम करना शुरू किया. इसका नतीजा था "ग्रैंड होटल" जो अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर बन गया.

उपन्यास में बड़े पैमाने पर विविध प्रकार के किरदार नजर आते हैं, इनमें एक विक्षिप्त डांसर भी है जो अपने अच्छे दिन पीछे छोड़ आई है और एक सामंत है जो गाफिल चौर्य कर्म से अपना गुजारा करता है. प्राणघातक बीमरियों से घिरे मुनीम और प्रेमांध सेक्रेटरी भी उपन्यास में दिखते हैं. लोगों की एक शानदार भीड़ होटल के विशाल परिसर में आती और जाती है. ये उनका मंच बन जाता है, और समाज का एक प्रतिबिंब भी. 

"शानदार. हमेशा कुछ न कुछ होता हुआ. एक आदमी जेल जाता है, दूसरा मारा जाता है. एक जाता है, दूसरा आता है. एक आदमी को स्ट्रैचर पर लादकर पीछे की सीढ़ियों से उतारा जाता है और ठीक उसी समय दूसरा आदमी सुनता है कि उसका एक बच्चा हुआ है. वास्तव में ये सब बहुत दिलचस्प है! लेकिन यही तो जिंदगी है!"

"ग्रैंड होटल" अपार सफल हुआ. विकी बाउम की प्रसिद्धि अमेरिका तक फैल गई. उपन्यास का ब्रॉडवे के लिए नाट्य रूपांतर किया गया और उस पर हॉलीवुड की एक फिल्म भी बन गई जिसमें ग्रेटा गार्बो और जोन क्रॉफोर्ड ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं.

इस सफलता के बाद लेखिका अमेरिका में जा बसीं, 1932 में बस थोड़े से समय के ही अंतर से वो जर्मनी से निकल गईं, क्योंकि एक साल बाद ही नाजियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया था. यहूदी लेखिका की किताबें जला दी गईं. उन किताबों का ये कहकर तिरस्कार किया गया कि वे ओछी, अनैतिक, सनसनीखेज थीं. जाहिर है, नाजियों को इस बात से कोई मतलब नहीं था कि बस कुछ साल पहले तक, वाइमर गणराज्य के दौरान, विकी बाउम की रचनाएं सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली कृतियों में से थीं.

विकी बाउमः ग्रैंड होटल, न्यू यार्क रिव्यू बुक्स क्लासिक्स (जर्मन शीर्षक मेन्शेन इम होटल), 1929

संगीतज्ञ और लेखिका विकी बाउम का असली नाम हेडविग बाउम था. वो 1888 में वियना में जन्मी थीं. वो वाइमर गणराज्य के सबसे महत्त्वपूर्ण लेखकों में से थीं. 1933 में नाजियों ने उनकी किताबें जला दीं, लेकिन इससे पहले ही बाउम अमेरिका चली गई थीं. उपन्यास, कहानी और अंग्रेजी में नाटकों के अलावा उन्होंने निबंध और अखबारों के लिए लेख भी लिखे. उनकी कई रचनाओं पर फिल्में भी बनीं. 1960 में लॉस एंजेलेस में उनका देहांत हो गया.

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