भारत की कोविड-19 जांच रणनीति में बड़ा बदलाव | भारत | DW | 16.06.2020
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भारत

भारत की कोविड-19 जांच रणनीति में बड़ा बदलाव

आईसीएमआर ने भारत में रैपिड ऐंटीजेन जांच को स्वीकृति दे दी है जिसके नतीजे आधे घंटे के अंदर आ जाते हैं. इसकी वजह से आने वाले दिनों में देश में पहले से कहीं ज्यादा टेस्ट किए जाने की उम्मीद है.

भारत में कोविड-19 के मामलों की जांच की रणनीति में एक बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि आईसीएमआर ने एक नई किस्म की जांच पद्धति को स्वीकृति दे दी है जिसकी वजह से आने वाले दिनों में पहले से कहीं ज्यादा टेस्ट किए जाने की उम्मीद है. नई पद्धति को रैपिड ऐंटीजेन टेस्ट कहते हैं और इसके नतीजे आधे घंटे के अंदर आ जाते हैं. अभी तक जो टेस्ट किए जा रहे थे उन्हें आरटी-पीसीआर टेस्ट कहते हैं. 

इसे बड़ा आसान सा टेस्ट बताया जा रहा है जिसे करने के लिए नाक से लिए गए सैंपल को लैब तक ले जाने की जरूरत नहीं होती. जहां भी सैंपल लिया गया वहीं पर जांच की जाती है और 15 मिनट से 30 मिनट में नतीजा सामने आ जाता है. आरटी-पीसीआर टेस्ट में नतीजा सामने आने में तीन से पांच घंटों तक का समय लगता है. इसके अलावा सैंपल को लैब तक पहुंचाने में भी समय लगता है, जिसकी वजह से नतीजे सामने आने में कुल मिलाकर कम से कम एक पूरा दिन लग जाता है.

देखा ये जा रहा है कि देश में अधिकांश जगहों पर दो से तीन दिन लग रहे हैं और कहीं कहीं उस से भी ज्यादा. रैपिड ऐंटीजेन से टेस्ट जल्दी हो पाएंगे और देश में की जा रही जांचों की संख्या को बड़ी संख्या में बढ़ाया जा सकेगा. बताया जा रहा है कि इस तकनीक से एक जांच की कीमत सिर्फ 500 रुपये रखी जाएगी जब की मौजूदा स्थिति में कर जांच में कम से कम 4500 रुपये का खर्च आता है.

Coronavirus Indien (picture-alliance/NurPhoto/R. Shukla)

दिल्ली में एक डॉक्टर कोरोना वायरस जांच किट को तैयार करते हुए.

आईसीएमआर ने दक्षिण कोरिया स्थित कंपनी 'एसडी बायोसेंसर' के दिल्ली के पास मानेसर के प्लांट में विकसित की गई जांच किट का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है. इस किट से लिया हुआ सैंपल सिर्फ एक घंटे तक स्थिर रहता है, इसीलिए जांच को सैंपल ले लेने के एक घंटे के अंदर करना होता है. आईसीएमआर के निर्देश के अनुसार कंटेनमेंट इलाकों और हॉटस्पॉट इलाकों में इस किट के जरिए हर उस व्यक्ति की जांच की जानी चाहिए जो इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण दिखा रहा हो.

इसके अलावा उनकी भी जांच होनी चाहिए जिनमें कोई लक्षण ना हों लेकिन वो संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आए हों और उन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन इत्यादि जैसी जैसी कोई और बीमारी भी हो जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा जोखिम हो सकता है. आईसीएमआर ने कहा है कि जहां भी इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए वहां नतीजा कोविड-19 पॉजिटिव आने की सूरत में व्यक्ति को कोरोना संक्रमित मान लिया जाए. अगर जांच नतीजा नेगेटिव आए तो उस व्यक्ति का आरटी-पीसीआर टेस्ट भी किया जाए ताकि उसके संक्रमित ना होने की पुष्टि हो सके.

भारत में पिछले 24 घंटों में 1,54,935 सैंपलों की जांच की गई. अभी तक कुल मिला कर 59,21,069 सैंपलों की जांच की गई है जिसे जानकार देश की आबादी की तुलना में बहुत कम बताते हैं. भारत में अभी भी हर 10 लाख की आबादी पर महज 4,000 के आस-पास टेस्ट किए जा रहे हैं, जब कि अमेरिका में लगभग 75,000 और रूस, ब्रिटेन और स्पेन में लगभग एक लाख टेस्ट किए जा रहे हैं.

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