बर्लिन में कैट कैफे | मनोरंजन | DW | 12.12.2013
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मनोरंजन

बर्लिन में कैट कैफे

जर्मनी में बिल्लियों को ध्यान में रख कर कैफे खोला गया है. मेहमाननवाजी के लिए गर्म कॉफी और लजीज केक के साथ दो खूबसूरत बिल्लियां भी मौजूद हैं. बर्लिन के नॉएकोएल्न डिस्ट्रिक्ट में यह कैफे लोगों के कौतूहल की वजह बना.

अगर आप कॉफी की एक चुस्की लेने पहुंचें और वहां भरे फर वाली एक बिल्ली धीमे से म्याऊं कर दे, तो जाहिर है कि चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी. कैफे मालिक आंद्रेया कॉलमॉर्गेन भी ऐसा ही मानती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ऐसे माहौल के लिए इस कैफे को खोला है कि लोगों का तनाव कम हो सके.

उनके मुताबिक यह कोई आम कैफे नहीं, बल्कि खाने पीने की चीजों के अलावा यहां प्रदर्शनी भी लग सकती है और सेहत का तो खास ध्यान रखा ही जाता है, "बर्लिन के लोग यहां आकर आराम कर सकते हैं. यह बात साबित हो चुकी है कि बिल्लियों की मौजूदगी से ब्लड प्रेशर कम होता है." इस कैफे में म्यूजिक का भी इंतजाम है और अगर कुछ पढ़ने का मन हो, तो भी आपके लिए काफी कुछ है

क्या है कैट कैफे

कोई 15 साल पहले ताइवान ने दुनिया का पहला कैट कैफे खोला, जो रातोंरात लोकप्रिय हो गया. ताइपे का यह कैफे खास तौर पर जापानियों के बीच मशहूर हुआ और कई जापानी यहां आने लगे. इसके बाद ओसाका शहर में जापान का पहला कैट कैफे 2004 में खोला गया.

फिर तो जापान में जैसे कैट कैफे की बाढ़ आ गई. सिर्फ राजधानी टोक्यो में कम से कम 39 ऐसे कैफे हैं, जहां दरवाजा खुलते ही एक खूबसूरत फरदार बिल्ली स्वागत करती है. जापान के कई रिहाइशी इलाकों में बिल्लियां रखना मना है और इस वजह से भी शायद लोगों ने कैट कैफे को बहुत पसंद किया. बाद में अलग अलग कैफे में अलग अलग तरह की बिल्लियां रखी जाने लगीं, जैसे काली बिल्लियों का अलग कैफे, मोटी बिल्लियों का अलग और खास प्रजाति वाली बिल्लियों का अलग.

जर्मनी की बिल्लियां

भारत में भले ही बिल्लियां या कुत्ते आवारा होते हैं और सड़कों पर भी मिल जाते हैं. लेकिन जर्मनी में हर जानवर का एक मालिक होता है. यहां के लोगों को कुत्तों से खास लगाव है, लेकिन यह जानकर ताज्जुब होता है कि जर्मनी में कुत्तों से ज्यादा बिल्लियां हैं. साल 2010 के आंकड़े के मुताबिक कई घरों में दो या तीन बिल्लियां भी हैं और कुल करीब एक करोड़ पालतू बिल्लियां जर्मनी में रहती हैं. कुत्तों की संख्या इनसे कम है, करीब 70 लाख.

जर्मनी में पालतू जानवरों को रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना पड़ता है. यहां तक कि उनके लिए परिचय पत्र भी बनवाना पड़ता है. यहां बिल्लियों को पालतू जानवर बनाने का रिवाज सदियों से चला आ रहा है. आम तौर पर बिल्लियों की उम्र 12 से 14 साल होती है लेकिन कई बिल्लियां 30 के पार भी पहुंच चुकी हैं.

बिल्ली और सेहत

दुनिया भर की रिसर्च से पता चला है कि बिल्लियों का साथ सेहतमंद होता है. घर में अगर बिल्ली हो तो तनाव और अवसाद की संभावनाएं कम होती हैं. बिल्लियों के शरीर से छूने और उनके स्पंदन से विशेष गर्माहट मिलती है और इससे स्ट्रोक की संभावनाएं कम हो सकती हैं. हाल की रिसर्च में पता चला है कि बिल्ली रखने वालों को दिल का दौरा पड़ने की संभावना 40 फीसदी कम होती है. कुछ रिसर्च बताते हैं कि इंफेक्शन ठीक करने और हड्डी की बीमारी ठीक करने में भी बिल्लियों से मदद मिलती है.

प्राचीन सभ्यताओं में भी बिल्लियों का बहुत महत्व है. मिस्र में यह एक पुरातन भगवान का रूप है, तो प्राचीन चीन के चित्र बताते हैं कि वहां बिल्लियों को बहुत अहमियत दी जाती थी. पुरानी चीनी कहावत है कि सिर्फ इंसानों और बिल्लियों में आत्मा होती है. पुराने जमाने में यह अमीरी की निशानी थी और बिल्ली रखना इज्जत की बात समझी जाती थी

यूरोप के कैट कैफे

जर्मनी के पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया में पहले पहल एक कैट कैफे खुला, जिसके बाद यूरोप के दूसरे देशों ने भी ऐसे कैफे खोलने शुरू किए. हालांकि ब्रिटेन में ऐसी योजना टालनी पड़ी क्योंकि प्रस्तावित जमीन अनुपलब्ध हो गई. हंगरी में इस साल एक कैट कैफे खुला, जो काफी लोकप्रिय हो रहा है.

जर्मनी के म्यूनिख शहर में भी इस साल इस तरह का कैफे खोला गया है, जहां मेहमानों की लाइन लगी रहती है. अब बर्लिन में दूसरे कैफे के बाद इसी शहर में एक और कैफे खोलने की योजना बन रही है.

एजेए/एमजे (डीपीए)

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