पीपली लाइव और ओमकारा को हाईकोर्ट का नोटिस | मनोरंजन | DW | 29.10.2010
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मनोरंजन

पीपली लाइव और ओमकारा को हाईकोर्ट का नोटिस

पीपली लाइव, ओमकारा, गंगाजल, बैंडिट क्वीन इन सारी फिल्मों में एक बात एक जैसी है और वह है इनकी भाषा. अब इसी भाषा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फिल्म बनाने वालों को नोटिस भेजा है.

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मुंबई के पुलिस कमिश्नर से इन फिल्मों को बनाने वाले निर्माताओं और निर्देशकों तक कोर्ट का नोटिस पहुंचाने को कहा है. जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस वीरेंद्र कुमार दीक्षित की बेंच ने स्थानीय वकील अशोक पाण्डेय की याचिका पर यह नोटिस भेजा है. अशोक पाण्डेय ने अपनी याचिका में मांग की है कि इन फिल्मों को दिखाने पर तुरंत रोक लगाई जाए क्योंकि ये फिल्में गाली गलौज वाली भाषा को बढ़ावा दे रही हैं.

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आमिर अनुषा को नोटिस

हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष शर्मिला टैगोर, पीपली लाइव के निर्माता आमिर खान और निर्देशक अनुषा रिजवी, गंगाजल के निर्माता निर्देशक प्रकाश झा, ओमकारा के निर्माता कुमार मंगत और निर्देशक विशाल भारद्वाज, बैंडिट क्वीन के निर्माता संदीप एस बेदी और निर्देशक शेखर कपूर को ये नोटिस भेजे. इनमें से जब कोई भी कोर्ट की सुनवाई के दौरान हाजिर नहीं हुआ और ना ही इनकी तरफ से कोई जवाब आया तो हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस के कमिश्नर के जरिए नोटिस भेजने का आदेश दिया. कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर का दिन तय किया है.

ये चारों फिल्में अपनी विषय वस्तु और उनके फिल्मांकन को लेकर जबर्दस्त चर्चा में रही और बॉक्स ऑफिस पर भी काफी हिट रहीं. इनमें से आमिर खान की पीपली लाइव तो हाल ही में आई है जबकि बाकी फिल्में पुरानी हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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