पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में बड़ा उछाल | दुनिया | DW | 18.10.2019
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दुनिया

पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में बड़ा उछाल

पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में इस साल बड़ा उछाल आया है. पोलियो विरोधी अभियान में लगे कर्मचारियों पर होने वाले हमलों की वजह से पाकिस्तान में इस बीमारी को मिटाना मुश्किल चुनौती बन गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते साल पाकिस्तान में पोलियो के 12 मामले सामने आए थे जबकि इस साल अभी तक 72 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इतने ज्यादा मामलों के बाद पोलियो विरोधी कार्यक्रम के प्रमुख ने अपना पद छोड़ा दिया है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक मदद से चलने वाले इस कार्यक्रम के प्रमुख बाबर बिन अट्टा ने कहा है कि वह निजी कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं. पिछले पांच सालों के दौरान ये पोलियो के सबसे ज्यादा मामले हैं.

पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाकों में पोलियो के खिलाफ अभियान चलाना वाकई मुश्किल साबित हुआ है. खासकर तालिबान चरमपंथी इसके खिलाफ है. लेकिन बीते पांच साल से यह इलाका सेना के नियंत्रण में है. फिर भी वहां पोलियो के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. 2014 में तालिबान के खिलाफ सेना ने अभियान शुरू किया था. उस साल पाकिस्तान में पोलियो के कुल 304 मामले सामने आए थे. आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2017 में पोलियो के सबसे कम सिर्फ आठ मामले दर्ज किए गए.

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पोलियो के ज्यादातर मामले खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत में ही सामने आए हैं, जहां बहुत से कट्टरपंथी पोलियो की दवा पिलाने या फिर इसके टीके लगाने के खिलाफ हैं. ऐसे बहुत से लोग पोलियो टीकाकरण को पश्चिमी देशों की साजिश बताते हैं. उनके मुताबिक पोलियो की दवा पीने वाले बच्चे आगे चलकर संतानें पैदा करने के लायक नहीं रहेंगे. पाकिस्तान के एबटाबाद में अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन को भी पोलियो अभियान के तहत ही खोजा गया था जो बाद में एक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में मारा गया था.

दूसरी तरफ, अफ्रीकी देश नाइजीरिया ने कहा है कि पिछले तीन साल से उसके यहां पोलियो का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया. इसे एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है जो अफ्रीका में इस बीमारी के खिलाफ जंग में एक सकारात्मक पहल है. नाइजीरिया की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा एजेंसी के निदेशक फैसल शुएब ने कहा, "यह नाइजीरिया और विश्व समुदाय के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है कि बीते तीन साल में पोलियो का कोई भी मामला सामने नहीं आया है."

नाइजीरिया अफ्रीका में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. अफ्रीकी महाद्वीप में यह अकेला देश था जहां पोलियो मौजूद था. लेकिन अगस्त 2016 से वहां इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है. यह पश्चिमी अफ्रीकी देश मार्च 2020 में पोलियो से जुड़ा डाटा विश्व स्वास्थ्य संगठन को सौंपेगा, जिसके बाद पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को पोलियो से मुक्त घोषित करने का रास्ता तैयार हो सकता है. नाइजीरिया में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि क्लेमेंट पीटर ने कहा, "अगर डाटा में कोई मामला सामने नहीं आने की पुष्टि होती है तो फिर अफ्रीकी इलाका अगले साल के मध्य तक पोलियो मुक्त हो जाएगा."

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पोलियो का वायरस मुख्य तौर पर मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को संक्रमित करता है जिसकी वजह से स्थायी रूप से मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और लकवा हो सकता है. यह वायरस सिर्फ इंसानों को संक्रमित करता है और बच्चे इसका खास तौर से शिकार बनते हैं.

नाइजीरिया के बाद दुनिया में सिर्फ पाकिस्तान और अफगानिस्तान ही ऐसे देश बचेंगे जो अब भी पोलियो से जूझ रहे हैं. पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तरह नाइजीरिया में भी इस्लामी कट्टरपंथी हाल के सालों में बहुत मजबूत हुए हैं. इसी वजह से वहां पोलियो के खिलाफ जंग की रफ्तार धीमी रही है. 2012 में नाइजारिया में पोलियो के 122 मामले दर्ज किए गए जबकि पूरी दुनिया में उनकी संख्या 223 थी.

पोलियो के मोर्चे पर प्रगति के बावजूद सहायता संगठनों का कहना है कि खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है. नाइजीरिया के लिए यूनिसेफ की सहायक प्रतिनिधि पेरनिल आयरनसाइड का कहना है, "लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. हमें अपनी कोशिशें बनाए रखनी होंगी. उन्हें बढ़ाना होगा ताकि पोलियो के मामले में आई ऐतिहासिक कमी को कायम रखा जा सके."

एके/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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