दुनिया के 10 बड़े आंदोलन में दांडी मार्च भी | दुनिया | DW | 29.06.2011
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दुनिया

दुनिया के 10 बड़े आंदोलन में दांडी मार्च भी

दशकों बाद भी गांधीजी का नमक सत्याग्रह महत्पूर्ण मकाम रखता है. मशहूर टाइम पत्रिका ने इसे दुनिया के 10 सबसे बड़े आंदोलनों में शामिल किया है. टाइम का कहना है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम को इस आंदोलन से मजबूती मिली.

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भारत की आजादी के लड़ाई के अगुवा गांधीजी

महात्मा गांधी के नेतृत्व में दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) को टाइम पत्रिका ने दुनिया को बदल देने वाले 10 महत्वपूर्ण आंदोलनों की सूची में शामिल किया है. 1930 में बापू ने अहमदाबाद के पास साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का मार्च निकाला था. उन्होंने यह मार्च नमक पर ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ निकाला था. अहिंसा के साथ शुरु हुआ यह मार्च ब्रिटिश राज के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा रहा था. टाइम पत्रिका ने लिखा है कि भावुक और नैतिक मूल्यों के साथ इस मार्च ने ब्रिटिश राज के खात्मे का संकल्प किया.

टाइम पत्रिका के मुताबिक भारत पर लंबे समय तक चली ब्रिटिश हुकूमत में चाय, कपड़ा और यहां तक कि नमक जैसी चीजों पर सरकार का एकाधिकार था. ब्रिटिश राज के समय भारतीयों को नमक बनाने का अधिकार नहीं था, बल्कि उन्हें इंग्लैंड से आने वाले नमक के लिए कई गुना ज्यादा पैसे देने होते थे.

दांड़ी मार्च के बाद आने वाले महीनों में 80,000 भारतीयों को गिरफ्तार किया गया. टाइम पत्रिका ने लिखा है कि इस सत्याग्रह की वजह से ब्रिटिश राज के खिलाफ अवज्ञा फैली

NO FLASH Studentenbewegung 1989 in Peking China

थ्येनानमन चौक पर नाकाम रही क्रांति की कोशिश

और भारत की आजादी की लड़ाई मजबूत हुई.

इस फहरिस्त में इसी साल 25 जनवरी को शुरु हुई मिस्र की क्रांति को भी शामिल किया गया है जिसके चलते दशकों से सत्ता में बैठे हुस्नी मुबारक को आखिरकार 11 फरवरी को इस्तीफा देना पडा. इसके अलावा बीजिंग के थ्येनानमन चौक पर 1989 में हुए लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन को भी इस सूची में जगह दी गई है जिसे चीन सरकार ने ताकत के बल पर कुचल दिया.

1773 में बोस्टन टी पार्टी सिविल राइट्स, 1963 में मार्च ऑन वॉशिंगटन, 1969 में स्टोनवाल इन, 1969 में वियतनाम युद्ध रोकने की मुहिम, 1969 में ईरान के मुहर्रम विरोध प्रदर्शन, 1986 में फिलीपींस का पीपल्स पावर प्रोटेस्ट और 1989 में केप टाउन का परपल रेन प्रोटेस्ट इस फहरिस्त में जगह पाने वाले आंदोलन हैं.

रिपोर्टः पीटीआई/आमिर अंसारी

संपादनः ए कुमार

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