दस सालों में भगदड़ के बड़े हादसे | दुनिया | DW | 14.10.2013
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दुनिया

दस सालों में भगदड़ के बड़े हादसे

केरल में सबरीमाला मंदिर में दर्शनों के दौरान मची भगदड़ में 64 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. हाल के सालों में दुनिया में भगदड़ के ऐसे कई दर्दनाक हादसे हुए जिनमें सैकड़ों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा. इन हादसों पर एक नजर.

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नवंबर 2010 - कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में जल महोत्सव के आखिरी दिन अफरातफरी के बाद एक पुल पर मची भगदड़ में 375 से ज्यादा लोगों की मौत. 755 लोग घायल.

जुलाई 2010 - जर्मनी के ड्यूसबुर्ग शहर में लव परेड संगीत उत्सव के दौरान भगदड़ में 19 लोगों की मौत और 342 घायल.

फरवरी 2010 - माली के टिम्बकटू शहर में त्योहार के दिन एक मस्जिद के पास भगदड़. 26 लोग मारे गए, 40 घायल.

मार्च 2009 - आइवरी कोस्ट में मलावी के खिलाफ विश्व कप क्वालीफाइंग मैच से कुछ देर पहले स्टेडियम में भगदड़ मचने से करीब 19 लोगों की मौत.

सितंबर 2008 - राजस्थान के ऐतिहासिक जोधपुर शहर में चामुंडा मंदिर के पास भगदड़. 147 की मौत और 55 लोग घायल.

अगस्त 2008 - भूस्खलन की अफवाह के बाद हिमाचल प्रदेश में नैना देवी मंदिर में भगदड़ मचने से 145 श्रृद्धालुओं की मौत. 100 से ज्यादा लोग घायल.

सितंबर 2006 - यमन के एक स्टेडियम में राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह की चुनाव पूर्व रैली में भगदड़ में 51 लोगों की मौत.

फरवरी 2006 - फिलिपींस की राजधानी मनीला के एक स्टेडियम में लोकप्रिय टीवी शो में हिस्सा लेने के लिए एकत्र लोगों में अफरातफरी. भगदड़ से 71 लोगों की मौत.

जनवरी 2006 - हज यात्रा में शैतान को पत्थर मारने की रस्म के दौरान भगदड़ में 362 लोगों की मौत. यह घटना जमारात पुल के पूर्वी गेट की है.

अगस्त 2005 - इराक की राजधानी बगदाद में टिगरिस नदी पर बने एक पुल पर भीड़ में आत्मघाती हमलावर होने की अफवाह के चलते लोगों में भगदड़. 1000 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत.

जनवरी 2005 - महाराष्ट्र के एक मंदिर में दर्शनों के दौरान मची भगदड़ में 265 से ज्यादा तीर्थयात्रियों की मौत.

फरवरी 2004 - हज यात्रा के दौरान शैतान को पत्थर मारने की रस्म के समय भगदड़. जमारात पुल पर हुए हादसे में 251 श्रृद्धालुओं की मौत.

मई 2001 - घाना में एक फुटबॉल स्टेडियम में प्रशंसकों ने दंगा शुरू किया तो पुलिस ने आंसूगैस के गोले छोड़े. इसके बाद मची भगदड़ में 126 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे.

संकलन: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ईशा भाटिया

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