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तस्वीर: Valter Campanato/ABr

डब्ल्यूटीओ का नया मुखिया

२९ अगस्त २०१३

ब्राजील के रॉबर्टो अजावेदो डब्ल्यूटीओ के नए प्रमुख बनने जा रहे हैं. आर्थिक मंदी और सीरियाई संकट के बीच उनके सामने विश्व व्यापार को नए रास्ते पर ले जाने की चुनौती होगी और साथ ही दोहा दौर की बैठक का कुछ हल निकालने की भी.

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उन्हें किसी नई योजना की जरूरत नहीं क्योंकि वह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से भली भांती परिचित हैं. वहां पांच साल तक ब्राजील का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. आम तौर पर डब्ल्यूटीओ प्रमुख की कामयाबी इस बात से परखी जाती है कि उसके कार्यकाल में कौन सा बड़ा समझौता हुआ. इस मुद्दे पर अजेवेदो की राह आसान नहीं है.
12 साल पहले कतर की राजधानी दोहा में शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बातचीत आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और विशेषज्ञ इसे "मृत" घोषित कर चुके हैं. खास तौर पर कृषि के क्षेत्र में, जहां विकसित और विकासशील देशों के बीच का मतभेद खत्म नहीं हो पा रहा है. विकसित देश खाने पीने की चीजों पर दी जाने वाली सब्सिडी हटाने को तैयार नहीं हैं और विकासशील देशों का कहना है कि इसके बगैर उनके उत्पाद की सुरक्षा नहीं हो सकती है.
बदलाव के आसार नहीं
जर्मनी में कील विश्व अर्थशास्त्र संस्थान के वाइस प्रेसिडेंट रॉल्फ लांगहामर का कहना है, "डब्ल्यूटीओ का मुखिया जहां से भी हो, लातिन अमेरिका से या एशिया से, वह हमेशा सबसे अहम सदस्यों पर निर्भर रहेगा." लांगहामर कहते हैं कि डब्ल्यूटीओ के अहम देश अपनी विदेश नीति और वाणिज्य को लेकर अपना सख्त रवैया नहीं बदलेंगे, तब तक किसी भी प्रमुख के पास ज्यादा कुछ करने की संभावना नहीं होगी.
अनुमान है कि व्यापार के मामले में एक सफल अंतरराष्ट्रीय समझौते से दुनिया भर में 300 अरब से 800 अरब के बीच कारोबार बढ़ सकता है. लेकिन 159 देश बरसों से दोहा राउंड के किसी नतीजे का इंतजार कर रहे हैं और आपस में व्यापार समझौते कर रहे हैं.
हाल के दिनों में क्षेत्रीय मुक्त व्यापार समझौता तेजी से लोकप्रिय हुआ है. ऐसे 354 समझौते लागू हो चुके हैं, जबकि 192 ऐसे समझौतों पर बातचीत चल रही है. 2000 की शुरुआत में सिर्फ 120 ऐसे समझौते दुनिया भर में थे. यानी पिछले 12-13 साल में यह काफी बढ़ा है. लातिन अमेरिकी देशों में सबसे अच्छी अर्थव्यवस्था ब्राजील की है और वह यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है.
यूरोपीय संघ और अमेरिका अटलांटिक के आर पार मुक्त कारोबार क्षेत्र बनाना चाहते हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता होगा. लांगहामर इसका महत्व बताते हैं, "और जैसे ही यह अमल में आएगा, उसके बाद दोहा समझौते के लिए कोई चांस नहीं बचेगा." डब्ल्यूटीओ के नए प्रमुख को इस बात का ख्याल रखना होगा कि विश्व व्यापार अंतरराष्ट्रीय उत्पादन नेटवर्क पर केंद्रित होता जाएगा और सप्लाई चेन की कुशलता पर निर्भर होगा.
नया रोल
डब्ल्यूटीओ अपनी नई भूमिका तलाश रहा है. वह जरूर चाहेगा कि नए व्यापार समझौतों में और देश शामिल हों और वह चाहेगा इन क्षेत्रीय समझौतों को एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे में ढाला जा सके, और कुछ नहीं तो कम से कम जीनेवा में अपने वजूद को बचाए रख सके.
दोहा राउंड बैठक पर अब किसी राजनेता को विश्वास नहीं रहा. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डब्ल्यूटीओ खुद को खत्म कर सकता है. लांगहामर का कहना है, "संस्थान मरते नहीं, औपचारिक तौर पर खत्म किए जाने के बजाय उनका महत्व खत्म होता जाता है." यानी रॉबर्टो अजेवेदो को डब्ल्यूटीओ के नए प्रमुख के तौर पर चिंता करने की जरूरत नहीं. भले ही वह ज्यादा कुछ न कर पाएं, उनकी नौकरी सुरक्षित है.
रिपोर्टः युटा वासररैब/रॉल्फ वेंकेल (एजेए)
संपादनः एन रंजन

8. WTO-Ministerkonferenz in der Schweiz, Genf 2011
तस्वीर: dapd
Welthandelsorganisation Sitz in Genf
तस्वीर: picture-alliance/dpa
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