जाति के आधार पर जनगणना बाद में | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 12.08.2010
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जर्मन चुनाव

जाति के आधार पर जनगणना बाद में

भारत सरकार ने साफ कर दिया है जाति के आधार पर जनगणना किस तरह होगी इसका अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट करेगी. भारत में मंत्रियों के समूह ने बुधवार को ही कहा है कि भारत की आबादी गिनी जाए, तो उसमें जाति का जिक्र हो.

प्रणब मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी

लोकसभा के नेता प्रणब मुखर्जी ने संसद में कहा, "मंत्रियों के समूह ने कहा है कि जनगणना की विश्वसनीयता को प्रभावित किए बिना जाति का जिक्र किया जाएगा." इससे पहले विपक्षी पार्टियों ने जातिगत जनगणना के फैसले पर सवाल उठाए थे. फिलहाल भारत में लोगों की कुल संख्या गिनी जा रही है, इसके बाद बायोमेट्रिक स्तर पर रजिस्ट्रेशन होगा और उस दौरान जातियों का जिक्र होगा.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हालांकि जाति वाले मामले पर अभी कैबिनेट में चर्चा होनी बाकी है. उन्होंने कहा, "क्यों और कब, अभी इस सवाल का उत्तर नहीं मिला है." बीजेपी, समाजवादी पार्टी और जेडीयू जैसी पार्टियों ने सदन में कार्यवाही के दौरान मांग की कि शुरुआती स्तर पर ही जातिगत जनगणना होनी चाहिए. मुलायम सिंह ने कहा, "आप हमें बेवकूफ समझते हैं. बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कभी होगा ही नहीं."

बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विवाद हुआ, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने इसे सुलझाने कि लिए मंत्रियों का समूह गठित कर दिया. मुखर्जी ने बताया कि समूह ने अलग अलग पार्टियों के मतों को समझते हुए इस मुद्दे पर विचार किया. गुरुवार को ज्यादातर विपक्षी पार्टियों की राय थी कि बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन एक लंबी प्रक्रिया है और वहां तक पहुंचने में काफी वक्त लगेगा.

उनका तर्क है कि सिर्फ उन नागरिकों की तस्वीर और अंगुलियों की छाप (बायोमेट्रिक) ली जाएगी, जिनकी उम्र 15 साल से ज्यादा है और ऐसे में आबादी का एक बड़ा हिस्सा इससे अलग रह जाएगा. हंगामे को देखते हुए लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी. इस दौरान विपक्षी पार्टियों ने प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और सहमति बन गई कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में बयान देगी.

शरद यादव का कहना है, "यह काम 100 साल में भी नहीं हो पाएगा. 15 साल पहले तय हुआ था कि वोटर आई कार्ड दिया जाएगा, अब तक यह भी पूरी तरह अमल में नहीं लाया जा सका है."

सरकार की योजना है कि नवंबर से बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया जाए. इसके लिए देश भर में कैंप लगेंगे और लोगों की तस्वीरों के अलावा उनकी अंगुलियों के छाप लिए जाएंगे. उसी वक्त जाति भी पूछी जाएगी. भारत में आखिरी बार 1931 में जातिगत जनगणना हुई थी.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः महेश झा

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