ग्वालियर से दिल्ली तक किसानों का मार्च | दुनिया | DW | 04.10.2012

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दुनिया

ग्वालियर से दिल्ली तक किसानों का मार्च

करीब 35 हजार किसान ग्वालियर से दिल्ली तक मार्च कर रहे हैं ताकि सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींच सकें. मार्च में देश भर के किसान हिस्सा ले रहे हैं.

गांधी जयंती के अगले दिन शुरू हुआ यह मार्च 29 अक्टूबर को दिल्ली पहुंच कर खत्म होगा. मार्च आयोजित करने वाले एकता परिषद के प्रवक्ता अनीश थिलेंकरी ने बताया, "करीब 35 हजार लोग ग्वालियर से चल पड़े हैं और जब तक वे नई दिल्ली पहुचेंगे यह संख्या बढ़ कर एक लाख तक पहुंच जाएगी." अनीश के अनुसार मार्च में 25 राज्यों के किसान हिस्सा ले रहे हैं, "हम मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से गुजरते हुए जाएंगे ताकि सबका ध्यान अपनी ओर खींच सकें."

मार्च में हिस्सा लेने वाले अधिकतर लोग गरीब किसान हैं या अल्संख्यक हैं जिनका मानना है कि सरकार उनके विकास के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है. इसमें उड़ीसा की जनजातियां और दक्षिण भारत के मछुआरे भी शामिल हैं. इन लोगों का कहना है कि सरकार गलत कारण बता कर इनसे जमीन पर अधिकार छीन लेती है जो इनकी रोजी रोटी है. वे सरकार से नई भूमि सुधार नीतियों की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि देश में ऐसी अदालतें बनें जहां जमीन के अधिकारों पर कम वक्त में फैसला लिया जा सके.

थिलेंकरी ने कहा, "हमारी मांग है कि जमीन का इस्तेमाल केवल खेती के लिए ही किया जाए और एक ऐसी राष्ट्रीय नीति बनाई जाए जो आज तक कभी बनाई ही नहीं गयी." थिलेंकरी ने बताया कि किसानों में सरकार को ले कर काफी नाराजगी है, "जब गरीब लोगों को जमीन चाहिए होती है तो केंद्र सरकार कहती है कि यह राज्य सरकार का मुद्दा है, लेकिन जब बड़ी कंपनियों की या आर्थिक मामलों की बात आती है तो केंद्र सरकार उसी जमीन को अधिगृहित कर लेती है."

इसी तरह का प्रदर्शन 2007 में भी किया गया था. उस समय 25 हजार किसानों ने इसमें शिरकत की थी. कर्ज में डूबे इन किसानों में 11 की मार्च के दौरान ही मौत हो गयी. अनीश का कहना है, "2007 में 28 दिन के मार्च के बाद कई वादे किए गए थे, लेकिन किसी को भी पूरा नहीं किया गया." भार के अंग्रेजी अखबार हिंदू ने मार्च में शामिल होने वाली एक आदिवासी महिला से बात की तो उसने कहा, "अधिकारी कहते हैं कि ऊपर से ऑर्डर ले कर आओ, तो हम दिल्ली जा रहे हैं ताकि ऊपर से ऑर्डर ला सकें."

ये किसान हर रोज 15 से 20 किलोमीटर तक का सफर तय करेंगे.

रिपोर्टः आईबी (एएफपी/डीपीए)

संपादनः एनआर

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