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वियना में ईरान के प्रतिनिधी अली बाघेरी
वियना में ईरान के प्रतिनिधी अली बाघेरीतस्वीर: Askin Kiyagan/AA/picture alliance

ईरान के साथ परमाणु करार पर बातचीत कहां तक पहुंची

५ अगस्त २०२२

ईरान के साथ दुनिया के ताकतवर देशों की करार को दोबारा बहाल कराने के लिए बातचीत शुरू हो गई है और कुछ मुद्दों के सुलझने की बात भी कही जा रही है. क्या इस बैठक के नतीजे में परमाणु करार पर वापसी हो सकेगी.

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ईरान के साथ परमाणु करार पर वियना में वार्ताकारों ने फिर बातचीत शुरू कर दी है. दुनिया के ताकतवर देशों और ईरान के प्रतिनिधियों की यह बातचीत मार्च के बाद अब हो रही है. अमेरिका डॉनल्ड ट्रंप के शासन में जिस परमाणु करार से बाहर आ गया था उसे दोबारा से बहाल करने के लिए यह बातचीत 2021 में शुरू हुई. अमेरिका के बाहर आने की वजह से यह करार खटाई में पड़ गया था. ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने की कोशिश में अमेरिका और पश्चिमी देश जितनी जल्दी हो सके इस करार को बहाल कराना चाहते हैं.

कहां अटका है मामला

यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बची हुई बाधाओं को दूर करने में कुछ प्रगति हुई है. इनमें अमेरिका की तरफ से यह गारंटी भी शामिल है कि वह भविष्य में अपनी बातों से पीछे नहीं हटेगा. इस अधिकारी ने कहा, "हमारे पास अब पक्के तौर पर गारंटी है, मेरी समझ कहती है कि ईरान खुश है और जो कुछ शब्दों में लिखा है उससे संतुष्ट है."

ईरान की एक मांग यह भी थी कि इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को अमेरिकी विदेश विभाग के विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची से बाहर किया जाये. फिलहाल इसे बातचीत के मुद्दे से बाहर कर दिया गया है और इस पर करार होने के बाद चर्चा होगी.

अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कुछ मुद्दों पर सहमति होनी बाकी है. यूरोपीय संघ के अधिकारी ने बताया, "इनमें से कुछ मुद्दे प्रतिबंध हटाने से जुड़े हैं तो कुछ परमाणु ऊर्जा से जुड़े. ये सवाल मार्च में नहीं थे क्योंकि इस बीच ईरान ने अपने कार्यक्रम में काफी प्रगति कर ली है. हम लोग काफी थक गये हैं, मैं यहां चार हफ्ते रहूं यह कल्पना से बाहर है. यह अगला दौर नहीं है, हम यहां शब्दों को अंतिम रूप देने आये हैं. मुझे लगता है कि सचमुच संभावना है लेकिन यह आसान नहीं."

यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल
यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेलतस्वीर: Olivier Matthys/AP Photo/picture alliance

अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, "समझौता मेज पर है" और ईरान को "इसे स्वीकार करना चाहिये." किर्बी ने यह भी कहा, "आपने सुना होगा राष्ट्रपति ने कहा कि हम ईरान के इस करार को स्वीकार करने का इंतजार करते नहीं रह सकते."

करार की कोशिशें

जून के आखिर में कतर ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी की थी. उम्मीद की गई कि प्रक्रिया रफ्तार पकड़ेगी लेकिन कोई खास प्रगति नहीं हुई. आखिरी कोशिश के तौर पर यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने पिछले महीने समझौते का एक प्रस्ताव पेश किया और सभी पक्षों से कहा कि वो इसे स्वीकार करें ताकि "खतरनाक परमाणु संकट" से बचा जा सके. बोरेल ने बताया कि प्रस्ताव में "दोनों पक्षों की ओर से हासिल कठिन समझौते" शामिल थे. साथ ही प्रतिबंध उठाने और उन परमाणु कदमों का जिक्र था जो 2015 के समझौते में वापसी के लिए जरूरी हैं.

यह भी पढ़ेंः अमेरिका ईरान की सुलह कराने में जुटे हैं बड़े देश

यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि एनरिक मोरा की देखरेख में हो रही बातचीत गुरुवार को शुरू हुई. ईरानी और रूसी प्रतिनिधियों ने एक अलग से बैठक भी की. ये दोनों पारंपरिक रूप से एक दूसरे के ज्यादा करीब रहे हैं.

ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, रूस और अमेरिका ने जुलाई 2015 में ज्वाइंट कंप्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन पर दस्तखत किये थे. इन सभी देशों के प्रतिनिधि इस बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं लेकिन ईरान और अमेरिका के अधिकारी आमने सामने नहीं आयेंगे. यह करार ईरान के परमाणु कार्यक्रम  शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रखने की गारंटी देता है इसके बदले में धीरे धीरे प्रतिबंधों को उठाने की बात थी. 

करार टूटने के बाद ईरान ने संवर्धन की सीमा 60 फीसदी के पार तक ले गया है
करार टूटने के बाद ईरान ने संवर्धन की सीमा 60 फीसदी के पार तक ले गया हैतस्वीर: AP

संवर्धन 60 फीसदी की सीमा के पार

2018 में जब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी ने समझौते से बाहर निकलने का एकतरफा फैसला कर लिया तो ईरान अपने वादे से पीछे हट गया. इसके बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की जो सीमा करार में 3.67 फीसदी तय की गई थी उसे तोड़ कर 2021 के शुरुआत में 20 फीसदी तक चला गया. इसके बाद उसने 60 फीसदी की सीमा का भी उल्लंघन कर दिया और 90 फीसदी के करीब जा रहा है जो परमाणु बम बनाने के लिये जरूरी होता है.

संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन यानी आईएईए के प्रमुख रफायल ग्रोसी ने मंगलवार को चेतावनी दी कि ईरान का "परमाणु कार्यक्रम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है" और "उसकी महत्वाकांक्षा और क्षमता बढ़ रही है."

बातचीत से पहले अधिकारी बहुत सावधानी से उम्मीदें जाहिर कर रहे थे. इसके साथ ही उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि संबंधित पक्षों में अभी काफी दूरियां हैं. इनमें ईरान की वो मांग भी शामिल है जिसमें आईएईए की तरफ से चल रही जांच को रोकने की गारंटी की मांगी गई है.     

अमेरिकी दल के प्रमुख रॉब मेले और ईरानी दल के प्रमुख अली बाघेरी ने ट्विटर पर बातचीत शुरू होने से पहले कहा कि वो भरोसे का साथ आये हैं इसके साथ ही उन्होंने एक दूसरे पर जिम्मेदारी भी डाली.

बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद करार की कोशिशें शुरू हुईं
बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद करार की कोशिशें शुरू हुईंतस्वीर: Jim Watson/REUTERS

विश्लेषक मान रहे हैं कि पुराने करार को फिर से लागू करना ही सबसे बढ़िया विकल्प है. कार्नेजी एंडोमेट फॉर इंटरनेशनल पीस की सीनियर फेलो सुजाने डीमैगियो का कहना है, "ईरान के साथ परमाणु संकट वो आखिरी चीज होगी जो अमेरिका चाहेगा क्योंकि यह बहुत आसानी से क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जायेगा." इसी तरह विदेश मामलों की यूरोपीय परिषद की विश्लेषक एली गेरानमायेह का कहना है, "आखिरकार अमेरिका और ईरान जानते हैं कि जेसीपीओए के बिखरने का विकल्प भयावह होगा."

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बैठक में सारे मुद्दे सुलझ जायेंगी इसकी उम्मीद कम है लेकिन यह बातचीत को निर्णायक बिंदु तक पहुंचाने के लिये रास्ता जरूर बना सकती है. 

एनआर/ओएसजे (एएफपी)

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