आकाशगंगा की धूल | मंथन | DW | 05.02.2014
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मंथन

आकाशगंगा की धूल

अंतरिक्ष के अनंत कोने धूल से भरे हैं और समझा जाता है कि सुपरनोवा ही इस धूल की वजह है. खास तौर पर किसी ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों में. दुनिया की सबसे बड़ी टेलिस्कोप ऑब्जर्वेटरी ने इसकी पहचान की है.

चिली में आटाकामा लार्ज मिलिमीटर एरे यानी आल्मा ने बताया है कि उसके टेलिस्कोपों से मिले डेटा के मुताबिक सुपरनोवा अंतरिक्ष में धूल बनने का अहम स्रोत हो सकते हैं. उनके टेलिस्कोपों ने वे तस्वीरें उतारी हैं, जिनमें सुपरनोवा धूल का गुबार उड़ाता दिख रहा है.

समाचार पत्रिका साइंस डेली ने यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के खगोलविद रेमी इनडेबेटू के हवाले से रिपोर्ट दी, "हमने एक विशालकाय धूल का गुबार पाया है, जो एक नए सुपरनोवा से निकला है." इस घटना के बाद खगोलविद कुछ नई जानकारियों को सामने ला सकते हैं.

चिली के रेगिस्तान में दुनिया की सबसे बड़ी टेलिस्कोप ऑब्जर्वेटरी है, जिसे यूरोप, अमेरिका और जापान जैसे देशों के सहयोग से शुरू किया गया है. यहां करीब 66 एंटीना हैं, जो अंतरिक्ष से अहम जानकारी जुटा रहे हैं. चारों तरफ मरुस्थल होने की वजह से इन्हें स्पष्ट तरंगें मिलती हैं और जानकारों का कहना है कि समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई पर होने से यह अध्ययन का अच्छा केंद्र है. यहां काम करने वाले भूविज्ञानी जिआनिनी मारकोनी का कहना है, "अंतरिक्ष शोध के लिए यह मील का पत्थर है क्योंकि यह अब तक दुनिया में बनाई गई सबसे बड़ी ऑब्जर्वेटरी है."

साल 2009 से आल्मा अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें ले रहा है और इसे यकीन है कि इसकी खोजों से अंतरिक्ष के बारे में मानव समाज की जानकारी बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी. सुपरनोवा और क्षुद्र ग्रहों के अलावा यह आकाशगंगाओं और दूर अंतरिक्ष की भी तस्वीरें लेने की कोशिश कर रहा है.

एजेए/एएम

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