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दुनिया

"भारत से दोस्ती का मतलब पाक से दुश्मनी न हो"

अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी दो दिन के दौरे पर भारत में हैं. डॉयचेवेले की दरी/पश्तो सेवा के उप-प्रमुख मसूद सैफुल्लाह दोनों देशों के बढ़ते रिश्तों से जुड़े आयामों पर रोशनी डाल रहे हैं.

अफगानिस्तान इस क्षेत्र में भारत को अपने मुख्य सामरिक सहयोगियों में से एक मानता है. साथ ही ये भारत के भी हित में है कि अफगानिस्तान में स्थिरता रहे और तालिबान को नियंत्रण में रखा जा सके. अभी तक भारत ने अफगानिस्तान को ज्यादातर असैन्य मदद ही दी है. पश्चिमी प्रांत हेरात में सलमा बांध और अफगानिस्तान की नई संसद को उन कामों में गिना जा सकता है जो 2001 से अफगानिस्तान में भारत की लगभग दो अरब डॉलर की विकास मदद से संभव हो पाए हैं.

हाल के सालों में अफगानिस्तान से भारत की उम्मीदें भी बढ़ी हैं और इसीलिए भारत-अफगान रिश्तों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं. भारत ने अफगानिस्तान के लिए अपनी मदद का विस्तार किया है और अब वो अफगान सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग दे रहा है और अफगानिस्तान को सैन्य साजोसामान भी मुहैया करा रहा है.

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भारत ने इस साल अफगानिस्तान को चार लड़ाकू हेलीकॉप्टर दिए हैं. अफगानिस्तान और भारत के बीच सैन्य सहयोग और बढ़ने की पूरी गुंजाइश है क्योंकि अफगानिस्तान खुद को पाकिस्तान से दूर कर रहा है. दूसरी तरफ अमेरिका की ये उम्मीद भी खत्म होती जा रही है कि पाकिस्तान अफगान शांति प्रक्रिया में कोई मदद करेगा. इसीलिए अमेरिका चाहता है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार भारत के ज्यादा से ज्यादा नजदीक हो. अफगानिस्तान, भारत और अमेरिका के नेताओं की अगले महीने एक बैठक होने वाली है जिसमें सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी. अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इस बैठक की घोषणा की है.

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लेकिन भारत के साथ नजदीकी रिश्ते रखने की कीमत भी अफगानिस्तान को चुकानी पड़ सकती है. इसकी वजह है तालिबान चरमपंथी जिन्हें पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आईएसआई के करीब समझा जाता है. तालिबान ने भारत को चेतावनी दी है कि वो अफगान संकट से दूर ही रहे. माना जाता है कि अगर भारत और अफगानिस्तान के नेता किसी तरह के व्यापक सैन्य सहयोग पर राजी हो गए तो तालिबान के हमले तेज हो सकते हैं.

अफगानिस्तान में ऐसे बहुत से विशेषज्ञ हैं जो मानते हैं कि अफगानिस्तान की सरकार को भारत और पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों में एक संतुलन कायम करना होगा और वो इन दोनों दशों में किसी एक को अपना दुश्मन न बनाए. लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो पाकिस्तान को अलग थलग करने के लिए अफगान राष्ट्रपति गनी की तारीफ करते हैं. वो समझते हैं कि भारत के सैन्य सहयोग और भारत-अफगान-अमेरिकी गठजोड़ से पाकिस्तान पर दबाव पड़ेगा और वो तालिबान को बातचीत की मेज तक लाने के लिए मजबूर होगा.

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दूसरी तरफ अफगान लोग व्यापार के मोर्चे पर भी भारत की मदद चाहते हैं. अफगानिस्तान में इस बात पर सब सहमत है कि भारत से आने वाली नागरिक मदद जारी रहे. अपने इस भारतीय दौरे में अशरफ गनी भारतीय निवेशकों से भी मिलेंगे और उनसे अफगान बाजार में उतरने के लिए कहेंगे.

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