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हारों के बाद स्टार ट्रेनर मगाथ की विदाई

२६ अक्टूबर २०१२

फेलिक्स मगाथ जर्मनी के स्टार ट्रेनर थे. वोल्फ्सबुर्ग को उन्होंने अपने बलबूते पर जर्मन लीग का चैंपियन बनाया था, लेकिन इस सीजन में लगातार विफलता के बाद उन्हें निकाला गया. ट्रेनिंग के मगाथ स्टाइल के दिन लद गए लगते हैं.

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तस्वीर: Getty Images

किसी विदेशी टीम की ट्रेनिंग या कुछ समय का आराम. मगाथ के सामने अब ये दो विकल्प हैं, यह संभावना बहुत कम बची है कि कोई जर्मन टीम इस समय उन्हें लेने को तैयार होगी. फेलिक्स मगाथ का भविष्य इस समय पूरी तरह अंधेरे में है. तीन साल पहले चैंपियन बनने वाली वोल्फ्सबुर्ग की टीम इस सीजन में सात राउंड के बाद तालिका में अंतिम स्थान पर है और ट्रेनिंग का मगाथ का तरीका खिलाड़ियों का भरोसा जीतने में नाकाम साबित हुआ है. टीम से हटाए जाने के बाद उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन यह साफ है कि बुंडेसलीगा में ताकतवर मगाथ का सिस्टम विफल हो गया है.

मार्च 2011 में जब मगाथ को फोल्क्सवागन कार के क्लब का दूसरी बार जिम्मा मिला था तो उन्होंने कहा था, "मुझे विश्वास है कि वोल्फ्सबुर्ग बुंडेसलीगा में मेरा अंतिम मुकाम होगा." करीब डेढ़ साल बाद यह सच साबित होता लग रहा है. क्योंकि 2005, 2006 और 2009 में जर्मन चैंपियन रहे ट्रेनर के साथ काम करने को शायद ही कोई क्लब तैयार होगा.

मगाथ को हटाए जाने की अटकलें तो पिछले कुछ हफ्ते से लग रही थीं और उन्हें हटाए जाने की घोषणा से एक दिन पहले ये खबर भी आई कि उन्हें तुर्की और इटली से ऑफर है, लेकिन खुद मगाथ ने कभी यह बात नहीं छुपाई कि वे इंगलिश प्रीमियर लीग में जाना चाहेंगे. खासकर इसलिए कि जर्मन क्लबों के विपरीत इंगलिश क्लबों में मैनेजर और ट्रेनर एक ही व्यक्ति होता है. फिलहाल उनका पूर्वी यूरोप के किसी धनी क्लब में जाना भी संभव दिखता है.

तीन साल पहले बुंडेसलीगा में वोल्फ्सबुर्ग की अप्रत्याशित जीत के बाद से मगाथ की प्रतिष्ठा लगातार गिरी है. वोल्फ्सबुर्ग के बाद वे शाल्के चले गए थे जहां अली करीमी और आंगेलोस कारिस्तेयास जैसे लोकप्रिय खिलाड़ियों की बिक्री के बाद प्रशंसक उनके खिलाफ हो गए थे. वोल्फ्सबुर्ग में भी तीन सीजन में उन्होंने पूरी तरह से दो नई टीमें बनाईं. इसके अलावा ट्रेनिंग के उनके अजीबोगरीब तरीकों ने उन्हें हमेशा नकारात्मक सुर्खियां दिलाईं.

अपने निरंकुश अंदाज और काम के तरीके के कारण 59 वर्षीय ट्रेनर आज की पीढ़ी के खिलाड़ियों का दिल जीतने में नाकाम रहे हैं. वे इन खिलाड़ियों से उतने ही दूर हैं जितना वोल्फ्सबुर्ग क्लब उनके नेतृत्व में यूरोप लीग में जाने के अपने लक्ष्य से. पिछले दिनों में उनके ट्रेनिंग के तरीकों पर खबरें सार्वजनिक हुईं जिनका लक्ष्य उन्हें कमजोर करना था. मसलन पिछले दिनों उन्होंने अपने खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दौड़ के दौरान कम पानी दिया ताकि वे एक दूसरे का ख्याल रखना सीख सकें. इसके पहले एक मैच में खिलाड़ियों ने एक साथी खिलाड़ी को मैदान पर गिरा छोड़ दिया था.

जब तक जीत हो रही थी तब तक क्लब को पैसा देने वाली फोल्क्सवागन कंपनी के लिए यह सब कोई मुद्दा नहीं था. अपने फुटबॉल विभाग को मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा समझने वाली कार कंपनी के लिए सिर्फ एक चीज मायने रखती है, वह है सफलता. इसमें उनके लिए ट्रेनिंग के तरीके और अच्छा पैसा पाने वाले खिलाड़ियों की संवेदनशीलता कोई मायने नहीं रखती. लेकिन जब छवि के साथ सफलता भी प्रभावित होने लगी तो क्लब ने मगाथ को विदा करने का फैसला लिया. हालांकि औपचारिक तौर पर सहमति में हुई और विदाई की जगह जुदाई शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.

अब वोल्फ्सबुर्ग नई शुरुआत कर रहा है. मगाथ की तरह फिलहाल किसी को सारे पद एक साथ नहीं मिलेंगे, वे ट्रेनर, मैनेजर, मैनेजिंग डाइरेक्टर और स्टेडियम के पेपर से प्रकाशक थे. इसके अलावा मगाथ जैसे प्रभावी ट्रेनर आने पर ही क्लब को पहले जितना बजट मिलेगा. फिलहाल क्लब की गैरपेशेवर टीम के कोच लोरेंस गुंठर कोएस्टनर बुंडेसलीगा टीम का नेतृत्व करेंगे.

एमजे/ओएसजे (एसआईडी)

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