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सीरिया पर यूएन के तेवर कड़े

५ अक्टूबर २०१२

सीरिया पर आखिरकार संयुक्त राष्ट्र में सहमति हो गई. सुरक्षा परिषद ने एक स्वर से तुर्की पर सीरिया के हमले की कड़ी निंदा की है. यूएन ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय कानून का इस तरह उल्लंघन वह तुरंत बंद करे.

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तस्वीर: picture-alliance/dpa

सीरिया पर हुए इस समझौते में सुरक्षा परिषद ने तुर्की पर किए गए मोर्टार हमले की बहुत कड़े शब्दों में निंदा की. इस निंदा प्रस्ताव का शुरुआती मसौदा रूस ने खारिज कर दिया था और एक नर्म प्रस्ताव का मसौदा दिया कि तुर्की और सीरिया दोनों संयम बरतें. हालांकि पश्चिमी देशों ने रूस के प्रस्ताव का विरोध किया था लेकिन पुराने ड्राफ्ट में बदलाव करके रूस की कुछ बातों को मान लिया.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के किसी भी मुद्दे पर इस तरह एकमत होना सामान्य नहीं है क्योंकि चीन और रूस प्रतिबंधों के मुद्दे पर प्रस्ताव को हमेशा वीटो कर देते हैं.

निंदा प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों ने सीरिया सरकार से मांग की है कि वह अपने पड़ोसी देश की संप्रभुता और सीमा की अखंडता का ध्यान रखे. साथ ही इस तरह अंतरराष्ट्रीय कानून का हनन करना रोकने की मांग की गई है. प्रस्ताव में कहा गया है, "सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने समझा है कि यह घटना पड़ोसी देशों और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता पर सीरियाई संकट के प्रभाव को दिखाती है."

बुधवार को सीरियाई सीमा से तुर्की के सीमाई शहर में किए गए मोर्टार हमले में तुर्की के पांच लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र के निंदा प्रस्ताव में कहा गया है, "सुरक्षा परिषद संयम की मांग करता है."

रूस ने जोर दिया कि पुराने ड्राफ्ट में से एक वाक्य निकाला जाए कि 'सीरिया का हमला अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है.' नए निंदा प्रस्ताव में 'देश और पड़ोसी देशों की शांति और स्थिरता' पर चिंता जताई गई है. रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद में पिछले महीनों में सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार की निंदा करने के तीन प्रस्तावों को वीटो कर दिया.

एएम/एमजे (रॉयटर्स, एएफपी, डीपीए)