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सचिन ने बनाया शतकों का अर्धशतक

२० दिसम्बर २०१०

सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट की दुनिया में कमाल, एंटी हाइड्रोजन एटमें की पकड़ के साथ साथ क्रिसमस के बाजारीकरण पर रिपोर्टे श्रोताओं को पसंद आयी,क्या लिखते हैं वे, आइए जाने....

https://p.dw.com/p/Qgqy
तस्वीर: AP

खोज में एंटी हाइड्रोजन एटमों को पकड़ने में सफलता के बारे में विस्तृत जानकारी सुनने को मिली. इसके उपयुक्ता पर डाला गया प्रकाश काफी जानकारीयुक्त लगा. पॉडकास्ट पर वेस्ट वाटच सुना. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जर्मनी और भारत दोनों देशों कि सुनिश्चित दावेदारी और इस पर अंगेला मेर्केल और मनमोहनसिंह के बीच हई बातचीत पर जानकारी काफी महत्वपूर्ण लगी. लाइफ लाइन में संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी और इसमें हो रहे उपयोगी शोधों की जानकारी भी काफी उपयोगी लगी.

संदीप जावले, मार्कोनी डी एक्स क्लब, परली वैजनाथ (महाराष्ट्र)

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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के चलते सीबीआई जितनी गंभीरता 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच करे, यह कहना कठिन होगा कि सीबीआई स्वायत्त और निष्पक्ष जांच एजेंसी है.

डॉ. हेमंत कुमार, प्रियदर्शिनी रेडियो लिस्नर्स क्लब, भागलपुर, बिहार

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Sachin Tendulkar
तस्वीर: AP

बल्लेबाजी के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट मैचों में शतकों का अर्धशतक पूरा करके क्रिकेट जगत में नया इतिहास रचने के साथ ही पिछले 77 दिन से चला आ रहा लंबा इंतजार भी खत्म कर दिया. रिकॉर्ड 175वें टेस्ट मैच की 286वीं पारी खेलने वाले तेंदुलकर दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 50 टेस्ट शतक लगाए हैं. उनके नाम पर एकदिवसीय मैचों में 46 शतक दर्ज हैं और इस तरह से वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का सैकड़ा पूरा करने के करीब हैं.

धीरेन्द्र गिरी, फेसबुक से

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कांग्रेस अब सवा सौ साल की उम्र तय करने जा रही है तो सहज ही ये सवाल उठता है कि सोनिया और राहुल क्या इस उम्रदराज पार्टी के कायाकल्प को वांछित अंजाम दे पाएंगे ...? इस देश में जहां पचास प्रतिशत से ज्यादा लोग युवा हैं वहां कांग्रेस के अंदर भी बदलाव की एक बड़ी जरूरत है ...इसमें कोई दो राय नही है कि अपने गौरवशाली इतिहास के तहत कांग्रेस अपने सेकुलर चरित्र को छोटे मोटे विवादों के बावजूद काफी कुछ बचाने में कामयाब रही है ...समय ने कुछ प्रश्न इस राजनीतिक दल के आगे खड़े कर दिए हैं सबसे बड़ा मुद्दा है - भ्रष्टाचार का ..लोग कहते हैं कि मनमोहन सिंह ईमानदार प्रधानमंत्री हैं पर उनके मंत्री बेईमान 2 जी ने इस बहस को आम आदमी के बीच ला खड़ा किया है ...कांग्रेस के कर्णधारों को समझ लेना चाहिए कि 21वीं सदी का भारत पारदर्शिता चाहता है ..उसे अब दागदार नेता पसंद नही हैं ये वक्त कठोर फैसले लेने का है ...

प्रद्युम्न शुक्ला, फेसबुक से

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Aung San Suu Kyi fordert Meinungsfreiheit in Myanmar
तस्वीर: AP

अंतरा में बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची से बातचीत पहली बार सुनने को मिली. 20 साल नज़रबंद रहने के बावजूद उनकी हिम्मत की दाद देनी होगी. बातचीत से पता चला कि उन्हें बर्मा के लोगों के प्रति काफी एहमियत है और उनके मुहीम में वह जरुर कामयाब होंगी इसका हमें पूरा विश्वास है लेकिन उसके लिए उन्हें समय जरुरु लगेगा, लेकिन अंत में उन्हीं की ही जीत होगी.

सविता जावले, मार्कोनी डी एक्स क्लब, परली वैजनाथ (महाराष्ट्र)

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मैं रामायण के रूस में पचास साल होने से काफी गौरव महसूस कर रहा हूं. एक अलग संस्कृति के देश में हमारी संस्कृति का इस तरह सम्मान करना हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि हमारी सोच और दोस्ती के साथ साथ एक दूसरे के धर्म को भी सम्मान देते है.

बंगलादेश में भी पाकिस्तान की तरह कट्टरवादी हो रहा है इसे रोक पाना वहां की सरकार के बस की बात नहीं है. कितने दुःख की बात है कि अप्रमाणित बातों पर एक औरत अबला पर इतने जुल्म.

निर्मल सिंह राणा, इमेल से

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Flash-Galerie Weihnachtsmärkte
तस्वीर: picture-alliance/dpa

नोरिस प्रीतम की रिपोर्ट क्रिसमस का बाजारीकरण पढ़कर एक सच सामने आया कि आज हम अपने हर रिश्ते और परम्परा के निर्वहन में कितने औपचारिक और आडम्बरी हो गए है. हमें भी सुभद्रा कुमारी चौहान की ये पंक्तियां बरबस याद आ रहीं हैं - बार बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी; गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी. अब तो शुभकामनाएं देना भी एक औपचारिकता भर रह गई हैं, और इस औपचारिकता का तो कम से कम मैं भी निर्वाह कर ही दूं. क्रिसमस और नव वर्ष के लिए -

नई भोर की नई सुबह, एक नया सवेरा हुआ उदय;

देने तुमको उर्जा अपार, नववर्ष तुम्हारे खड़ा द्वार,

सभी भाई बहनों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

प्रमोद माहेश्वरी, फतेहपुर. शेखावाटी (राजस्थान)

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संकलनः विनोद चढ्डा

संपादनः आभा एम