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समाज

भारत सरकार ने 'महाराजा' के लिए बोली मंगाई है

२७ जनवरी २०२०

एयर इंडिया में खरीद की अभिरूचि के लिए 17 मार्च तक की समयसीमा जारी की गई है. इससे पहले भी एयर इंडिया के 76 फीसदी हिस्से को बेचने की एक नाकाम कोशिश की जा चुकी है.

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Boeing 787 der Fluggesellschaft Air India
तस्वीर: imago images/Ralph Peters

भारत की केंद्र सरकार ने कर्ज में डूबी एयर इंडिया कंपनी में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए आरंभिक सूचना जारी कर दी है. सरकार की ओर से जारी दस्तावेज के मुताबिक "रणनीतिक विनिवेश" के तहत एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस के भी 100 फीसदी और संयुक्त उद्यम एआईएसएटीएस का 50 फीसदी हिस्सा बेचेगी.

इसके अलावा प्रबंधन नियंत्रण का अधिकार भी सफल बोली लगाने वाले के हाथ चला जाएगा. हालांकि 2018 में भी सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश की कोशिश की थी लेकिन तब ये कोशिश पूरी तरह से नाकाम रही थी क्योंकि एक भी बोली लगाने वाला सामने नहीं आया था.

कर्ज में डूबा एयर इंडिया

एयर इंडिया पर करीब 58,000 करोड़ का कर्ज है और वह घाटे में चल रही है. एयर इंडिया के पास कर्मचारियों के वेतन और ईंधन खरीदने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है. पिछले दिनों अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर कोई खरीदार नहीं मिलता तो एयर इंडिया को बंद करना पड़ेगा.

सरकार ने जो बोली दस्‍तावेज जारी किया है उसके मुताबिक अन्य देनदारियों के साथ संभावित खरीदार को 3.26 अरब डॉलर का कर्ज भी ग्रहण करना पड़ेगा. इससे पहले सरकार ने 2018 में एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव लेकर आई थी, लेकिन इस सौदे के लिए कोई तैयार नहीं हुआ. अब भारत सरकार ने कुल 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है.

टाटा समूह, सिंगापुर एयरलाइंस और इंडिगो ने साथ मिलकर अधिग्रहण को लेकर कोशिश की थी लेकिन बाद में वे इससे बाहर हो गए. 1932 में एयर इंडिया की स्थापना हुई थी. बाद में इसे महाराजा कहा जाने लगा और समय के साथ आसमान में इसका वर्चस्व भी बढ़ा लेकिन अनदेखी ने इसे फटेहाल बना दिया. साल दर साल कंपनी का घाटा बढ़ता गया और अब उसकी यह नौबत आ गई है. पिछले साल अगस्त में सरकारी तेल कंपनियों ने एयर इंडिया को ईंधन की सप्लाई रोक दी थी, कारण था समय पर भुगतान नहीं होना. जेट एयरवेज के डूबने के बाद से ही देश का एविएशन सेक्टर मंदी में डूबा हुआ है.

एए/आरपी (एएफपी)

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