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मादक पदार्थों की तस्करी बड़े पैमाने पर जारी

१९ फ़रवरी २००९

संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार अफ़गानिस्तान में अफ़ीम का उत्पादन घटा है फिर भी अफ़ीम उत्पादन में उसका स्थान दूसरा है. कोकीन की यूरोप में सबसे ज़्यादा मांग है.

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ग़ैरक़ानूनी उत्पादन का 90 प्रतिशत अफ़गानिस्तान सेतस्वीर: picture-alliance/ dpa

रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रान्तों में सुरक्षा बहुत कमज़ोर है और इस क्षेत्र के अधिकांश गांव अफीम की गैरकानूनी खेती में लगे हैं. 2007 में कुल 8,200 टन अफ़ीम की पैदावार हुई थी जबकि 2008 में यह घटकर 7,700 टन रह गई. लेकिन अभी भी दुनिया भर में जितनी ग़ैरकानूनी अफीम पैदा होती है, उसका नब्बे प्रतिशत हिस्सा अफगानिस्तान से ही आता है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार तस्करी पर टैक्स वसूल करके तालिबान प्रतिवर्ष बीस से तीस करोड़ डॉलर की कमाई कर रहा है.

Landwirt bei der Mohnernte in Afghanistan
अफ़ीम उत्पादन में आई कुछ कमीतस्वीर: AP

पाकिस्तान के ज़रिये अफगानिस्तान से बहुत बड़ी मात्रा में अफीम और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की भारत में तस्करी हो रही है. भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के उपमहानिदेशक ओमप्रकाश के अनुसार भारत में आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी की समस्या को एक साथ नहीं देखा गया है.ओमप्रकाश ने कहा कि पिछले पांच सालों में औसतन प्रतिवर्ष एक हज़ार किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गयी है और इसका चालीस से पचास प्रतिशत अफ़गानिस्तान से आता है.

कोकीन के लिए यूरोप सबसे बड़ा बाज़ार है और हेरोइन की तस्करी में यूरोप दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है.. यूरोप में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल में लाए जाने वाला मादक पदार्थ गांजा है और यूरोप की सात प्रतिशत जनता ने 2008 में इसका इस्तेमाल किया. पूर्वी यूरोपीय देशों के रास्ते पश्चिमी यूरोप के देशों में इसकी तस्करी हो रही है. रिपोर्ट के अनुसार मादक पदार्थों के तस्कर रूस से ट्रेन में सफ़र शुरू कर बेलारूस, पोलेंड और यूक्रेन पहुंचते हैं और फिर वहां से पश्चिमी यूरोपीय देशों में हेरोइन पहुंचाई जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित दवाओं की ख़रीद-फ़रोख्त में इंटरनेट भी एक बड़ी भूमिका निभा रहा है. हेरोइन और कोकीन बनाने के लिए ज़रूरी रासायनिक पदार्थों की बिक्री इंटरनेट के ज़रिये की जा रही है. रिपोर्ट में सिफ़ारिश की गई है कि इस चुनौती से निपटने के लिए दुनिया में समन्वित प्रयास किए जाने की ज़रूरत है.