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नवनाजी हत्याकांड में चौथी गिरफ्तारी

२९ नवम्बर २०११

जर्मनी के नवनाजी गुट के हाथों हुए हत्याकांड में चौथे संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई है. अभियोजकों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी. 36 साल के राल्फ वोलेबेन ने हत्या और हत्या की कोशिश के छह मामलों में मदद की.

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तस्वीर: picture-alliance / dpa

नवनाजियों की तिकड़ी 13 साल तक गुप्त रूप से सक्रिय थी. माना जा रहा है कि उसे बंदूक और गोलियां राल्फ ने दी थीं. सरकार के मुताबिक नेशनल सोशलिस्ट अंडरग्राउंड संगठन के दो सदस्यों ने नौ प्रवासियों को मार दिया इसके अलवा 4 नवंबर को इनके साथ हुई गोलीबारी में एक पुलिसवाले की भी मौत हो गई. इन दोनों लोगों की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद इस गैंग की तीसरी सदस्य बिटे शाएपे ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया.

Totenkopf Tätowierung auf einem Neo-Nazi Kopf
तस्वीर: AP

वोलेबेन जर्मनी में प्रवासियो का विरोध करने वाली नेशनल डेमोक्रैटिक पार्टी, एनडीपी के सदस्य हैं. जर्मनी के कुछ राज्य विधानसभाओं में इस पार्टी के खाते में कुछ सीटें हैं लेकिन राष्ट्रीय संसद में इसे कभी जगह नहीं मिली. जुलाई 2006 से मई 2008 तक वोलेबेन थुरिंगिया राज्य में एनडीपी के उप नेता थे. सरकार ने इस बारे में सोचना शुरू कर दिया है कि क्या इस पार्टी पर उसकी नवनाजी सोच के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद है.

संदिग्ध को जेना में सशस्त्र पुलिस ने गिरफ्तार किया. यह शहर इस गैंग का गढ़ है. वोलेबेन इस शहर में एनपीडी का स्थानीय प्रमुख है. अभियोजकों के मुताबिक वोलेबेन पर आतंकवादी गुट एनएसयू को समर्थन देने का आरोप भी लग सकता है. एक हफ्ते पहले वोलेबेन ने एक अखबार से बातचीत में इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने नवनाजियों के तिकड़ी की मदद की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि 1998 के बाद से उनकी इस तिकड़ी से मुलाकात नहीं हुई. पुलिस का कहना है कि 2001 या 2002 में वोलेबेन ने इस तिकड़ी को एक बंदूक दी. इसके साथ ही एक और संदिग्ध का इंतजाम किया जिसने अपनी पहचान के कागजात इस तिकड़ी को उधार दिए.

NPD-Aufmarsch in Halberstadt
तस्वीर: AP

वोलेबेन के और शाएपे के अलावा पुलिस ने दो और लोगों को भी गिरफ्तार किया है. इनके नाम होल्कर जी और आंद्रे ई हैं इन दोनों पर गैंग की सहायता करने का आरोप है.

जर्मनी में कुछ ही समय पहले नवनाजियों का यह गिरोह सामने आया है. इन लोगों पर प्रवासियों के खिलाफ हमले करने और उनकी जान लेने के आरोप हैं. इस मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि मुमकिन है कि देश ने धुर दक्षिणपंथी आतंकवाद की तरफ से जान बूझ कर आंख मूंदे रखा. हालांकि जर्मनी लगातार अपने नाजी अतीत को अपने ऊपर एक कलंक मानता है और उस पर शर्मिंदगी जाहिर करता है. चांसलर अंगेला मैर्केल से नेशनल डेमोक्रैटिक पार्टी पर राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है. 2003 में संवैधानिक कोर्ट ने ऐसी कोशिश को नकार दिया था.

रिपोर्टः एएफपी,डीपीए/एन रंजन

संपादनः ए जमाल

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