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थाईलैंड के चुनावों में सत्ताधारी पार्टी की हार

४ जुलाई २०११

निर्वासन में रह रहे थाईलैंड के पूर्व नेता थाकसिन शिनावात्रा की पार्टी ने रविवार को हुए चुनावों में जबर्दस्त जीत हासिल की है. प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा ने हार मानी और यिंग्लुक शिनेवात्रा को जीत की बधाई दी.

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तस्वीर: AP

थाइलैंड की सत्ता के गलियारे में लंबे समय के बाद पुएआ थाई पार्टी की वापसी हुई है. यिंग्लुक शिनावात्रा थाकसिन शिनावात्रा की छोटी बहन हैं और फिलहाल पार्टी की कमान उन्हीं के हाथ में है. संसद की कुल 500 में से 263 सीटें जीतने के बाद अब यह तय हो गया है कि यिंग्लुक शिनावात्रा देश की अगली प्रधानमंत्री होंगी. थाईलैंड में पहली बार कोई महिला इस पद पर काबिज होने जा रही है. सत्ताधारी डेमोक्रैटिक पार्टी को इन चुनावों में महज 161 सीटें ही मिल सकी हैं.

कुल 74 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. चुनाव के नतीजे आने के बाद बैंकॉक में पार्टी के मुख्यालय के बाहर मौजूद समर्थकों से अभिसित ने कहा, "नतीजे साफ हैं पुएआ थाई चुनाव जीत गई है और डेमोक्रैट्स पराजित हुए हैं." पिछले साल थाकसिन के लाल शर्ट वाले समर्थकों के विशाल प्रदर्शन के बाद सरकार के लिए यह पहला चुनाव था. नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि उनकी नीतियां जनता के गले नहीं उतर रही. पिछले साल हुए इन प्रदर्शनों ने बैंकॉक को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया था. इस दौरान हुई हिंसा में काफी लोग मारे गए थे.

Thailand Wahlen Puea Thai Yingluck Shinawatra Rothemden Flash-Galerie
तस्वीर: dapd

नतीजे आने के बाद पुएआ थाई पार्टी के मुख्यालय पर खुशी से चहकती यिंग्लुक शिनावात्रा ने कहा, "थाकसिन ने मुझे बधाई देने के लिए फोन किया था और इस दौरान कहा कि आगे बेहद कठिन चुनौती है." 44 साल की यिंग्लुक एक कारोबारी महिला हैं जिन्हें थाकसिन अपना क्लोन मानते हैं. यिंग्लुक देश की दूसरी छोटी पार्टियों के साथ एक गठबंधन बनाने की कोशिश में हैं. उन्होंने कहा, "लोग मुझे मौका दे रहे हैं और मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगी."

"नतीजों का सम्मान करें"

नतीजे आने के बाद देश में कहीं फिर से विरोध प्रदर्शन न शुरू हो जाएं इस आशंका को देखते हुए यिंग्लुक ने दोनों पक्षों से चुनाव के नतीजों का सम्मान करने की अपील की. दुबई से एक टीवी चैनल को टेलिफोन पर दिए इंटरव्यू में यिंग्लुक ने कहा, "सभी पार्टियों को निश्चित तौर पर नतीजों का सम्मान करना चाहिए, नहीं तो हमारे देश में कभी शांति नहीं आएगी. मुझे लगता है कि लोग मेल मिलाप देखना चाहते हैं. वो आगे बढ़ना चाहते हैं. हम बदला नहीं लेगें."

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तस्वीर: dapd

2006 में सेना ने थाकसिन को कुर्सी से हटा दिया, जिसके बाद वह भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने से बचने के लिए खुद से निर्वासन में चले गए. इन चुनावों में उनका सिक्का खूब चला है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर मुकाबला नजदीकी का होता तो फिर से विवाद छिड़ने की आशंका रहती लेकिन बढ़िया अंतर के साथ जीत ने विवादों को सिर उठाने का मौका नहीं दिया है. पुएआ थाई पार्टी ने सजा पाए राजनेताओं को माफी देने का प्रस्ताव रखा है. इस कदम से थाकसिन के वापस लौटने का रास्ता भी साफ हो जाएगा. हालांकि कुछ जानकार मान रहे हैं कि उनकी वापसी हुई तो सेना उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. इसके साथ ही थाई लोगों में भी फूट पड़ सकती है. थाकसिन से जब उनकी योजना के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "मैं तुरंत घर नहीं लौटने वाला हूं. मैं यहां रह सकता हूं, लेकिन मैं अपनी बेटी की शादी पर घर आना चाहता हूं. मैं अपनी वापसी करके देश में समस्या नहीं पैदा करना चाहता."

थाईलैंड में सेना तो समय समय पर सरकार के कामकाज में दखल देती है, कोर्ट की भी दखलंदाजी चलती रहती है. इससे पहले हुए चुनावों में थाकसिन की पार्टी ने कई चुनाव जीते लेकिन कोर्ट ने उन चुनावों के नतीजे पर रोक लगा दी.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ईशा भाटिया

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