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तालाबंदी में जानवरों का अवैध शिकार बढ़ा

११ मई २०२०

असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों का कहना है कि तालाबंदी के शुरू होने के बाद उद्यान के अंदर और उसके आस-पास जानवरों के अवैध शिकार की कोशिशें बढ़ गई हैं.हाल ही में एक दुर्लभ एक सींघ वाले गैंडे का शव मिला है.

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तस्वीर: picture alliance/dpa/Blickwinkel

तालाबंदी के दौरान असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में रहने वाले जानवरों के लिए संकट बढ़ गया है. उद्यान के अधिकारियों का कहना है कि तालाबंदी के दौरान वहां जानवरों के अवैध शिकार की कोशिशें बढ़ गई हैं. हाल ही में एक दुर्लभ एक सींघ वाले गैंडे को मार दिया गया.

काजीरंगा में एक सींघ वाले गैंडों की विश्व में सबसे बड़ी आबादी रहती है. तालाबंदी में उद्यान के पास वाले राज्यमार्ग पर वाहनों की कमी की वजह से जानवर उद्यान की सीमाओं तक चले जा रहे हैं और उनका शिकार करना आसान हो जा रहा है. उद्यान के निदेशक पी शिवकुमार ने बताया, "हमें शक है कि इस गैंडे को कम से कम दो या तीन दिन पहले मारा गया होगा." उन्होंने यह भी बताया कि गैंडे का सींघ गायब है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गैंडे के एक सींघ से शिकारी ब्लैक मार्केट में डेढ़ लाख डॉलर या लगभग 60,000 डॉलर प्रति किलो कमा सकते हैं. चीन की पारंपरिक इलाज पद्धत्तियों में गैंडे के सींघ का इस्तेमाल होता है और इस वजह से विदेश में इसकी बहुत डिमांड है. शिवकुमार ने यह भी बताया, "हमें एके 47 बंदूक के खाली कारतूसों के आठ राउंड भी मिले हैं."

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तस्वीर: Reuters/A. Hazarika

उन्होंने बताया कि गैंडे का शव उद्यान में एक पानी के स्त्रोत के पास मिला और इसकी अवैध शिकार की एक घटना के रूप में पुष्टि हो चुकी है. काजीरंगा यूनेस्को में सूचीबद्ध एक धरोहर स्थल है. अधिकारियों का कहना है कि यहां यह एक साल में अवैध शिकार का पहला मामला है. बीते वर्षों में कई मामले देखे गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि 25 मार्च से देश भर में तालाबंदी के शुरू होने के बाद उद्यान के अंदर और उसके आस-पास अवैध शिकार की कोशिशें बढ़ गई हैं. अप्रैल में इन दुर्लभ जानवरों को मारने की पांच से भी ज्यादा कोशिशों को उद्यान के रेंजर्स ने विफल कर दिया. राज्य सरकार ने गैंडों की सुरक्षा के लिए एक विशेष फोर्स भी गठित की है. 

एक सींघ वाले गैंडे कभी इस इलाके में बहुतायत में हुआ करते थे, लेकिन शिकार और हैबिटैट के खोने से अब इनकी संख्या सिर्फ कुछ हजारों में रह गई है. इनमें से लगभग सब के सब असम में ही हैं. काजीरंगा ही अब इनका मुख्य ठिकाना है जहां इन्हें आश्रय मिलता है. 2018 में हुई एक गणना के अनुसार यहां 2,413 एक सींघ वाले गैंडे हैं.

काजीरंगा 850 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इसकी स्थापना 1908 में हुई थी जब असम दौरे पर गईं तत्कालीन ब्रिटिश वाइसराय की पत्नी ने शिकायत की थी कि वहां तो एक भी गैंडा नहीं है. अब उद्यान में गैंडों में अलावा बाघ, हाथी और तेंदुए भी रहते हैं.

सीके/एए (एएफपी)

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