1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें
कारोबार

कोरोना के बाद बदल जाएगी पर्यटन उद्योग की तस्वीर

प्रभाकर मणि तिवारी
१९ जून २०२०

कोरोना महामारी और लंबे लॉकडाउन के कारण ठप हो चुका भारत का पर्यटन उद्योग अब लड़खड़ाते हुए दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने का प्रयास कर रहा है. नई सावधानियों और इंतजाम से लैस होकर यह पहले से काफी अलग नजर आ रहा है.

https://p.dw.com/p/3e2TL
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में है हिमालयन बर्ड ट्रेन का विश्वप्रसिद्ध पर्यटन रूट.
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में है हिमालयन बर्ड ट्रेन का विश्वप्रसिद्ध पर्यटन रूट. तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/B. Das

केयर रेटिंग्स की एक रिपार्ट के मुताबिक भारत में इस उद्योग को लॉकडाउन और उड़ानों के बंद होने की वजह से वर्ष 2020 में लगभग 1.25 खरब रुपये के नुकसान का अनुमान है. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से सटे सुंदरबन इलाके की अर्थव्यवस्था तो पूरी तरह पर्यटन पर ही आधारित है. पहले लॉकडाउन और उसके बाद बीते महीने आने वाले अम्फान तूफान ने इस उद्योग की कमर तोड़ दी है.

अब इलाके से बड़े पैमाने पर विस्थापन रोकने और अर्थव्यवस्था को बदहाली से बचाने के लिए सरकार ने बीते 15 जून से इस इलाके में पर्यटन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी है. इसके अलावा राज्य के अकेले समुद्रतटीय शहर दीघा और पहाड़ों की रानी कही जाने वाली दार्जिलिंग में भी धीरे-धीरे ही सही, पर्यटन गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं. हालांकि कोरोना के आतंक की वजह से फिलहाल पर्यटकों की तादाद कम है. लेकिन इस उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि धीरे-धीरे यह आतंक दूर होगा और तब लोग पहले की तरह भारी तादाद में घरों से निकलने लगेंगे.

कितना हुआ नुकसान

दुनिया की तमाम बड़ी ट्रैवल कंपनियों के संगठन वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल ने अंदेशा जताया है कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के वजह से इस उद्योग में दुनिया भर में साढ़े सात करोड़ नौकरियां खत्म होंगी और 2.10 खरब डॉलर का नुकसान होगा. अकेले भारत में इसकी वजह से 1.25 खरब रुपये के नुकसान का अनुमान है.

केयर रेटिंग्स की ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल बीते साल के मुकाबले राजस्व में 40 फीसदी गिरावट का अंदेशा है. अकेले अप्रैल से जून तक के तीन महीनों के दौरान ही भारतीय पर्यटन उद्योग को 69,400 करोड़ रुपये के नुकसान का अंदेशा है. लेकिन अब घरेलू उड़ानें शुरू होने के बाद पर्यटन उद्योग में उम्मीद की किरण पैदा हुई है और इसके धीरे-धीरे पटरी पर लौटने की संभावना जताई जा रही है.

धीरे धीरे खुले

पहली जून से ही कई क्षेत्रों को रियायतें दी जाने लगी हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को खेलने से पहले दो सप्ताह का इंतजार करना मुनासिब समझा. यहां 15 जून से सीमित रूप से कुछ गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं. समुद्रतटीय शहर दीघा में 30 फीसदी होटल खोल दिए गए हैं. सुंदरबन में भी पर्यटकों की आवाजाही को हरी झंडी दिखा दी गई है. देशी-विदेशी पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण रहे दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र को भी आंशिक तौर पर खोल दिया गया है.

राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देब कहते हैं, "हम कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राज्य के विभिन्न पर्यटन केंद्रों में धीरे-धीरे इससे संबंधित गतिविधियों को इजाजत दे रहे हैं. अगर कोरोना संक्रमण की दर में गिरावट आई तो इस उद्योग के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है. वैसी स्थिति में अक्टूबर से नवंबर तक के त्योहारी सीजन में इस उद्योग को होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी.” उनका कहना है कि सरकार एक सप्ताह तक इस क्षेत्र पर निगाह रखने के बाद भावी रणनीति का एलान करेगी.

उम्मीद और आशंकाएं

लेकिन सरकार की इस छूट का जहां पर्यटन उद्योग ने स्वागत किया है वहीं स्थानीय लोग संक्रमण के डर से पर्यटकों की आवाजाही का विरोध कर रहे हैं. बीते सप्ताह दार्जिलिंग पहुंचे बर्दवान के एक परिवार को होटल से जबरन निकाल कर मैदानी इलाके में भेज दिया गया. दीघा में भी इसी तरह महिलाओं ने सड़क की नाकेबंदी कर दी और होटलों में रहने वालों को लौटने पर मजबूर कर दिया. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि स्थानीय लोग आशंकित हैं कि कहीं पर्यटकों के जरिए इलाके में संक्रमण तेजी से नहीं बढ़ने लगे.

अब पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग स्थानीय लोगों से भी बातचीत कर उनकी गतलफहमियां दूर करने का प्रयास कर रहे हैं. दार्जिलिंग होटल ओनर्स एसोसिएशन के एक प्रवक्ता संजय खत्री कहते हैं, "स्थानीय लोगों की चिंता जायज है. हमें उनका भरोसा जीतना होगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो. दीघा के होटल मालिकों ने भी यही बात कही है.” राज्य सरकार ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है. पर्यटन मंत्री कहते हैं, "मैंने संबंधित जिला प्रशासन से बात की है. स्थानीय लोगों को समझाना जरूरी है. कोरोना फिलहाल खत्म नहीं होगा. लेकिन इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को ठप नहीं रखा जा सकता.”

कैसे कैसे इंतजाम

दूसरी ओर, यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में शामिल सुंदरबन बीते 18 मार्च से ही बंद था. इलाके की पूरी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है. अब 15 जून से सरकार ने इसे सशर्त खोलने की अनुमति दे दी है. धीरे-धीरे पर्यटक भी पहुंचने लगे हैं. सुंदरबन टाइगर रिजर्व के निदेशक सुधीर दास बताते हैं, "पर्यटकों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा. लांच से आने वाले तमाम पर्यटकों और कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी. अब उनके लिए फेस मास्क औऱ फेस शील्ड यात्रा का अनिवार्य हिस्सा होगा. हर स्टीमर पर सैनिटाइजरों का इंतजाम रहेगा और हर ट्रिप के बाद लांच को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाएगा.” ऐहतियात के तौर पर सरकार ने 10 साल से कम और 65 साल से ऊपर के पर्यटकों पर लगी पाबंदी नहीं हटाई है. इलाके में एक साथ पांच लांच को प्रवेश की ही अनुमति दी जाएगी ताकि भीड़-भाड़ से बचा जा सके.

एक प्रमुख ट्रैवल एजंसी के मालिक जयदीप मुखर्जी बताते हैं, "भारतीय पर्यटन उद्योग की वापसी की काफी संभावना है. लॉकडाउन ने आम लोगों को कैदी बना दिया था. अब सुरक्षा उपायों के साथ लोग पहले से ज्यादा तादाद में घरों से बाहर निकलेंगे. हां, लोग लंबी ट्रिप की बजाय तीन-चार दिनों के दौरे पर निकलेंगे. हर साल देश के लाखों पर्यटक विदेशों की सैर पर जाते हैं. ऐसे लोग सुरक्षा के लिहाज से अब घरेलू दौरों पर ही जाएंगे.”

दार्जिलिंग के एक होटल मालिक बताते हैं, "बारिश के सीजन में हर साल पर्यटकों की तादाद में गिरावट आती थी. अबकी कोरोना की वजह से हालात गभीर हैं. लेकिन उम्मीद है कि गतिविधियां जल्दी ही तेज होंगी.” अब प्रमुख पर्यटन केंद्रों की बजाय पर्यटक होम स्टे को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं. पर्वतीय क्षेत्र में लगभग दो हजार होम स्टे हैं. गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सहायक निदेशक (पर्यटन) सूरजा शर्मा कहते हैं, "हजारों पर्यटक होम स्टे के विकल्प के बारे में पूछताछ कर रहे हैं. हमने होम स्टे मालिकों के सथ बैठक में उनको बदले हुए हालात में अपनाए जाने वाले ऐहतियाती उपायों की विस्तार से जानकारी दे दी है.”

बदल जाएगी तस्वीर

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अब इस उद्योग की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. अब होटल प्रबंधन और पर्यटक किसी चीज के सीधे स्पर्श से बचेंगे और साफ-सफाई को सबसे प्राथमिकता दी जाएगी. कई होटलों ने तो रूम सर्विस के दौरान कागज के प्लेट और पत्तलों में भोजन की व्यवस्था की है ताकि संक्रमण का खतरा नहीं रहे. एसोचेम टूरिज्म काउंसिल के अध्यक्ष सुभाष गोयल कहते हैं, "अब तमाम होटल अपनी बाकी सुविधाओं के साथ साफ-सफाई और दूसरे ऐहतियाती उपायों का भी प्रचार करेंगे ताकि पर्यटकों के मन में बैठे डर को खत्म किया जा सके. उनका कहना है कि इस क्षेत्र में 3.80 करोड़ नौकरियां खतरे में हैं और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर ही उनको बचाया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय पर्यटन भी शीघ्र शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए.” दीघा के एक होटल मालिक संजय घोष का कहना है कि अब होटलों को आकर्षक पैकेज बनाना होगा. दरअसल पूरे पर्यटन उद्योग को अब अपने पैरों पर खड़े होने के लिए नई नीतियां और योजनाएं बनानी होंगी.

ट्रैवल एजंट्स फेडरेशन आफ इंडिया के पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष अनिल पंजाबी कहते हैं, "शुरुआती दिक्कतों के बाद यह उद्योग तेजी से रफ्तार पकड़ेगा. फिलहाल पर्यटकों में भी आशंका है और स्थानीय लोगों में भी. धीरे-धीरे लोग यह बात समझ जाएंगे कि कोरोना के साथ ही जीना सीखना होगा. उसके बाद कोई दिक्कत नहीं होगी. बस सुरक्षा उपायों का पालन करना जरूरी होगा. बदले हुए हालात में इस उद्योग को भी नई रणनीति बनानी होगी.” वह कहते हैं कि अब इस उद्योग से जुड़े तमाम लोगों को हाइजिन पर ज्यादा ध्यान होगा और सुरक्षा उपायों पर गंभीरता से अमल करना होगा. इसी से पर्यटकों का भरोसा हासिल किया जा सकता है.

__________________________

हमसे जुड़ें: Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore