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अफगानिस्तान में भड़कीली शादियों पर पाबंदी की तैयारी

५ जनवरी २०११

धूम धड़ाके, गाजे बाजे और नाच गाने के साथ होने वाली भड़कीली शादियों पर तालिबान ने पाबंदी लगाई थी अब अफगानिस्तान करजई सरकार भी ऐसी शादियों को सादगी लाने की तैयारी में जुट गई है.

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तस्वीर: picture-alliance/dpa

काबुल के सिटी स्टार हॉल में अंदर घुसने के लिए चमकीला चांद खड़ा है. मेहमान जब इस रास्ते से गुजरते हैं तो उन्हें चांद पर पहुंचने का ही अहसास होता है. अंदर चांदी के बने बड़े सितारों की छांव में शादी और मेहमानों की आवभगत की तैयारी है. यहां दूल्हा दुल्हन के बैठने की जगह के सामने बड़ा सा फव्वारा है और यहां तक पहुंचने के लिए उनके कदम जहां जहां पड़ते हैं वहां रोशनी की जगमग और फूलों की पंखुड़ियां भी हैं. तीन महीने पहले 25 करोड़ रुपये खर्च करके ये शादी घर बनवाया गया. शादी घर के सौ से ज्यादा स्टाफ मेहमानों की आवभगत की तैयारी में जुटे हैं.

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तस्वीर: Karlos Zurutuza

इसमें शादी के लिए चार हॉल हैं और हर महीने यहां 70 शादियां होती हैं. इनमें से हर में करीब 800 से 1000 मेहमान होते हैं. एक मेहमान के खाने का खर्च 500 रुपये से 1000 रुपये तक है. संगीत, केक, सजावट और फोटोग्राफी का खर्च अलग. शादीघर के मैनेजर जबी मुजीब ने बताया कि शहरों में रहने वाले लोग ज्यादा मेहमान नहीं बुलाते लेकिन शहर से बाहर रहने वाले लोगों की शादियों में खूब मेहमान आते हैं. कई बार तो मेहमानों की तादाद 1600 से 1800 तक पहुंच जाती है. पिछले नौ सालों में काबुल और आस पास के इलाकों में ऐसे कई महंगे शादीघर तैयार हो गए.

24 साल के रफी काजिमी की अक्टूबर में फारिमा से शादी पर उनके परिवार ने करीब पांच लाख रुपये खर्च किये. 600 से ज्यादा मेहमानों ने जम कर दावत उड़ाई अब टैक्सी ड्राइवर काजिमी के परिवार पर तीन लाख रूपये का कर्ज है. हाल ही में काजिमी की नौकरी भी चली गई. उनकी पत्नी, मां, पिता, दादा, दो बहनों, तीन भाई और उनकी पत्नियों के खर्च का बोझ बड़े भाई की 17000 रूपये मासिक तनख्वाह पर है. इनमें से करीब 12 हजार तो बैंक का कर्ज चुकाने में ही खर्च हो जाते हैं.

शादी के बाद अब काजिमी की सबसे बड़ी चिंता ये कर्ज है. काजिमी कहते हैं, "बहुत ज्यादा खर्च हो गया, मैं बहुत चिंता में था कि पैसा कैसे आएगा लेकिन मेरी बीवी के घरवालों को इस बात की जरा भी चिंता नहीं कि मेरे पास पैसा है या नहीं वो तो बस इसी बात पर जोर देते रहे कि शादी का इंतजाम जबर्दस्त होना चाहिए." शादी के महंगे इंतजाम के अलावा दूल्हे के परिवार को दूल्हा दुल्हन के लिए बेशकीमती कपड़े भी बनवाने पड़ते हैं. काजिमी भड़कीली शादियों पर पाबंदी लगाए जाने के पक्ष में हैं हालांकि उन्हें इस बात की आशंका है कि लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं.

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जंग के दौर में भी फिजूलखर्चीतस्वीर: AP

अफगानिस्तान पर अमेरिकी फौज के हमले के बाद तालिबान की कमान ढीली पड़ते ही वहां रंग बिरंगी शादियों का मौसम लौट आया. 20 हजार रुपये सालाना प्रति व्यक्ति आय वाले देश में लोग लाखो रूपये शादियों पर खर्च कर देते हैं. खूब जश्न होता है हजारों लोगों की दावत होती है. दूल्हा और उसके परिवार वाले महंगे बारात घरों में दुल्हन और उसके परिवार की फरमाइशें पूरी करने की कोशिश में एक पांव पर खड़े होते हैं.

न्याय मंत्री हबीबुल्लाह गालिब बताते हैं,"शादियों का जश्न तो यहां एक तरह के मुकाबले जैसा है जिसमें कोई पीछे नहीं रहना चाहता, शादी करने वाले सैकड़ों लोगों को दावत देते हैं और अपने धन दौलत की नुमाइश करते हैं.इसका खामियाजा परिवार पर पड़ता है जिन्हें इसका बोझ उठाना पड़ता है." अब सरकार कानून बनाकर ऐसी शादियों पर रोक लगाना चाहती है.

सरकार की पाबंदियों में क्या शामिल होगा और क्या नहीं इस पर विस्तार से अभी जानकारी नहीं मिल पाई है. हालांकि बड़ी समस्या होगी इस कानून का पालन कराना. न्याय मंत्रालय के प्रवक्ता फरीद अहमद नजीबी ने कहा कि अफगानिस्तान की संस्कृति से ये शादियां इस तरह से जुड़ी हुई हैं कि इन्हें रोक पाना बेहद मुश्किल होगा.

लंबे समय से चले आ रहे जंग जैसे हालात में सरकारी एजेंसियां एक तरह से लाचार हो गई हैं. इसके अलावा जातीय हिंसा भी अमन की राह में बड़ी बाधा है. तालिबान के सत्ता से बाहर होने के बाद हिंसा बढ़ गई है ऐसे में कानून का पालन करा पाना बेहद मुश्किल है.

शादियों को सादा बनाने की सरकार की कोशिशें का असर कुछ कबीलों के नेताओं और प्रांतीय अधिकारियों पर दिख रहा है.पिछले महीने उत्तरी जावज्जान के कई गांवों के बुजुर्गों ने भड़कीली शादियों और दहेज पर रोक लगा दी. उन्होंने दलील दी कि खर्च न जुटा पाने की वजह से शादियों को रद्द करने से अच्छा है कि सादे तरीके से शादी कर ली जाए. इन गांवों में नियम बनाया गया कि शादी का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर होगा और अगर किसी ने इसे नहीं माना तो उसे इलाके की दूसरी शादियों में न्योता नहीं दिया जाएगा.

जवाज्जान के एक बुजुर्ग आजाद ख्वा कहते हैं,"शादी करना सबका हक है और दुल्हा या दुल्हन पर इसके लिए खर्चों का बोझ नहीं डाल जाना चाहिए. दूल्हे के परिवार वालों को सारे खर्च और सैकड़ों लोगों को खिलाने के लिए कहना एक बड़ा जुर्म है." कुछ समय पहले पाकिस्तान में भी वलीमे के खाने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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